‘क्या 10 साल में व्यवस्था सुधरी?’ दिल्ली-NCR रेप मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान

Supreme Court: दिल्ली-NCR में हालिया यौन अपराधों पर सुप्रीम कोर्ट का स्वतः संज्ञान, आस्था कुंज पार्क गैंगरेप समेत मामलों पर जताई गंभीर चिंता

Delhi NCR: दिल्ली-NCR में महिलाओं और नाबालिगों के खिलाफ हाल में सामने आई यौन अपराधों की घटनाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को स्वतः संज्ञान लिया। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने मामले को स्वतः जनहित याचिका के तौर पर दर्ज करने का निर्देश दिया। अदालत ने दिल्ली पुलिस से भी मामले में जवाब मांगा है।

सुप्रीम कोर्ट का यह कदम दक्षिण दिल्ली के आस्था कुंज पार्क में 17 वर्षीय किशोरी के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म समेत हालिया मामलों के बाद आया है। कोर्ट ने सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि पार्क, सड़क और बस जैसे स्थानों को सुरक्षा व्यवस्था की कमी के कारण ‘हाई रिस्क जोन’ नहीं बनने दिया जा सकता।

निर्भया कांड की याद का जिक्र
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने हालिया घटनाओं को 2012 के निर्भया कांड से जोड़ते हुए कहा कि इन मामलों से उस घटना की पीड़ादायक समानताएं सामने आती हैं। पीठ ने यह सवाल भी उठाया कि पिछले एक दशक में कानून-व्यवस्था लागू करने वाली व्यवस्था में वास्तव में कितना सार्थक सुधार हुआ है।

अदालत ने यह भी कहा कि केवल घटनाओं के बाद संवेदना व्यक्त करना पर्याप्त नहीं है। सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन और कानून-व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों को प्रभावी कदम उठाने होंगे।

आस्था कुंज पार्क की घटना बनी प्रमुख वजह
21 सितंबर को दक्षिण दिल्ली के आस्था कुंज पार्क में 17 वर्षीय लड़की के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म का मामला सामने आया था। पुलिस के अनुसार, तीन आरोपियों ने कथित तौर पर खुद को पुलिसकर्मी बताया और किशोरी तथा उसके दोस्त को रोका। बाद में पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया।

घटना के बाद पार्क की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठे। रिपोर्टों में पार्क में पर्याप्त रोशनी, CCTV निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी कमियों का उल्लेख किया गया है।

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सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट की चिंता
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर पर्याप्त रोशनी, निगरानी और अन्य बुनियादी सुरक्षा सुविधाओं की कमी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब दिल्ली में हालिया यौन अपराधों के बाद पार्कों और अन्य सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

आस्था कुंज पार्क की घटना के बाद दिल्ली के सभी पार्कों का सुरक्षा ऑडिट कराने के निर्देश भी दिए गए थे। इसमें रोशनी, सुरक्षा व्यवस्था, साफ-सफाई और पुलिस पेट्रोलिंग जैसे पहलुओं की समीक्षा करने को कहा गया था।

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अब सुप्रीम कोर्ट में होगी मामले की सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वतः संज्ञान लिए जाने के बाद अब दिल्ली-NCR में महिलाओं और नाबालिगों की सुरक्षा से जुड़े व्यापक मुद्दों पर सुनवाई होगी। अदालत का फोकस सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था, पुलिस निगरानी और प्रशासनिक जिम्मेदारी जैसे पहलुओं पर रह सकता है।

इस मामले में आगे की सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस और संबंधित प्रशासनिक एजेंसियों से सुरक्षा व्यवस्था और हालिया घटनाओं को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

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