
लखनऊ को मेट्रो की नई रफ्तार; चारबाग से बसंतकुंज तक फेज-2 के काम का आगाज़
Lucknow Metro: नए साल के साथ ही नवाबों के शहर लखनऊ की कनेक्टिविटी को नई रफ्तार मिलने जा रही है। राजधानी में लखनऊ मेट्रो के दूसरे चरण यानी ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर के निर्माण का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। केंद्र सरकार से 5801 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी मिलने के बाद मेट्रो प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं और नए साल में निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है।
चारबाग से बसंतकुंज तक प्रस्तावित मेट्रो कॉरिडोर के लिए वित्तीय मंजूरी मिलने के बाद अब जमीन अधिग्रहण और तकनीकी प्रक्रियाओं पर काम शुरू हो गया है। इस दूसरे चरण के तहत मेट्रो डिपो का निर्माण लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) की बसंतकुंज योजना में किया जाएगा। डिपो के लिए करीब 1.80 लाख वर्ग मीटर जमीन की जरूरत होगी। इसके चलते बसंतकुंज योजना के लेआउट में बदलाव किया जाएगा।
बसंतकुंज योजना में बदलाव, मांगे गए आपत्ति और सुझाव
डिपो निर्माण के लिए बसंतकुंज योजना के सेक्टर-ए में जमीन प्रस्तावित की गई है। इससे वहां पहले से स्वीकृत कुछ निजी प्रोजेक्ट्स प्रभावित हो सकते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए एलडीए ने आम लोगों से आपत्ति और सुझाव मांगे हैं। इसके लिए अपर सचिव द्वारा सार्वजनिक नोटिस जारी किया गया है, जिसमें 15 दिनों के भीतर आपत्तियां दर्ज कराने का समय दिया गया है। एलडीए का कहना है कि जो भी सुझाव और आपत्तियां प्राप्त होंगी, उन पर लेआउट संशोधन के दौरान विचार किया जाएगा।
हालांकि, इस नोटिस के बाद बसंतकुंज योजना के सेक्टर-ए में प्लॉट लेने वाले 272 आवंटी चिंतित हो गए हैं। एलडीए अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि मेट्रो डिपो के लिए प्रस्तावित जमीन अलग है और इसका आवंटित प्लॉटों से कोई सीधा संबंध नहीं है। आम लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है।
अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से भी मिली हरी झंडी
लखनऊ मेट्रो के दूसरे चरण को वित्तीय संस्थानों से भी समर्थन मिल चुका है। पब्लिक इन्वेस्टमेंट बोर्ड (पीआईबी) और केंद्र कैबिनेट से मंजूरी के अलावा 12 नवंबर को लखनऊ दौरे पर आई यूरोपियन इन्वेस्टमेंट बैंक ने भी परियोजना को वित्तीय मदद देने के लिए सहमति जता दी है। यह बैंक पहले भी लखनऊ मेट्रो को कर्ज दे चुका है। ऐसे में अब परियोजना के लिए फंडिंग की कोई बाधा नहीं बची है।
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भूमिगत स्टेशनों के लिए भी मांगी गई जमीन
ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर के तहत कई भूमिगत स्टेशन प्रस्तावित हैं, जिनके लिए मेट्रो प्रशासन ने जमीन की मांग की है। इनमें गौतमबुद्ध मार्ग (लाटूश रोड), झंडेवाला पार्क, अमीनाबाद, पांडेयगंज, चौक चौराहा, मेडिकल कॉलेज चौराहा और ठाकुरगंज चौराहा जैसे इलाके शामिल हैं। इन क्षेत्रों में मेट्रो स्टेशन बनने से स्थानीय लोगों को आवागमन में बड़ी राहत मिलेगी।
इन इलाकों को होगा सीधा फायदा
चारबाग से बसंतकुंज तक मेट्रो कॉरिडोर पूरा होने के बाद अमीनाबाद, चौक, पांडेयगंज और ठाकुरगंज जैसे घनी आबादी वाले इलाकों को सीधा लाभ मिलेगा। फिलहाल इन क्षेत्रों में चारबाग से बसंतकुंज तक सीधा और आसान यातायात साधन उपलब्ध नहीं है। मेट्रो के शुरू होने से न केवल समय की बचत होगी, बल्कि ट्रैफिक जाम और प्रदूषण से भी राहत मिलेगी।
चारबाग स्टेशन को इंटरचेंज स्टेशन के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां यात्री एक कॉरिडोर से दूसरे कॉरिडोर में मेट्रो बदल सकेंगे। इससे पूरे शहर का मेट्रो नेटवर्क और अधिक सुलभ और उपयोगी हो जाएगा।
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फैक्ट फाइल
- ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर की कुल लंबाई: 11.165 किलोमीटर
- एलिवेटेड सेक्शन: 4.286 किलोमीटर
- भूमिगत सेक्शन: 6.879 किलोमीटर
- कुल अनुमानित लागत: 5801 करोड़ रुपये
कुल मिलाकर, लखनऊ मेट्रो का दूसरा चरण राजधानी के विकास की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा। नए साल में इसके निर्माण कार्य की शुरुआत से शहर को आधुनिक और तेज सार्वजनिक परिवहन की एक और मजबूत कड़ी मिलने जा रही है।
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