Dhamaal 4 Review: कमजोर VFX और फीकी कॉमेडी ने बिगाड़ा खेल, जानिए कैसी है ‘धमाल 4’

Dhamaal 4 Review: इंद्र कुमार के निर्देशन में बनी अजय देवगन, अरशद वारसी और रितेश देशमुख स्टारर फिल्म ‘धमाल 4’ सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। जानिए क्या ये आपको हंसाने में कामयाब रही या नहीं।

Dhamaal 4 Review: बॉलीवुड में एक सफल कॉमेडी फ्रैंचाइजी बनाना जितना आसान है, दर्शकों को सालों बाद भी उसी शिद्दत से हंसा पाना उतना ही मुश्किल। साल 2007 में आई ‘धमाल’ ने बिना किसी डबल मीनिंग और बिना किसी भारी-भरकम इमोशनल ड्रामे के दर्शकों को लोटपोट कर दिया था। इसके बाद ‘डबल धमाल’ (2011) और ‘टोटल धमाल’ (2019) आईं, जिन्होंने स्टारकास्ट और बजट तो बढ़ाया, लेकिन कॉमेडी का स्तर गिरता गया। अब साल 2026 में निर्देशक इंद्र कुमार इस फ्रैंचाइजी की चौथी किस्त ‘धमाल 4′ (Dhamaal 4) लेकर आए हैं।

क्या है ‘धमाल 4’ की कहानी? (Plot)

फिल्म की शुरुआत होती है ‘अधूरा’ (रवि किशन) नाम के एक किरदार से, जो खुद को समुद्र का सबसे बड़ा डाकू समझता है। उसका अंदाज देखकर ऐसा लगता है मानो हॉलीवुड फिल्म ‘पाइरेट्स ऑफ द कैरेबियन’ का कोई सस्ता भोजपुरी रीमेक चल रहा हो। इसी बीच एक प्राचीन खजाने का सुराग मिलता है, जिसकी चाबी ‘पृथ्वी’ यादों में दफन है।

जैसे ही पृथ्वी इस खजाने का राज उगलता है, यह बात सिर्फ गुड्डू (अजय देवगन) तक सीमित नहीं रहती। हमेशा की तरह आदि (अरशद वारसी), मानव (जावेद जाफरी), लल्लन (रितेश देशमुख) के साथ-साथ दो महिलाएं और दो बच्चे भी इस दौड़ में कूद पड़ते हैं। इसके बाद सभी एक विशाल ‘M’ निशान वाले रहस्यमयी द्वीप की ओर निकल पड़ते हैं। लेकिन कहानी वहीं की वहीं थमी रहती है।

स्टारकास्ट का सहारा, स्क्रिप्ट ने छोड़ा साथ

‘धमाल 4’ को देखकर ऐसा लगता है कि मेकर्स को स्क्रिप्ट से ज्यादा अपनी भारी-भरकम स्टारकास्ट पर भरोसा था। अजय देवगन ने सिग्नचर स्टाइल में बेहद सहज और ठीक नजर आए हैं। अरशद वारसी और जावेद जाफरी की आइकॉनिक जोड़ी ने अपनी बेहतरीन कॉमिक टाइमिंग से कई बेहद फीके और उबाऊ सीन्स को संभाल लिया है। रितेश देशमुख, संजय मिश्रा और रवि किशन इन सभी ने अपने सीमित स्क्रीन टाइम में दर्शकों का ध्यान खींचने की पूरी कोशिश की है।

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निर्देशन और कमजोर कड़ियां (Direction & Music)

निर्देशक इंद्र कुमार का विजन इस बार काफी पुराना और थका हुआ नजर आता है। उन्होंने फ्रेश और नए कॉमिक ट्रीटमेंट की जगह 19 साल पुराने फॉर्मूले और नॉस्टैल्जिया के भरोसे फिल्म को चलाने की कोशिश की है। फिल्म में कई जगह केवल शोर-शराबा बढ़ाने को ही कॉमेडी समझ लिया गया है, जो दर्शकों को हंसाने के बजाय सिरदर्द देने लगती है।

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VFX ने किया पूरी तरह निराश

इस फिल्म का VFX सबसे कमजोर कड़ी साबित हुआ है। मेकर्स ने बड़े स्केल का एडवेंचर दिखाने की कोशिश तो की, लेकिन स्क्रीन पर विजुअल्स देखकर लगता है कि यह कोई अधूरी फिल्म नहीं बल्कि कंप्यूटर का कोई अधूरा प्रोजेक्ट है। इतने बड़े बजट की फिल्म से ऐसे दर्जे के VFX की उम्मीद बिल्कुल नहीं की जा सकती।

अगर आप केवल अरशद वारसी, जावेद जाफरी और अजय देवगन के पक्के फैन हैं और बिना सिर-पैर की भागदौड़ देख सकते हैं, तो ही थिएटर का रुख करें; अन्यथा इस ‘धमाल’ से दूरी बनाना ही बेहतर होगा।

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