
गुलाम नबी आजाद ने जताई नाराजगी… शीतकालीन सत्र में जनता के मुद्दे नजरअंदाज
Ghulam Nabi Azad in Lucknow: डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी (DPAP) के अध्यक्ष गुलाम नबी आजाद सोमवार को राजधानी लखनऊ पहुंचे और संसद के शीतकालीन सत्र को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि वर्तमान सरकार की कार्यप्रणाली के कारण संसद की कार्यवाही सही ढंग से नहीं चल रही है। उनका मानना है कि संसद का मुख्य उद्देश्य आम जनता के मुद्दों को उठाना और उनके समाधान ढूँढना है, लेकिन जब सत्र नहीं चलता, तो जनता में निराशा फैलती है।
आजाद ने कहा, “लोग इंतजार करते हैं कि संसद में उनके मुद्दों पर चर्चा होगी। किसान सोचता है कि उनकी समस्याओं को सुना जाएगा, मजदूर और गरीब यह उम्मीद करते हैं कि उनके मुद्दों को प्राथमिकता दी जाएगी। लेकिन जब सदन सुचारू रूप से नहीं चलता, तो उनकी उम्मीदें टूट जाती हैं।”
उन्होंने विपक्ष की भूमिका पर भी प्रकाश डाला और कहा कि जब विपक्ष वॉकआउट करता है, तो यह सीधे तौर पर सरकार की मदद करता है। “वॉकआउट के दौरान बिल का विरोध करने वाला कोई नहीं रहता और बिल आसानी से पास हो जाते हैं। इसलिए विपक्ष का यह कदम सरकार को बिल पास कराने का अवसर दे देता है,” उन्होंने कहा।
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आजाद ने सरकार से अपील की कि वह जनता की समस्याओं को गंभीरता से उठाए और सुनिश्चित करे कि संसद का सत्र समय पर और व्यवस्थित रूप से चले। उन्होंने कहा कि उनका हमेशा प्रयास रहा है कि संसद सुचारू रूप से चले और आम लोगों की आवाज़ वहां पहुंचे।
संसद का शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर से 19 दिसंबर तक आयोजित किया गया है, जिसमें कुल 15 बैठकें होंगी। इस सत्र के दौरान एटॉमिक एनर्जी बिल सहित 10 नए बिल पेश किए जाने की संभावना है। गुलाम नबी आजाद का यह बयान ऐसे समय आया है जब विपक्ष और सरकार के बीच अक्सर कार्यवाही को लेकर मतभेद देखने को मिलते हैं।
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इस सत्र में सांसदों और विपक्षी दलों के सहयोग या विरोध की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इनसे देश के बड़े बिलों और नीतियों पर प्रभाव पड़ता है। आजाद ने कहा कि सरकार को चाहिए कि वह सभी दलों को सम्मिलित कर पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ संसद चलाए, जिससे आम जनता के हित सुनिश्चित हो सकें।
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