
मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने और SIR पर रोक की मांग, लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्रों का प्रदर्शन
Lucknow News: उत्तर प्रदेश की राजधानी स्थित लखनऊ विश्वविद्यालय में संयुक्त छात्र मोर्चा के बैनर तले विभिन्न छात्र संगठनों ने रविवार को एक विशाल मार्च और प्रतिवाद सभा का आयोजन किया। विश्वविद्यालय परिसर में एकजुट होकर छात्रों ने गेट नंबर 3 तक मार्च निकाला और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
प्रदर्शनकारी छात्रों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए संवैधानिक प्रक्रिया शुरू करने, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने और चुनाव आयोग के भीतर फैसलों पर उठे गंभीर सवालों की निष्पक्ष व स्वतंत्र जांच कराने की पुरजोर मांग उठाई।
चुनाव आयोग पर छात्रों का फूटा गुस्सा
हाल ही में द इंडियन एक्सप्रेस की खोजी रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार चुनाव आयोग के विभिन्न फैसलों, मतदाता पंजीकरण, फॉर्म 6 में बदलाव और डिजिटल डेटाबेस से जुड़े विषयों पर लिखित आपत्तियां दर्ज कराई थीं। दोनों आयुक्तों ने आंतरिक स्तर पर कुछ बदलावों को नियमविरुद्ध और अनधिकृत बताया था।
इसी रिपोर्ट के सामने आने के बाद छात्र संगठनों में रोष फैल गया। आइसा लखनऊ विश्वविद्यालय के अध्यक्ष शांतम निधि ने कहा कि जब चुनाव आयोग के ही शीर्ष सदस्य लिखित में गंभीर सवाल उठा रहे हैं, तो लोकतंत्र की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जांच होने तक एसआईआर पर रोक लगाई जानी चाहिए।
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राष्ट्रपति को भेजा गया ज्ञापन
प्रदर्शन के अंत में छात्र प्रतिनिधियों ने राष्ट्रपति के नाम एक औपचारिक ज्ञापन सौंपा, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त पर जिम्मेदारी तय करने, निष्पक्ष जांच समिति का गठन करने और दोषी पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई की मांग की गई। एनएसयूआई उत्तर प्रदेश के महासचिव शुभम खरवार और एससीएस उपाध्यक्ष महेंद्र यादव ने कहा कि मतदान का अधिकार लोकतंत्र की नींव है और किसी भी नागरिक का नाम मनमाने ढंग से मतदाता सूची से नहीं हटाया जाना चाहिए।
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वहीं दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने मीडिया रिपोर्टों पर प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया कि विभिन्न आयुक्तों द्वारा दर्ज की गई टिप्पणियां संस्थागत विचार-विमर्श की एक सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा थीं और पिछले एक वर्ष में सभी अंतिम निर्णय पूर्ण आयोग द्वारा सर्वसम्मति से ही लिए गए हैं।
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