
‘युद्ध और संघर्ष का शिकार न बनें नाविक’, हॉर्मुज हमले पर कैप्टन पाराशर ने जताई चिंता
Lucknow: हॉर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीय मर्चेंट नेवी के नाविकों पर हुए हमले को लेकर चिंता जताई गई है। शनिवार को लखनऊ के गोमतीनगर स्थित एक निजी होटल में वी.आर. मारिटाइम की ओर से ‘नाविक मान-सम्मान गोष्ठी’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में समुद्री क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों, नाविकों और उनके परिजनों ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और नेशनल शिपिंग बोर्ड के पूर्व सदस्य कैप्टन संजय पाराशर ने हॉर्मुज में भारतीय नाविकों पर हुए हमले को बेहद दुखद और अकारण बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी देश के युद्ध, सैन्य कार्रवाई या राजनीतिक संघर्ष का खामियाजा निर्दोष सीफेयरर्स को नहीं भुगतना चाहिए।
समुद्र में नाविकों की सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती
कैप्टन पाराशर ने कहा कि मौजूदा दौर में समुद्र में जहाजों पर तैनात नाविकों की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बन गई है। अंतरराष्ट्रीय तनाव और युद्ध जैसे हालात के बीच मर्चेंट नेवी के नाविक लगातार अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि समुद्र में काम करने वाले नाविक केवल अपने परिवारों के लिए ही नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वैश्विक व्यापार और जरूरी सामान की आपूर्ति काफी हद तक समुद्री परिवहन पर निर्भर है। ऐसे में समुद्री मार्गों को सुरक्षित रखना अंतरराष्ट्रीय समुदाय की साझा जिम्मेदारी होनी चाहिए।
‘युद्ध का शिकार न बनें निर्दोष सीफेयरर्स’
कैप्टन पाराशर ने जोर देकर कहा कि किसी भी राजनीतिक या सैन्य संघर्ष में निर्दोष नाविकों को निशाना बनाना उचित नहीं है। उन्होंने समुद्री मार्गों पर काम करने वाले सीफेयरर्स के लिए बेहतर सुरक्षा व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी सुरक्षा तंत्र की आवश्यकता बताई।
उन्होंने कहा कि नाविक कठिन परिस्थितियों में समुद्र के बीच रहकर अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं। युद्ध और तनाव के दौरान उनके सामने जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। इसलिए उनकी सुरक्षा को प्राथमिकता देना बेहद जरूरी है।
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नाविकों और उनके परिवारों का सम्मान
‘नाविक मान-सम्मान गोष्ठी’ का उद्देश्य समुद्री क्षेत्र में योगदान देने वाले नाविकों और उनके परिवारों के प्रति सम्मान व्यक्त करना भी रहा। कार्यक्रम में समुद्री क्षेत्र से जुड़े लोगों ने नाविकों की समस्याओं, उनकी सुरक्षा और उनके कल्याण से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की।
वक्ताओं ने कहा कि मर्चेंट नेवी के नाविक अक्सर लंबे समय तक अपने परिवारों से दूर रहकर कठिन परिस्थितियों में काम करते हैं। देश और दुनिया के व्यापार को सुचारु बनाए रखने में उनके योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
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समुद्री सुरक्षा के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी
कार्यक्रम के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि समुद्री सुरक्षा केवल किसी एक देश की जिम्मेदारी नहीं है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर बढ़ते तनाव और संघर्ष को देखते हुए विभिन्न देशों, समुद्री संगठनों और सुरक्षा एजेंसियों को मिलकर काम करना होगा।
कैप्टन पाराशर ने कहा कि समुद्र में काम करने वाले नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में ऐसे कदम उठाए जाएंगे, जिससे युद्ध और राजनीतिक तनाव के बावजूद निर्दोष नाविक सुरक्षित रह सकें।
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