CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में PIL, ‘सत्ता के केंद्रीकरण’ का आरोप…

PIL में आरोप- दोनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी के बिना फैसले और 16.10 लाख अपीलें दाखिल की गईं; याचिका में एजेंडा, मिनट्स और चुनावी रिकॉर्ड की जांच की मांग.

New Delhi: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक नई जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग के नाम पर कुछ महत्वपूर्ण फैसले अन्य दो चुनाव आयुक्तों—सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी—की मंजूरी या जानकारी के बिना लिए गए। याचिकाकर्ता ने इसे चुनाव आयोग में शक्तियों के कथित केंद्रीकरण से जोड़ते हुए कई फैसलों और प्रक्रियाओं की न्यायिक जांच की मांग की है।

PIL में किन मुद्दों पर सवाल उठाए गए?
याचिका में चुनाव आयोग के कामकाज से जुड़े कई रिकॉर्ड सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश करने की मांग की गई है। इनमें आयोग की बैठकों के एजेंडा, मिनट्स, अप्रूवल, फाइल नोटिंग, IT एक्सेस रिकॉर्ड और चुनावी रोल से संबंधित दस्तावेज शामिल हैं।

इसके अलावा याचिका में Form-6, ERONet और ECINet से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि मतदाता सूची तैयार करने और उसमें संशोधन से जुड़े कुछ अधिकारों को केंद्रीय स्तर पर केंद्रित किया गया।

14 मौकों पर असहमति दर्ज कराने का दावा
PIL में दावा किया गया है कि नवंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कम से कम 14 मौकों पर लिखित आपत्ति या असहमति दर्ज कराई। इनमें मतदाता पंजीकरण, नाम जोड़ने-हटाने, Form-6 में बदलाव और चुनावी डेटा के प्रबंधन से जुड़े मुद्दे शामिल बताए गए हैं।

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ कदमों पर आपत्ति दर्ज करते हुए यह सवाल उठाया था कि क्या कुछ फैसले आयोग के सभी सदस्यों की जानकारी और सहमति से लिए गए थे। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि चुनावी डेटाबेस के केंद्रीकरण को लेकर आपत्तियां दर्ज की गई थीं।

पश्चिम बंगाल में 16.10 लाख अपीलों पर भी सवाल
याचिका में पश्चिम बंगाल की SIR प्रक्रिया से जुड़ी 16.10 लाख अपीलों का मुद्दा भी उठाया गया है। इन अपीलों में उन मतदाताओं के नाम हटाने की मांग की गई थी, जिन्हें न्यायिक अधिकारियों ने मतदाता सूची में शामिल करने का आदेश दिया था।

रिपोर्टों के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने इन अपीलों को लेकर सवाल उठाया था कि ECI की ओर से अपील दाखिल करने के लिए किसने अनुमति दी और इन्हें वास्तव में किसने दाखिल किया। संधू ने यह भी दर्ज किया था कि उन्हें, विवेक जोशी और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को अपीलों की प्रक्रिया और आधार की जानकारी नहीं थी।

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Form-6 में बदलाव का मामला
PIL में Form-6 में कथित बदलाव को भी चुनौती दी गई है। Form-6 का इस्तेमाल मतदाता सूची में नए मतदाता के रूप में नाम शामिल कराने के लिए किया जाता है।

याचिका के अनुसार, मई 2026 में Form-6 में बदलाव को लेकर विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने आपत्ति जताई थी। याचिकाकर्ता का आरोप है कि इसके बावजूद बाद में ECINet पर Form-6 में बदलाव किया गया। इस बदलाव में पिछले SIR की मतदाता सूची से जुड़े विवरण की जानकारी मांगे जाने का मुद्दा भी शामिल है।

याचिका में क्या मांग की गई?
PIL में सुप्रीम कोर्ट से कई निर्देश देने की मांग की गई है। इनमें कथित तौर पर आयोग के सभी सदस्यों की सहमति के बिना लिए गए फैसलों की वैधता की जांच, संबंधित रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा को सुरक्षित रखने तथा चुनावी रोल से जुड़े सिस्टम की स्वतंत्र जांच शामिल है।

याचिका में स्वतंत्र न्यायिक जांच या SIT जांच की मांग भी की गई है। साथ ही पश्चिम बंगाल की 16.10 लाख अपीलों और चुनावी डेटा से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की मांग की गई है।

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चुनाव आयोग का क्या पक्ष है?
इस पूरे विवाद पर चुनाव आयोग की ओर से यह रुख सामने आया है कि SIR से जुड़े उसके फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए और रिपोर्टों में सामने आए मतभेद आयोग की आंतरिक विचार-विमर्श प्रक्रिया का हिस्सा थे। इसलिए PIL में लगाए गए आरोपों और आयोग के पक्ष के बीच अंतर को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में स्पष्ट किया जाना अहम होगा।

अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष मुख्य सवाल चुनाव आयोग की बहु-सदस्यीय निर्णय प्रक्रिया, चुनावी डेटा के प्रबंधन, SIR से जुड़े कदमों और पश्चिम बंगाल में दाखिल अपीलों की प्रक्रिया से जुड़े हैं। आगे की सुनवाई में अदालत इन आरोपों और संबंधित रिकॉर्ड पर क्या रुख अपनाती है, इस पर नजर रहेगी।

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