आरक्षण की गलती पर नहीं जाएगी नौकरी, UP में 75 JE को हाईकोर्ट से बड़ी राहत…

UP Junior Engineer News: उत्तर प्रदेश में जूनियर इंजीनियरों की नौकरी से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने उत्तर प्रदेश जल निगम में वर्ष 2013 में नियुक्त जनरल कैटेगरी के जूनियर इंजीनियरों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने नौकरी से हटाने की कार्रवाई को रद्द करते हुए कहा कि भर्ती प्रक्रिया में अधिकारियों की गलती की सजा निर्दोष कर्मचारियों को नहीं दी जा सकती।

2013 की भर्ती में नियुक्त हुए थे जूनियर इंजीनियर
जस्टिस इरशाद अली की पीठ ने जूनियर इंजीनियर राकेश प्रताप सिंह समेत 25 अन्य जेई की ओर से दाखिल अलग-अलग याचिकाओं पर फैसला सुनाया। याचिकाकर्ताओं के मुताबिक उनकी नियुक्तियां स्वीकृत पदों पर सक्षम प्राधिकारी की ओर से नियमित चयन प्रक्रिया के तहत की गई थीं।

कोर्ट ने पाया कि इन कर्मचारियों के खिलाफ धोखाधड़ी, गलत जानकारी देने या चयन प्रक्रिया में हेरफेर का कोई आरोप नहीं था। इसके बावजूद उन्हें नौकरी से हटाने की कार्रवाई की गई थी।

आरक्षण की गलती पर कर्मचारियों को हटाना सही नहीं
हाईकोर्ट ने कहा कि आरक्षण नीति को लागू करना जरूरी है, लेकिन आरक्षण से संबंधित किसी त्रुटि को दूर करने के लिए कानून और मूल चयन प्रक्रिया के विपरीत कार्रवाई नहीं की जा सकती।

जल निगम की ओर से यह तर्क दिया गया था कि कर्मचारियों को नौकरी से हटाना ही एकमात्र विकल्प था। कोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया। अदालत के अनुसार आरक्षित श्रेणी के अतिरिक्त उम्मीदवारों को उपलब्ध रिक्त पदों पर समायोजित किया जा सकता था।

अधिकारियों की गलती की सजा कर्मचारियों को नहीं
कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि यदि किसी भर्ती प्रक्रिया में अधिकारियों की ओर से गलती हुई है और नियुक्त कर्मचारियों की उसमें कोई भूमिका नहीं है, तो उन्हें उस गलती के लिए दंडित नहीं किया जा सकता।

अदालत ने कहा कि आरक्षण का पालन कानून के अनुसार होना चाहिए, लेकिन आरक्षण लागू करने के नाम पर वैध चयन प्रक्रिया से नियुक्त किए गए कर्मचारियों को हटाना उचित नहीं है।

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राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग का 2014 का आदेश भी रद्द
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के 28 जनवरी 2014 के आदेश को भी रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि यह आदेश अधिकार क्षेत्र के बिना जारी किया गया था।

अदालत के मुताबिक, जिस आदेश को जारी करने का वैधानिक आधार ही नहीं था, उसके आधार पर की गई बाद की प्रशासनिक कार्रवाई को भी स्वतंत्र रूप से बरकरार नहीं रखा जा सकता।

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कर्मचारियों को बड़ी राहत
हाईकोर्ट के इस फैसले से प्रभावित जूनियर इंजीनियरों को बड़ी राहत मिली है। कोर्ट के फैसले ने यह साफ कर दिया है कि आरक्षण नीति का पालन जरूरी है, लेकिन अधिकारियों की गलती के लिए वैध प्रक्रिया से नियुक्त निर्दोष कर्मचारियों को नौकरी से हटाकर दंडित नहीं किया जा सकता।

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