
UPI Payment पर 0.4% चार्ज का मामला पहुंचा SC, पूछा- MDR फीस है या टैक्स?
Supreme Court To Govt On MDR: ₹2,000 से ज्यादा के UPI मर्चेंट पेमेंट पर 0.4% MDR को लेकर सुप्रीम कोर्ट के सवाल, सरकार और RBI से पूछा- चार्ज फीस है या टैक्स और इससे कमाई किसे होगी?
New Delhi: UPI MDR (Merchant Discount Rate) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को अहम सुनवाई हुई। ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा UPI मर्चेंट पेमेंट पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू करने के केंद्र के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और संबंधित पक्षों से कई सवाल पूछे। अदालत ने खास तौर पर जानना चाहा कि इस शुल्क से कमाई किसे होगी और इसका कानूनी स्वरूप क्या है।
15 अक्टूबर से लागू होना है नया UPI MDR नियम
नए फ्रेमवर्क के तहत ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा Person-to-Merchant (P2M) UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लगाया जाना है। ₹75,000 या उससे अधिक के लेनदेन पर MDR की अधिकतम सीमा ₹300 रखी गई है। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होनी है।
सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि MDR ग्राहक से सीधे नहीं लिया जाएगा, बल्कि यह मर्चेंट पेमेंट इकोसिस्टम के भीतर लागू होगा। सरकार के अनुसार MDR से मिलने वाली राशि बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स और UPI ऐप प्रोवाइडर्स समेत इकोसिस्टम में शामिल संस्थाओं के बीच साझा की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार और RBI से क्या पूछा?
सुनवाई के दौरान अदालत ने MDR की व्यवस्था को लेकर सरकार और RBI से विस्तृत जानकारी मांगी है। प्रमुख सवालों में यह शामिल है कि:
- ₹2,000 से अधिक के UPI पेमेंट पर लगने वाले MDR से कमाई किस संस्था को होगी?
- MDR की रकम में किन-किन संस्थाओं की हिस्सेदारी होगी?
- क्या MDR को फीस माना जाएगा या टैक्स?
- इस शुल्क को लागू करने का कानूनी आधार क्या है?
- पेमेंट इकोसिस्टम में MDR की राशि का कानूनी स्वरूप क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस व्यवस्था पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार किया है और सरकार तथा संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।
MDR आखिर होता क्या है?
MDR यानी Merchant Discount Rate वह शुल्क है जो मर्चेंट पेमेंट को प्रोसेस करने वाले डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम से जुड़ा होता है। UPI के मामले में यह शुल्क ग्राहक के बजाय मर्चेंट साइड से संबंधित है। सरकार के अनुसार इसका उद्देश्य पेमेंट सिस्टम से जुड़े विभिन्न प्रतिभागियों के बीच लागत और आय का वितरण करना तथा डिजिटल पेमेंट इन्फ्रास्ट्रक्चर को टिकाऊ बनाना है।
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किन UPI ट्रांजैक्शन पर कितना MDR?
नए फ्रेमवर्क में सभी UPI पेमेंट पर एक जैसा शुल्क नहीं है। सामान्य तौर पर ₹2,000 से अधिक के पात्र P2M ट्रांजैक्शन पर 0.4% MDR प्रस्तावित है, जबकि कुछ जरूरी और कम मार्जिन वाले क्षेत्रों में ₹5 का फ्लैट MDR रखा गया है। कैपिटल मार्केट से जुड़े कुछ लेनदेन पर 0.02% MDR का प्रावधान है।
वहीं Person-to-Person (P2P) UPI ट्रांजैक्शन पर यह MDR लागू नहीं होगा। यानी किसी व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति को पैसे भेजने की सामान्य UPI सुविधा इस बदलाव से अलग रहेगी।
UPI यूजर्स और दुकानदारों पर क्या असर?
सरकारी व्यवस्था के अनुसार MDR ग्राहक से सीधे वसूला जाने वाला चार्ज नहीं है। हालांकि, मर्चेंट पर आने वाली लागत का व्यावसायिक असर अलग-अलग कारोबारियों पर अलग हो सकता है। कुछ व्यापारी इस लागत को खुद वहन कर सकते हैं, जबकि कीमत निर्धारण या अन्य कारोबारी फैसलों के जरिए इसका अप्रत्यक्ष असर भी पड़ सकता है।
यही वजह है कि सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में MDR की कानूनी प्रकृति, शुल्क के लाभार्थी और रकम के वितरण से जुड़े सवाल महत्वपूर्ण हो गए हैं।
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RBI ने MDR को लेकर क्या कहा?
RBI ने इस व्यवस्था का समर्थन करते हुए कहा है कि MDR से UPI के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम की दीर्घकालिक स्थिरता को मजबूत करने और पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश को समर्थन मिलने की उम्मीद है।
अब सुप्रीम कोर्ट के सामने मुख्य मुद्दा यह है कि ₹2,000 से अधिक के UPI मर्चेंट पेमेंट पर MDR लगाने की व्यवस्था का कानूनी आधार क्या है और इससे होने वाली रकम का वितरण किस तरह होगा। सरकार और RBI के जवाब के बाद इस मामले की आगे की तस्वीर साफ होगी।
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