
‘लगा था अब मेरा करियर खत्म हो गया’ IIT रुड़की में NSA ने सुनाया चीन वाला किस्सा…
Ajit Doval: IIT रुड़की के दीक्षांत समारोह में NSA अजीत डोभाल ने सुनाया युवा IPS अधिकारी के दिनों का किस्सा, बताया कैसे चीनी सेना की हिरासत में पहुंची थी उनकी टीम
IIT Roorkee: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने IIT रुड़की के दीक्षांत समारोह में अपने शुरुआती करियर से जुड़ी एक घटना का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि युवा IPS अधिकारी के रूप में सिक्किम में इंटेलिजेंस की जिम्मेदारी संभालने के दौरान एक मिशन पर भेजे गए उनके कुछ लोग कई दिनों तक वापस नहीं लौटे। बाद में उन्हें पता चला कि उन्हें चीनी सेना ने हिरासत में ले लिया था।
डोभाल ने छात्रों को बताया कि उस समय उन्हें लगा था कि इस घटना के बाद उनका पूरा करियर खत्म हो जाएगा। हालांकि, बाद की जांच में उन्हें व्यक्तिगत तौर पर जिम्मेदार नहीं माना गया।
सिक्किम में इंटेलिजेंस की जिम्मेदारी संभाल रहे थे डोभाल
डोभाल ने बताया कि वह उस समय अपने 20 के दशक में थे और एक युवा IPS अधिकारी के तौर पर सिक्किम में इंटेलिजेंस का काम संभाल रहे थे। उनकी जिम्मेदारियों में सीमा क्षेत्र की निगरानी और चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की गतिविधियों से संबंधित खुफिया जानकारी जुटाना शामिल था।
उन्होंने बताया कि उस दौर में सिक्किम भारत में शामिल होने की प्रक्रिया में था और उनकी भूमिका इस पूरे घटनाक्रम से भी जुड़ी हुई थी।
आठ दिन में लौटना था मिशन, लेकिन नहीं लौटी टीम
डोभाल के मुताबिक, एक बार सीमा क्षेत्र में एक इंटेलिजेंस मिशन भेजा गया। टीम को करीब आठ दिन बाद वापस लौटना था। लेकिन आठ दिन बीत गए और टीम वापस नहीं आई।
इसके बाद दिन गुजरते गए। डोभाल ने बताया कि करीब 10 दिन और फिर 15 दिन तक भी कोई जानकारी नहीं मिली। उनके सामने सबसे बड़ी चिंता यह थी कि आखिर मिशन पर गए लोग कहां हैं और उनके साथ क्या हुआ है।
मुख्यालय से फोन ने बढ़ा दी चिंता
काफी समय बीतने के बाद डोभाल को मुख्यालय से फोन आया। उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने कुछ लोगों को सीमा क्षेत्र में भेजा था। उन्होंने बताया कि टीम को कुछ दिन में लौटना था, लेकिन अभी तक कोई खबर नहीं थी।
इसके बाद उन्हें बताया गया कि मिशन पर गए लोग चीनी सेना की हिरासत में हैं। डोभाल ने छात्रों को बताया कि उस समय उनके लिए यह खबर बेहद गंभीर थी।
‘मुझे लगा मेरा करियर खत्म हो गया’
डोभाल ने कहा कि इस घटना के बाद उन्हें लगा कि उनका करियर अब खत्म हो गया है। एक युवा अधिकारी के लिए सीमा क्षेत्र में भेजी गई टीम का इस तरह पकड़ा जाना बेहद गंभीर मामला था।
हालांकि, बाद में मामले की जांच हुई। जांच में सामने आया कि मिशन में इस्तेमाल किए गए नक्शों और स्केच में कुछ गलतियां थीं। इसके बाद डोभाल को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार नहीं माना गया।
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शेरपा ने दिया जिंदगी का बड़ा सबक
डोभाल ने इस घटना के दौरान एक तिब्बती शेरपा से हुई बातचीत का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उस शेरपा ने उन्हें नक्शे और दिशा का उदाहरण देते हुए जिंदगी का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत समझाया।
उसने कहा कि किसी भी यात्रा में तीन बातें स्पष्ट होनी चाहिए—आप कहां हैं, आपको कहां जाना है और वहां पहुंचने का रास्ता क्या है।
डोभाल ने इस घटना को अपने जीवन के महत्वपूर्ण अनुभवों में से एक के तौर पर छात्रों के सामने रखा।
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छात्रों से बोले- मौजूदा पीढ़ी के पास बड़े अवसर
IIT रुड़की के दीक्षांत समारोह में डोभाल ने छात्रों से बदलती तकनीक और उपलब्ध अवसरों का फायदा उठाने की अपील की। उन्होंने मौजूदा पीढ़ी को अवसरों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण दौर में बताया।
उन्होंने छात्रों को यह संदेश भी दिया कि जीवन और करियर में मुश्किल परिस्थितियां आ सकती हैं, लेकिन सही दिशा, लक्ष्य और रास्ते की पहचान व्यक्ति को आगे बढ़ने में मदद करती है।
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