
तमिलनाडु में नवोदय स्कूलों को लेकर SC सख्त, हिंदी पर राज्य सरकार के रुख पर उठाए सवाल
तमिलनाडु के हर जिले में नवोदय विद्यालय के लिए जमीन तलाशने के आदेश को वापस लेने की राज्य सरकार की मांग सुप्रीम कोर्ट ने ठुकराई, तीन महीने में जमीन चिन्हित करने का निर्देश
Supreme Court: तमिलनाडु में जवाहर नवोदय विद्यालयों की स्थापना को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने प्रत्येक जिले में नवोदय विद्यालय के लिए उपयुक्त सरकारी जमीन की पहचान करने के अपने पुराने आदेश को वापस लेने से इनकार करते हुए तमिलनाडु सरकार को तीन महीने के भीतर जमीन चिन्हित करने का निर्देश दिया है।
हिंदी को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
17 सितंबर 2026 को जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने मामले की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान अदालत ने तमिलनाडु सरकार के हिंदी को लेकर रुख पर टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य को अपनी सोच में बदलाव करना चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसा नहीं हो सकता कि तमिलनाडु की धरती पर हिंदी को पूरी तरह बाहर रखा जाए।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल राज्य सरकार से जमीन खरीदने या उसका अधिग्रहण करने के लिए नहीं कहा गया है। उसे केवल नवोदय विद्यालयों की स्थापना के लिए उपयुक्त जमीन की पहचान करनी है। इसके लिए कोर्ट ने तीन महीने का समय दिया है।
तमिलनाडु सरकार ने क्या तर्क दिया?
तमिलनाडु सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जयदीप गुप्ता ने दलील दी कि नवोदय विद्यालयों की भाषा व्यवस्था राज्य की मौजूदा दो-भाषा नीति से अलग है। राज्य सरकार को आशंका है कि नवोदय विद्यालयों के जरिए हिंदी को बढ़ावा मिलेगा और इससे तमिल भाषा पर हिंदी थोपे जाने की स्थिति बन सकती है।
राज्य की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि शिक्षा और भाषा नीति से जुड़े विषयों पर तमिलनाडु की अपनी नीति है। इसी आधार पर सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से दिसंबर 2025 में दिए गए जमीन चिन्हित करने के अंतरिम निर्देश को वापस लेने की मांग की थी।
दिसंबर 2025 में क्या हुआ था?
दरअसल, 15 दिसंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के प्रत्येक जिले में जवाहर नवोदय विद्यालय स्थापित करने के लिए आवश्यक जमीन की पहचान करने का निर्देश दिया था। राज्य सरकार ने बाद में इस आदेश को वापस लेने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। लेकिन 17 सितंबर 2026 की सुनवाई में अदालत ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया।
सुप्रीम कोर्ट ने अब राज्य सरकार को अपने पहले के आदेश का पालन करने के लिए तीन महीने का अतिरिक्त समय दिया है।
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केंद्र और राज्य को बातचीत की सलाह
अदालत ने इस पूरे विवाद को टकराव के बजाय बातचीत के जरिए सुलझाने पर जोर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और तमिलनाडु सरकार को सहकारी संघवाद की भावना के तहत भाषा नीति और नवोदय विद्यालयों से जुड़े मतभेदों पर चर्चा करने की सलाह दी।
केंद्र की ओर से यह भी बताया गया कि गैर-हिंदी भाषी राज्यों में नवोदय विद्यालयों में शुरुआती कक्षाओं की पढ़ाई क्षेत्रीय भाषा या अंग्रेजी में होती है। ऐसे में अदालत ने दोनों पक्षों के बीच संवाद के जरिए समाधान निकालने पर जोर दिया है।
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तमिलनाडु में अभी एक भी नवोदय विद्यालय नहीं
नवोदय विद्यालय केंद्र सरकार द्वारा संचालित आवासीय विद्यालय हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक तमिलनाडु फिलहाल ऐसा राज्य है जहां एक भी जवाहर नवोदय विद्यालय नहीं है। राज्य सरकार लंबे समय से इन स्कूलों की तीन-भाषा व्यवस्था को लेकर आपत्ति जताती रही है।
सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद अब तमिलनाडु सरकार को प्रत्येक जिले में संभावित जमीन की पहचान करनी होगी। मामले पर आगे की सुनवाई दिसंबर में होने की बात सामने आई है।
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