प्रभु राम के लिए सत्ता त्यागने वाले बाबू जी’ को सीएम योगी ने दी श्रद्धांजलि

Kalyan Singh Birth Anniversary: उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यपाल कल्याण सिंह को उनकी 94वीं जयंती पर प्रदेश और देशभर में श्रद्धापूर्वक याद किया गया। राम मंदिर आंदोलन के दौरान सत्ता की परवाह किए बिना लिए गए उनके फैसलों ने उन्हें भारतीय राजनीति में एक विशिष्ट पहचान दिलाई।

राम मंदिर आंदोलन और सत्ता का त्याग
6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद बहुमत वाली सरकार हटाकर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाया गया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने बल प्रयोग कर कारसेवा रोकने के निर्देशों को स्वीकार नहीं किया। जब तक कारसेवा चली, वे लखनऊ में बैठकर स्थिति पर नजर बनाए रहे। केंद्र की कांग्रेस सरकार द्वारा राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद ही कारसेवकों को हटाने की कार्रवाई शुरू हो पाई, लेकिन तब तक बाबरी ढांचा गिर चुका था और रामलला अस्थायी मंदिर में विराजमान हो चुके थे।
कल्याण सिंह ने अपने निर्णय पर कभी पछतावा नहीं जताया और कहा कि “राम के काम के लिए सत्ता गई तो कोई अफसोस नहीं।” इस रुख ने उन्हें बहुसंख्यक हिंदू समाज में एक बड़े चेहरे के रूप में स्थापित किया।

सीएम योगी की श्रद्धांजलि और ‘कल्याण शासन’
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 94वीं जयंती पर ‘बाबू जी’ के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने अपने नाम को उत्तर प्रदेश के ‘कल्याण’ के साथ जोड़कर जीवनभर सार्थक किया।
सीएम योगी ने कहा कि 1991 में जब कल्याण सिंह ने प्रदेश की कमान संभाली, तब उत्तर प्रदेश अव्यवस्था, अराजकता, गुंडागर्दी और आतंकी गतिविधियों से जूझ रहा था। योजनाओं का लाभ गांवों, गरीबों, किसानों, युवाओं और महिलाओं तक नहीं पहुंच पा रहा था। ऐसे समय में उनके नेतृत्व ने प्रदेशवासियों में सुशासन की उम्मीद जगाई।

‘सत्ता त्यागने में नहीं किया संकोच’
मुख्यमंत्री ने कहा कि राम जन्मभूमि आंदोलन के चरम पर पहुंचने पर रामभक्तों और संतों की भावनाओं का सम्मान करते हुए कल्याण सिंह ने प्रभु श्रीराम के प्रति निष्ठा दिखाते हुए सत्ता त्याग दी। उनकी सरकार भले ही चली गई, लेकिन उन्होंने आंदोलन की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली और अपने कर्तव्य का निर्वहन पूरी दृढ़ता से किया। सुशासन, विकास और राष्ट्रवादी मिशन के लिए उनका कार्यकाल सदैव स्मरणीय रहेगा।

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राष्ट्रवादी विचारधारा और राजनीतिक योगदान
किसान परिवार में जन्मे कल्याण सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पाठशाला से राष्ट्रवाद का पाठ सीखा और उसे आजीवन जीवन मंत्र बनाए रखा। विधायक, मंत्री, सांसद, मुख्यमंत्री और राज्यपाल के रूप में उनकी सेवाएं देश और प्रदेश के लिए यादगार रहीं। उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की नींव को मजबूत करने में उनकी भूमिका अहम रही।

जयंती कार्यक्रम में ये रहे मौजूद
कार्यक्रम में उनके पुत्र एवं पूर्व सांसद राजवीर सिंह, भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष चौधरी भूपेंद्र सिंह, सांसद सतीश गौतम व मुकेश राजपूत, कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद, राज्यमंत्री दानिश आजाद अंसारी, पौत्र एवं बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह सहित अनेक वरिष्ठ नेता, जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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कौन थे कल्याण सिंह?

  • जन्म: 5 जनवरी 1932, अलीगढ़
  • पहली बार मुख्यमंत्री: 1991
  • बाबरी विध्वंस के बाद इस्तीफा: 6 दिसंबर 1992
  • दूसरी बार मुख्यमंत्री: 1997 से नवंबर 1999
  • बाद में भाजपा से अलगाव और पुनः वापसी

राजस्थान और हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल भी रहे

कल्याण सिंह का जीवन संघर्ष, सिद्धांत और निर्णयों की दृढ़ता का प्रतीक रहा—जिसे आज भी उनके समर्थक और अनुयायी ‘बाबू जी’ के नाम से श्रद्धा से याद करते हैं।

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