अखिलेश यादव और आजम खान की लखनऊ में अहम मुलाकात, सपा में बड़े बदलाव के संकेत?

Azam Khan: समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता आजम खान शुक्रवार को पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव से मिलने उनके लखनऊ स्थित आवास पर पहुंचे। दोनों नेताओं के बीच करीब 30 मिनट तक बंद कमरे में मुलाकात हुई। मुलाकात के बाद आजम खान ने मीडिया से बातचीत में कहा कि मैं अपने परिवार के साथ हुए अन्याय की बात बताने आया था।

उन्होंने मुलाकात के राजनीतिक मायनों पर कुछ भी कहने से साफ इनकार किया। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब सपा में संगठनात्मक फेरबदल और रणनीतिक पुनर्गठन की चर्चाएं तेज हैं।

रामपुर से लखनऊ तक की सियासी कड़ी
कुछ हफ्ते पहले, अखिलेश यादव ने रामपुर जाकर जेल से रिहा हुए आजम खान से मुलाकात की थी। यह मुलाकात राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम मानी गई थी, क्योंकि अगले ही दिन बसपा सुप्रीमो मायावती की लखनऊ में बड़ी रैली थी।
उस समय अटकलें थीं कि आजम खान मायावती के मंच पर दिखाई दे सकते हैं, लेकिन अखिलेश की मुलाकात के बाद उन कयासों पर विराम लग गया था।

अब जब आजम खान लखनऊ पहुंचे हैं और लगातार कई नेताओं से मिल रहे हैं, तो एक बार फिर राजनीतिक हलकों में नई संभावनाओं और अंदरूनी समीकरणों के बदलने की चर्चा तेज हो गई है।

लगातार मुलाकातों से बढ़ी हलचल
सूत्रों के मुताबिक, आजम खान पिछले कुछ दिनों से लखनऊ में एक निजी होटल में ठहरे हुए हैं। गुरुवार को सपा के पूर्व विधायक और अखिलेश यादव के करीबी अभिषेक मिश्रा उनसे मिलने पहुंचे थे। इसी दौरान मुख्तार अंसारी के बड़े भाई सिबगतुल्लाह अंसारी की भी होटल में आजम खान से मुलाकात हुई।राजनीतिक पर्यवेक्षक इन मुलाकातों को सपा के भीतर किसी बड़े पुनर्गठन या रणनीतिक बदलाव की शुरुआत के रूप में देख रहे हैं।

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आजम खान का दर्द और सियासी संदेश
मुलाकात के बाद आजम खान ने मीडिया से बातचीत में कहा कि मेरे परिवार के साथ बहुत अन्याय हुआ है। मैं अपना दर्द साझा करने आया था। हालांकि उन्होंने किसी सियासी बयान या पार्टी रणनीति पर टिप्पणी नहीं की। लेकिन सपा सूत्रों का कहना है कि आजम खान संगठन के भीतर अपनी उपेक्षा और रामपुर में पार्टी की कमजोर स्थिति को लेकर नाराज हैं।

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सपा के भीतर नए समीकरणों के संकेत
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, अखिलेश यादव और आजम खान के बीच बढ़ती नजदीकी पार्टी में मुस्लिम मतदाताओं के बीच एकजुटता का संदेश देने की कोशिश हो सकती है। आजम खान की लगातार हो रही मुलाकातें यह संकेत देती हैं कि वे अब सक्रिय भूमिका में वापसी करना चाहते हैं। दूसरी ओर, सिबगतुल्लाह अंसारी और अन्य क्षेत्रीय नेताओं की उपस्थिति से यह भी माना जा रहा है कि सपा आगामी लोकसभा चुनाव से पहले अपने पुराने सहयोगियों और प्रभावशाली चेहरों को साथ जोड़ने की कवायद में जुटी है।

आजम खान की अखिलेश यादव से लखनऊ में हुई यह मुलाकात केवल एक शिष्टाचार भेंट नहीं मानी जा रही। लगातार कई नेताओं से उनकी मुलाकातों ने सपा के भीतर बड़े बदलाव और नए समीकरणों की संभावना को हवा दे दी है।हालांकि दोनों नेताओं ने फिलहाल किसी ठोस राजनीतिक निर्णय का खुलासा नहीं किया है, लेकिन राजनीतिक हलकों में यह मुलाकात “सपा की अंदरूनी राजनीति में नया मोड़” मानी जा रही है।

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