SIR पर घिरा चुनाव आयोग, अब छूटे मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए चलाएगा विशेष अभियान

Election Commission: SIR विवाद के बीच EC का बड़ा फैसला, BLO घर-घर जाकर छूटे नामों की करेंगे पहचान, Form-6 के जरिए फिर जुड़ेगा नाम

New Delhi: Special Intensive Revision (SIR) को लेकर जारी विवाद और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने पर उठ रहे सवालों के बीच चुनाव आयोग ने छूटे हुए पात्र मतदाताओं को दोबारा सूची में शामिल करने के लिए विशेष अभियान चलाने का फैसला किया है। यह अभियान उन 20 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में चलाया जाएगा, जहां SIR प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।

चुनाव आयोग के निर्देश के मुताबिक, बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) SIR से पहले की मतदाता सूची और मौजूदा सूची की तुलना करेंगे। इस प्रक्रिया के जरिए ऐसे मतदाताओं की पहचान की जाएगी, जिनका नाम पहले की सूची में था लेकिन मौजूदा मतदाता सूची में नहीं है। इसके बाद पात्र लोगों को दोबारा मतदाता सूची में शामिल कराने में मदद की जाएगी।

घर-घर जाकर मतदाताओं की होगी पहचान
निर्देश के अनुसार BLO ऐसे मतदाताओं की सूची तैयार करेंगे जो पुरानी सूची में दर्ज थे लेकिन नई सूची में नहीं हैं। इसके बाद अधिकारी घर-घर जाकर उनकी मौजूदा स्थिति की जानकारी जुटाएंगे। पात्र व्यक्ति मिलने पर उसका Form-6 भरवाया जाएगा, जिसके जरिए मतदाता सूची में नाम दर्ज कराया जाता है।

चुनाव आयोग ने पहली बार मतदान करने वाले युवाओं को भी इस अभियान में शामिल करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा बेघर लोगों, रैन बसेरों में रहने वालों और लेबर कॉलोनियों में रहने वाले पात्र लोगों के नाम मतदाता सूची में जोड़ने के लिए विशेष कैंप लगाए जा सकते हैं।

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Form-6 में SIR से जुड़ा अतिरिक्त सवाल हटाया गया
SIR विवाद के बीच Form-6 को लेकर भी चुनाव आयोग ने बदलाव किया है। जिन राज्यों में SIR प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां Form-6 में SIR से जुड़ा अतिरिक्त घोषणापत्र अब नहीं रखा गया है। ऐसे राज्यों में नए मतदाताओं और छूटे हुए पात्र लोगों के लिए सामान्य वैधानिक Form-6 का इस्तेमाल किया जाएगा।

पहले ऑनलाइन Form-6 में आवेदक से यह पूछा जा रहा था कि उसका, उसके माता-पिता या दादा-दादी का नाम पिछली SIR के बाद प्रकाशित मतदाता सूची में था या नहीं। इस बदलाव को लेकर चुनाव आयोग के भीतर भी आपत्तियां सामने आई थीं।

चुनाव आयोग के भीतर भी उठे थे सवाल
Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने Form-6 में SIR से जुड़ा अतिरिक्त घोषणापत्र जोड़े जाने पर आपत्ति जताई थी। उनका तर्क था कि वैधानिक फॉर्म में बदलाव के लिए नियमों में संशोधन की जरूरत होती है। बाद में आयोग ने उन राज्यों में, जहां SIR पूरा हो चुका है, इस अतिरिक्त घोषणा को हटाने का फैसला किया।

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विवाद के बीच आयोग का फोकस ‘कोई पात्र मतदाता न छूटे’ पर
SIR के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर विपक्षी दलों और अन्य आलोचकों ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, आयोग ने लगातार कहा है कि पात्र मतदाताओं को मतदाता सूची में शामिल करना उसकी प्राथमिकता है। अब विशेष अभियान के जरिए पुराने और मौजूदा रिकॉर्ड का मिलान कर छूटे हुए पात्र मतदाताओं की पहचान और पुनः पंजीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

इस कदम के बाद SIR के तहत मतदाता सूची में हुए बदलाव और छूटे हुए नामों को लेकर चल रही बहस के बीच पात्र मतदाताओं के दोबारा पंजीकरण का रास्ता आसान होने की उम्मीद है।

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