UP News: 4200 करोड़ का कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे…, 17 दिन में 3 बार उखड़ गई सड़क

13 जुलाई को खुले लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे (NE-6) की पहली ही बारिश में पोल खुल गई। उन्नाव में 17 दिनों के भीतर सड़क कई जगह धंस गई और उखड़ गई, जिससे निर्माण की गुणवत्ता पर बड़े सवाल उठ रहे हैं।

Lucknow-Kanpur Expressway: करीब ₹4,200 करोड़ की लागत से बना लखनऊ-कानपुर एलिवेटेड एक्सप्रेसवे (National Expressway 6 / NE-6) का हाल पहली ही बारिश ने बेहाल कर दिया है। 13 जुलाई को केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा लोकार्पित किए गए इस एक्सप्रेसवे की सड़क उद्घाटन के 17 दिनों के भीतर कई स्थानों पर धंस चुकी है।

उन्नाव जिले के कोरारी और अचलगंज के पास सड़क का डामर (Asphalt) पूरी तरह उखड़ गया है और लगभग 30 फीट तक गहरी नालियां बन गई हैं, जिसके चलते निर्माण एजेंसी को पिछले 17 दिनों में तीसरी बार मरम्मत का काम शुरू करना पड़ा है।

जर्मन-अमेरिकी तकनीक का दावा हवा-हवाई

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने एक्सप्रेसवे के निर्माण के दौरान दावा किया था कि इसमें अमेरिका और जर्मनी में इस्तेमाल होने वाली ऑटोमेटेड इंटेलिजेंस मशीन गाइडेड कंस्ट्रक्शन (AIMGC) तकनीक का उपयोग किया गया है। भारत में पहली बार इस तकनीक से सड़क बनाने की बड़ी-बड़ी बातें कही गई थीं।

हालांकि, मानसून की पहली ही बारिश ने इस हाई-टेक तकनीक के दावों की पोल खोल दी। कई मीटर तक डामर की परत पूरी तरह उखड़ गई। लगभग 30 फीट सड़क धंसने से पानी से भरी लंबी दरारें बन गईं। सड़क करीब 8 फीट तक धंस गई, जहां बैरिकेडिंग लगाकर पैचवर्क किया जा रहा है।

मरम्मत कार्य शुरू

खबर और राहगीरों द्वारा बनाए गए वीडियो वायरल होने के बाद निर्माण एजेंसी पटेल इंफ्रास्ट्रक्चर और NHAI की टीमें मौके पर पहुंचीं। NHAI के प्रोजेक्ट मैनेजर के अनुसार, एक्सप्रेसवे पर कोई बड़ी संरचनात्मक क्षति नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि “नया निर्माण होने और भारी बारिश के कारण कुछ स्थानों पर डामर का स्लिपेज (Slippage) हुआ है, जिसे एहतियाती तौर पर तुरंत दुरुस्त कराया जा रहा है।

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विपक्ष और राहगीरों ने खड़े किए सवाल

उद्घाटन के दो हफ्ते के भीतर ही बार-बार पैचवर्क और खुदाई की नौबत आने पर स्थानीय लोगों और राहगीरों ने निर्माण की गुणवत्ता (Quality Control) पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता और विपक्षी दल सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करते हुए तंज कस रहे हैं कि जो सड़क 35-40 मिनट में सुगम सफर का वादा करती थी, वह पहली ही बारिश में जगह-जगह उखड़कर झटकों (Jerk) का सफर बन गई है।

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