भारत में ‘गिग इकॉनमी’ तेज… लेकिन आय और सुरक्षा बड़ी चुनौती

Budget 2026: संसद में पेश आर्थिक समीक्षा में बताया गया है कि भारत में गिग इकॉनमी तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इसके साथ ही आय असमानता और कामकाजी सुरक्षा जैसी गंभीर चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। समीक्षा के अनुसार देश में लगभग 40 प्रतिशत गिग कर्मचारी प्रति माह 15,000 रुपये से कम कमाते हैं, जो इस क्षेत्र में आय अस्थिरता और कम कमाई की समस्या को दर्शाता है।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद के दोनों सदनों में आर्थिक समीक्षा पेश की, जिसमें गिग कर्मचारियों के लिए नीतिगत हस्तक्षेप की जरूरत पर जोर दिया गया। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया कि गिग कर्मचारियों के लिए न्यूनतम प्रति घंटा या प्रति कार्य आय तय की जानी चाहिए। साथ ही, प्रतीक्षा समय यानी वेटिंग टाइम का भी मुआवजा देने की व्यवस्था की जरूरत बताई गई है।

गिग इकॉनमी का तेजी से विस्तार
आर्थिक समीक्षा के मुताबिक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और डिजिटल तकनीक के विस्तार से गिग इकॉनमी तेजी से बढ़ी है। देश में स्मार्टफोन और डिजिटल पेमेंट के बढ़ते इस्तेमाल से इस सेक्टर को मजबूती मिली है। आने वाले वर्षों में गिग वर्कर्स की संख्या में और वृद्धि होने की संभावना जताई गई है।

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श्रम कानूनों में मिली औपचारिक पहचान
रिपोर्ट में कहा गया कि नए श्रम संहिताओं के तहत गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को औपचारिक पहचान मिली है। इससे सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का दायरा बढ़ा है और कल्याणकारी योजनाओं को लागू करने का रास्ता साफ हुआ है।

बेहतर वेतन और कामकाजी शर्तों की मांग तेज
हाल के समय में गिग वर्कर्स ने बेहतर भुगतान, सुरक्षित कार्य परिस्थितियों और श्रम कानूनों के तहत मान्यता की मांग को लेकर कई जगह विरोध प्रदर्शन और हड़ताल की। इसी दबाव के बाद सरकार ने ई-कॉमर्स कंपनियों से 10 मिनट डिलीवरी जैसे दावों को हटाने को कहा।

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प्लेटफॉर्म कंपनियों पर भी उठे सवाल
रिपोर्ट्स में सामने आया है कि कई डिजिटल प्लेटफॉर्म अभी भी न्यूनतम वेतन और सुरक्षित कार्य शर्तों को लेकर पीछे हैं। कुछ ही कंपनियों के पास ऐसा सिस्टम है जो काम से जुड़े खर्च निकालने के बाद भी न्यूनतम वेतन सुनिश्चित करता है।

कई रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि अधिकतर प्लेटफॉर्म अपने कर्मचारियों के लिए “लिविंग वेज” यानी सम्मानजनक जीवन स्तर के लिए जरूरी आय सुनिश्चित नहीं कर रहे हैं।

भविष्य में और बढ़ेगा गिग सेक्टर
अध्ययनों के अनुसार आने वाले दशकों में भारत में गिग वर्कफोर्स और तेजी से बढ़ सकती है। यह रोजगार का बड़ा स्रोत बनने के साथ-साथ अर्थव्यवस्था में भी अहम योगदान दे सकती है।

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