चुनाव से पहले BJP संगठन में फेरबदल की कवायद, छह क्षेत्रों के पदाधिकारियों पर मंथन

UP BJP: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच भारतीय जनता पार्टी ने संगठन को नई धार देने की कवायद तेज कर दी है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह ने बुधवार को नई दिल्ली में राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े के साथ अहम बैठक की। बैठक में प्रदेश के छह क्षेत्रीय संगठनों की नई टीम तैयार करने को लेकर विस्तार से मंथन किया गया।

भाजपा के सामने एक तरफ आगामी विधानसभा चुनाव की चुनौती है तो दूसरी ओर लंबे समय से क्षेत्रीय संगठन में बदलाव नहीं होने का मुद्दा भी है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व अब संगठन में नए चेहरों और सामाजिक समीकरणों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।

छह क्षेत्रों की नई टीम पर मंथन
बैठक में उत्तर प्रदेश के सभी छह क्षेत्रों के लिए क्षेत्रीय पदाधिकारियों और टीम के गठन को लेकर चर्चा हुई। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, नए पदाधिकारियों के चयन में जातीय समीकरण, स्थानीय प्रभाव और संगठनात्मक सक्रियता को प्रमुख आधार बनाया जा रहा है।

भाजपा नेतृत्व यह सुनिश्चित करना चाहता है कि क्षेत्रीय स्तर पर ऐसी टीम तैयार हो जो आगामी विधानसभा चुनाव में बूथ स्तर तक संगठन को मजबूती दे सके। इसके लिए विभिन्न निगमों, आयोगों और बोर्डों में जिम्मेदारी निभा रहे नेताओं के नामों पर भी विचार किया जा रहा है।

अगस्त के अंत तक हो सकता है ऐलान
पार्टी की योजना के मुताबिक क्षेत्रीय संगठनों के नए पदाधिकारियों की घोषणा अगस्त के अंत तक किए जाने की तैयारी है। इसके साथ ही संगठन के विभिन्न स्तरों पर जिम्मेदारियों का पुनर्गठन किया जा सकता है।

प्रदेश भाजपा ने इससे पहले 25 जून को प्रदेश पदाधिकारियों और क्षेत्रीय अध्यक्षों की घोषणा की थी। अब क्षेत्रीय टीम के अन्य पदों पर नियुक्तियों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया चल रही है।

चुनावी तैयारियों के साथ संगठन पर फोकस
भाजपा ने आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए विभिन्न अभियानों और कार्यक्रमों के जरिए कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना शुरू कर दिया है। पार्टी की ओर से बूथ सम्मेलन, संत रविदास समरसता संकल्प अभियान और हर घर तिरंगा अभियान जैसे कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।

इन अभियानों के जरिए पार्टी कार्यकर्ताओं और संगठन को जनता के बीच सक्रिय रखने की रणनीति बनाई गई है। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं को भी अलग-अलग कार्यक्रमों में जिम्मेदारियां दी जा रही हैं ताकि चुनाव से पहले संगठन की जमीनी सक्रियता बढ़ाई जा सके।

सात साल से क्षेत्रीय संगठन में बड़े बदलाव का इंतजार
भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक क्षेत्रीय संगठन में लंबे समय से बदलाव न होना भी है। पार्टी के क्षेत्रीय संगठन में करीब सात साल से व्यापक बदलाव नहीं हो सका है। ऐसे में अब विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को नई ऊर्जा देने के लिए नए चेहरों को जिम्मेदारी देने की कवायद तेज हुई है।

पार्टी नेतृत्व का मानना है कि चुनावी रणनीति को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए मजबूत क्षेत्रीय और जिला संगठन बेहद जरूरी है। इसी वजह से पदाधिकारियों के चयन में संगठन के पुराने अनुभव और नए चेहरों के बीच संतुलन बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

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जून में भी हुआ था संगठन को लेकर मंथन
प्रदेश भाजपा के संगठनात्मक बदलाव को लेकर शीर्ष नेतृत्व पहले भी मंथन कर चुका है। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने 4 और 5 जून को दो दिवसीय लखनऊ दौरे के दौरान पार्टी नेताओं के साथ बैठक की थी। इस दौरान संगठन की कार्यसंस्कृति, आगामी चुनावी रणनीति और पार्टी के कार्यक्रमों को लेकर चर्चा हुई थी।

इसके बाद 25 जून को प्रदेश पदाधिकारियों और क्षेत्रीय अध्यक्षों की घोषणा की गई। अब अगला चरण क्षेत्रीय टीम के बाकी पदों को लेकर माना जा रहा है।

जातीय और स्थानीय समीकरणों पर खास नजर
उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातीय और क्षेत्रीय समीकरण बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। ऐसे में भाजपा क्षेत्रीय संगठन में नियुक्तियों के दौरान इन दोनों पहलुओं को ध्यान में रख रही है। पार्टी की कोशिश है कि सभी क्षेत्रों में अलग-अलग सामाजिक वर्गों को संगठन में उचित प्रतिनिधित्व मिले।

इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़ रखने वाले नेताओं को भी संगठन में जिम्मेदारी दिए जाने पर विचार किया जा रहा है। इससे पार्टी को आगामी चुनाव में बूथ स्तर तक अपने नेटवर्क को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करने की चुनौती
विधानसभा चुनाव में अब ज्यादा समय नहीं बचा है। ऐसे में भाजपा के लिए संगठनात्मक बदलाव को जल्द पूरा करना अहम माना जा रहा है। पार्टी की कोशिश है कि नई क्षेत्रीय टीमें समय रहते सक्रिय हो जाएं और उन्हें चुनावी तैयारियों की जिम्मेदारी दी जा सके।

दिल्ली में हुई बैठक को इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि अगस्त के अंत तक क्षेत्रीय संगठनों की नई टीम में किन नेताओं को जगह मिलती है और पार्टी सामाजिक व स्थानीय समीकरणों को किस तरह साधती है।

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