
रोजी-रोटी पर संकट! मराठी अनिवार्यता के खिलाफ मुंबई में ऑटो-टैक्सी चालकों की हड़ताल
तीन दिन की हड़ताल पर ऑटो-टैक्सी ड्राइवर, बोले- 55-60 की उम्र में नई भाषा सीखना मुश्किल; 15-20 हजार के जुर्माने से परिवार चलाना होगा और कठिन
Mumbai: मुंबई में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों ने मराठी भाषा की अनिवार्यता के विरोध में तीन दिवसीय हड़ताल शुरू कर दी है। सोमवार से बड़ी संख्या में ऑटो और टैक्सियों के पहिए थमने से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ड्राइवरों का कहना है कि उम्र के इस पड़ाव पर उनके लिए नई भाषा सीखना आसान नहीं है और नियम तोड़ने पर लगाए जाने वाले भारी जुर्माने से उनकी रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो जाएगा।
हड़ताल पर बैठे ड्राइवरों ने सरकार से नियमों पर दोबारा विचार करने की मांग की है। उनका कहना है कि कई ड्राइवर 55 से 60 वर्ष की उम्र के हैं और कुछ ने औपचारिक शिक्षा भी हासिल नहीं की है। ऐसे में अचानक मराठी बोलने की अनिवार्यता लागू करना उनके लिए मुश्किल है।
’60 साल की उम्र में अचानक मराठी कैसे सीखें?
हड़ताल कर रहे एक ऑटो चालक ने कहा कि उनकी तीन दिन की हड़ताल है, लेकिन उनकी बात सुनने वाला कोई नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर 60 साल के व्यक्ति से अचानक मराठी बोलने के लिए कहा जाएगा तो वह इतनी उम्र में नई भाषा कैसे सीखेगा। ड्राइवरों ने कहा कि वे सरकार से टकराव नहीं चाहते, बल्कि अपने लिए न्याय की मांग कर रहे हैं।
एक अन्य चालक ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि कई ड्राइवर 55-60 साल के हैं और वे कभी स्कूल नहीं गए। ऐसे में उनके लिए मराठी सीखना बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि कई लोग टूटी-फूटी मराठी बोलने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन पर जुर्माना लगाया जा रहा है।
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15-20 हजार रुपये के जुर्माने का विरोध
ड्राइवरों का सबसे बड़ा विरोध भाषा संबंधी नियमों के उल्लंघन पर लगाए जाने वाले कथित 15 से 20 हजार रुपये तक के जुर्माने को लेकर है। उनका कहना है कि रोजाना कमाई करने वाले ड्राइवरों के लिए इतनी बड़ी रकम का जुर्माना भरना बेहद मुश्किल है।
ड्राइवरों का कहना है कि परिवार का खर्च ऑटो और टैक्सी चलाकर ही चलता है। ऐसे में भारी जुर्माना उनकी आर्थिक स्थिति को और खराब कर सकता है।
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हड़ताल से यात्रियों की बढ़ी मुश्किल
तीन दिन की हड़ताल के कारण मुंबई में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर भी असर पड़ने की आशंका है। ऑटो और टैक्सी रोजाना बड़ी संख्या में यात्रियों के लिए लोकल ट्रेन, मेट्रो और बसों तक पहुंचने का महत्वपूर्ण साधन हैं। इनके सड़कों से हटने के कारण यात्रियों को वैकल्पिक परिवहन साधनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
ड्राइवरों ने सरकार से मांग की है कि भाषा संबंधी नियमों को लागू करने से पहले उनकी उम्र, शिक्षा और आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखा जाए।
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