गंगा एक्सप्रेसवे पर फिर पड़ीं बड़ी दरारें, 10 दिनों में दूसरी बार धंसी सड़क

Ganga Expressway in UP: उत्तर प्रदेश सरकार के सबसे महत्वाकांक्षी ड्रीम प्रोजेक्ट्स में से एक गंगा एक्सप्रेसवे (Ganga Expressway) के निर्माण की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। उन्नाव जिले के पास एक्सप्रेसवे पर सड़क में एक बार फिर दरारें और पैचवर्क देखने को मिला है।

हैरान करने वाली बात यह है कि बीते 10 दिनों के भीतर यह दूसरी बार है जब सड़क के धंसने या दरारें पड़ने की घटना सामने आई है।

सड़क पर दरारें और पैचवर्क

रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्नाव क्षेत्र के बशीरतगंज और आसपास के इलाकों में एक्सप्रेसवे की सड़क पर दरारें दिखाई दी हैं। हाल ही में भारी बारिश के कारण इसी हिस्से में सड़क धंसने और ड्रेनेज स्लोप टूटने की समस्या सामने आई थी, जिसे यूपीडा (UPEIDA) और कार्यदायी संस्था ने आनन-फानन में पैचवर्क कर दुरुस्त किया था। हालांकि, दोबारा दरारें उभरने से यह साफ हो गया है कि अस्थाई मरम्मत के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है।

36,230 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट पर सवाल

मेरठ से प्रयागराज को जोड़ने वाला 594 किलोमीटर लंबा यह 6-लेन एक्सप्रेसवे लगभग 36,230 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया जा रहा है। इतनी भारी-भरकम राशि और अत्याधुनिक तकनीक के दावों के बावजूद पहली ही बरसात में जगह-जगह सड़क धंसने, कंक्रीट स्लोप ड्रेन टूटने और पुलों के पास जल निकासी व्यवस्था की नाकामी से यात्रियों की सुरक्षा पर खतरा मंडराने लगा है। स्थानीय लोगों और वाहन चालकों ने निर्माण सामग्री और ड्रेनेज सिस्टम के काम पर नाराजगी जताई है।

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यूपीडा की सफाई 

मामला तूल पकड़ने पर निर्माण एजेंसी और यूपीडा के अधिकारियों का कहना है कि नए एक्सप्रेसवे के निर्माण के बाद पहली बारिश में मिट्टी की भराई बैठने (soil settling) की वजह से ऐसी स्थिति बनती है। अधिकारियों का दावा है कि तकनीकी टीमों को अलर्ट पर रखा गया है और जहां भी सड़क प्रभावित हो रही है, वहां तुरंत मरम्मत का काम पूरा कर यातायात को सुचारु रखा जा रहा है।

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