
कम वोटिंग ने बढ़ाई सियासी टेंशन! बांकीपुर में किसके पक्ष में जाएगा चुनावी गणित?
Bankipur Bypoll Voting: बिहार की बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में अपेक्षा से काफी कम मतदान ने सियासी गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। इस सीट पर महज 34.3 फीसदी मतदान दर्ज किया गया, जो 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में हुए 40.97 फीसदी मतदान से काफी कम है। मतदान प्रतिशत में आई इस गिरावट के बाद अब राजनीतिक दलों के साथ-साथ चुनावी विश्लेषकों की नजरें 3 अगस्त को होने वाली मतगणना पर टिक गई हैं।
इस उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी के बीच त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिला। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि कम मतदान किसके पक्ष में जाएगा और किसकी उम्मीदों पर पानी फेर सकता है।
त्रिकोणीय मुकाबले ने बढ़ाया रोमांच
बांकीपुर सीट पर भाजपा ने नीरज कुमार सिन्हा, राजद ने रेखा गुप्ता और जन सुराज ने प्रशांत किशोर को मैदान में उतारा है। तीनों दलों ने चुनाव प्रचार के दौरान अपनी-अपनी जीत का दावा किया था, लेकिन मतदान प्रतिशत उम्मीद से कम रहने के बाद सभी खेमों में बेचैनी बढ़ गई है।
भाजपा इस सीट को अपना मजबूत गढ़ मानती है और लगातार यहां अपना वर्चस्व बनाए रखने की कोशिश में है। वहीं राजद को उम्मीद है कि बदले राजनीतिक माहौल में वह अपने वोट प्रतिशत में सुधार कर सकती है। दूसरी ओर प्रशांत किशोर की जन सुराज इस उपचुनाव को अपनी राजनीतिक ताकत साबित करने का बड़ा अवसर मान रही है।
क्या कम वोटिंग से किसी एक दल को मिलेगा फायदा?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि केवल कम मतदान के आधार पर किसी एक पार्टी की जीत या हार का अनुमान लगाना सही नहीं होगा। चुनावी नतीजे इस बात पर निर्भर करेंगे कि किस दल के कोर वोटर अधिक संख्या में मतदान केंद्र तक पहुंचे।
यदि किसी पार्टी का पारंपरिक वोट बैंक पूरी तरह मतदान करने निकला है, जबकि दूसरे दलों के समर्थक घरों में ही रहे, तो कम मतदान उसी पार्टी के लिए फायदे का सौदा बन सकता है। इसलिए मतदान प्रतिशत से ज्यादा महत्वपूर्ण वोटरों का व्यवहार और मतदान का सामाजिक समीकरण माना जा रहा है।
भाजपा के सामने गढ़ बचाने की चुनौती
बांकीपुर लंबे समय से भाजपा का मजबूत क्षेत्र माना जाता रहा है। ऐसे में पार्टी के लिए इस सीट को बरकरार रखना प्रतिष्ठा का सवाल है। यदि कम मतदान भाजपा के पारंपरिक समर्थकों की उदासीनता का संकेत है तो पार्टी को नुकसान उठाना पड़ सकता है। हालांकि भाजपा का दावा है कि उसके समर्थकों ने पूरी सक्रियता से मतदान किया है।
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राजद और जन सुराज की उम्मीदें
राजद को उम्मीद है कि शहरी मतदाताओं और अपने पारंपरिक सामाजिक समीकरण के सहारे वह मुकाबले को रोचक बना सकती है। वहीं जन सुराज का दावा है कि बदलाव चाहने वाले मतदाताओं ने उनके पक्ष में मतदान किया है और परिणाम सभी को चौंका सकते हैं।
प्रशांत किशोर के लिए यह चुनाव केवल एक सीट का नहीं, बल्कि उनकी राजनीतिक स्वीकार्यता की भी परीक्षा माना जा रहा है।
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अब 3 अगस्त पर टिकी निगाहें
कम मतदान के बाद राजनीतिक दल अपने-अपने स्तर पर बूथवार आंकड़ों का विश्लेषण करने में जुट गए हैं। सभी की नजरें अब 3 अगस्त को होने वाली मतगणना पर हैं, जब यह साफ होगा कि कम मतदान का फायदा किसे मिला और किसकी रणनीति सफल रही।
बांकीपुर उपचुनाव का परिणाम न केवल इस सीट की राजनीतिक दिशा तय करेगा, बल्कि आगामी बिहार विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश की राजनीति को भी नया संदेश देने वाला साबित हो सकता है।
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