राहुल गाँधी होंगे नेता प्रतिपक्ष… पहली बार संभालेंगे संवैधानिक पद, इन सुविधाओं के हकदार

LoP Rahul Gandhi: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने अपने पूर्व अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के रायबरेली लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से सांसद राहुल गांधी को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष चुना गया है। इसके साथ ही वे इस पद को संभालने पर गांधी परिवार के तीसरे सदस्य होंगे। राहुल गांधी को INDIA ब्लॉक की तरफ से नेता प्रतिपक्ष चुना गया है। अब राहुल गांधी को कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त होगा। यह पहली मौका है जब राहुल गांधी अपने 25 साल से ज्यादा के राजनीतिक करियर में किसी संवैधानिक पद को संभालेंगे। इससे पहले राहुल गांधी के पिता राजीव गांधी और मां सोनिया गांधी भी इस पद पर रह चुकी हैं।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के रायबरेली लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से सांसद राहुल गांधी से आग्रह किया गया था कि वह निचले सदन में नेता प्रतिपक्ष का जिम्मा संभालें. इस पर राहुल गांधी ने कांग्रेस कार्यसमिति में कहा था कि वह इस पर विचार करेंगे. अब मंगलवार को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने ऐलान किया कि राहुल गांधी ही नेता प्रतिपक्ष होंगे. लोकसभा में अगर किसी दल को कुल सीटों का 10 फीसदी या उससे ज्यादा हासिल होता है तो वह विपक्षी दल का दर्जा हासिल करता है. साल 2014 के बाद पहली बार कांग्रेस को लोकसभा में विपक्ष का दर्जा मिलेगा. साल 2014 में कांग्रेस को 44 और साल 2019 में 52 सीटें मिलीं थीं.

पांच बार के सांसद हैं राहुल गांधी
54 साल के राहुल गांधी नेहरू-गांधी परिवार के वंशज हैं और पांच बार के सांसद हैं। वे वर्तमान में लोकसभा में रायबरेली निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस बार वे दो निर्वाचन क्षेत्रों – केरल के वायनाड और उत्तर प्रदेश के रायबरेली से जीते, लेकिन उन्होंने वायनाड से इस्तीफा दे दिया। 2004 में राजनीति में प्रवेश करने के बाद से राहुल गांधी का करियर लगातार बढ़ता रहा है।

इन संवैधानिक पदों की नियुक्ति में राहुल गांधी का दिखेगा दखल
लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष के नेताओं को वर्ष 1977 में वैधानिक मान्यता दी गई थी. ऐसे में राहुल गांधी की संवैधानिक पदों की नियुक्ति में भी भूमिका रहेगी. नेता प्रतिपक्ष के रूप में राहुल गांधी लोकपाल, सीबीआई डायरेक्टर, मुख्य चुनाव आयुक्त, चुनाव आयुक्त, केंद्रीय सतर्कता आयुक्त, केंद्रीय सूचना आयुक्त, एनएचआरसी प्रमुख के चयन से संबंधित कमेटियों के सदस्य होंगे और इनकी नियुक्ति में नेता विपक्ष का रोल रहेगा. वे इन पैनल के बतौर सदस्य शामिल होंगे.

पीएम के साथ बैठक में शामिल होंगे राहुल
इन सारी नियुक्तियों में राहुल नेता प्रतिपक्ष के तौर पर उसी टेबल पर बैठेंगे, जहां प्रधानमंत्री और सदस्य बैठेंगे. इन नियुक्तियों से जुड़े फैसलों में प्रधानमंत्री को नेता प्रतिपक्ष के तौर पर राहुल गांधी से भी उनकी सहमति लेनी होगी. उनकी राय और मशविरा मायने रखेगा.

सरकार की कमेटियों के भी हिस्सा होंगे राहुल
राहुल सरकार के आर्थिक फैसलों की लगातार समीक्षा कर पाएंगे और सरकार के फैसलों पर टिप्पणी भी कर सकेंगे. वे ‘लोक लेखा’ कमेटी के भी प्रमुख बन जाएंगे, जो सरकार के सारे खर्चों की जांच करती है और उनकी समीक्षा करने के बाद टिप्पणी भी करती है. राहुल गांधी संसद की मुख्य कमेटियों में भी बतौर नेता प्रतिपक्ष के रूप में शामिल हो सकेंगे और उनके पास ये अधिकार होगा कि वो सरकार के कामकाज की लगातार समीक्षा करते रहेंगे.

अब तक ये संभाल चुके नेता प्रतिपक्ष का पद
नेता प्रतिपक्ष का पद संभाल चुके व्यक्तियों में सुषमा स्वराज, लाल कृष्ण आडवाणी, सोनिया गांधी, शरद पवार, अटल बिहारी वाजपेयी और राजीव गांधी शामिल हैं। ये सभी नेता अपने-अपने समय में विपक्ष की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों को संभाल चुके हैं। इनके योगदान से विपक्ष की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है।

नेता प्रतिपक्ष होते हैं कई सुविधाओं के हकदार
नेता प्रतिपक्ष होने के बाद, नेता प्रतिपक्ष के अधिकार और सुविधाएं कैबिनेट मंत्री के समान होती हैं। अब राहुल गांधी को कैबिनेट मंत्री की तरह सरकारी सचिवालय में एक दफ्तर मिलेगा। उन्हें उच्च स्तर की सुरक्षा मिलेगी और मासिक वेतन और दूसरे भत्तों के लिए 3 लाख 30 हज़ार रुपये मिलेंगे। एक सांसद को वेतन और भत्ते मिलाकर हर महीने लगभग सवा दो लाख रुपये मिलते हैं। राहुल गांधी को इससे ज्यादा की रकम मिलेगी।

कब अस्तित्व में आया नेता प्रतिपक्ष का पद?
1969 में कांग्रेस विभाजन के बाद नेता प्रतिपक्ष का पद अस्तित्व में आया। तब कांग्रेस (ओ) के राम सुभग सिंह ने इस पद के लिए दावा किया था। संसद के 1977 के अधिनियम द्वारा नेता प्रतिपक्ष पद को वैधानिक दर्जा दिया गया। इसमें कहा गया कि विपक्षी दल को नेता प्रतिपक्ष पद के लिए विशेषाधिकार और वेतन का दावा करने के लिए सदन के कम से कम दसवें हिस्से पर अधिकार होना चाहिए

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