
रामलीला में जीवंत हुआ पंचवटी व वनवास प्रसंग
Lucknow Ramlila: भातखंडे संगीत विश्वविद्यालय के राय उमनाथ बली प्रेक्षागृह का मंच सोमवार को रामायण के वनवास काल के भावनात्मक और आध्यात्मिक प्रसंगों से जीवंत हो उठा।
भारतीय नारी सम्मान एवं बाल विकास संस्थान के 25वें स्वर्ण जयंती वर्ष के अवसर पर संस्कृति मंत्रालय की ओर से आयोजित नाटक ‘पंचवटी’ का मंचन किया गया। नाटक के माध्यम से दर्शकों को भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के वनवास काल की कथा और पंचवटी के महत्वपूर्ण प्रसंगों से रूबरू कराया गया।
मंच पर जैसे ही प्रभु श्रीराम, माता सीता और भ्राता लक्ष्मण का पंचवटी में प्रवेश हुआ, पूरा प्रेक्षागृह ‘जय श्रीराम’ के जयघोष से गूंज उठा। कलाकारों के सशक्त अभिनय, प्रभावशाली संवाद और जीवंत प्रस्तुति ने दर्शकों को त्रेतायुग के आध्यात्मिक वातावरण की अनुभूति करा दी।
शूर्पणखा प्रसंग
मंचन के दौरान लंकापति रावण की बहन शूर्पणखा के पंचवटी आगमन का दृश्य आकर्षण का केंद्र रहा। शूर्पणखा सुंदर रूप धारण कर प्रभु श्री राम और लक्ष्मण के समक्ष विवाह का प्रस्ताव रखती है। जब दोनों भाई उसके प्रस्ताव को ठुकरा देते हैं, तो क्रुद्ध होकर शूर्पणखा माता सीता की ओर झपटती है।
माता सीता की रक्षा हेतु लक्ष्मण जी तुरंत अपनी तलवार से शूर्पणखा की नाक और कान काट देते हैं। इस दृश्य के मंचन के दौरान बजते पृष्ठभूमि संगीत और कलाकारों के अभिनय पर श्रद्धालुओं ने तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।
खर-दूषण वध और भक्तिमय माहौल
अपमानित शूर्पणखा रोती हुई अपने राक्षस भाइयों खर और दूषण के पास पहुंचती है, जिसके बाद दोनों राक्षस अपनी सेना लेकर पंचवटी पर हमला बोल देते हैं। भगवान श्री राम अकेले ही अपनी दिव्य बाणविद्या से खर, दूषण और उनकी पूरी सेना का संहार कर देते हैं।
महाकवि तुलसीदास की कथा पर आधारित नाटक का नाट्यलेखन और निर्देशन मुकेश वर्मा ने किया। लीला के दौरान सुंदर भजनों और चौपाइयों के गायन ने माहौल को पूरी तरह धर्ममय बना दिया। देर रात तक चली इस रामलीला को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु और नागरिक मौजूद रहे।





