TET पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, नहीं जाएगी इन शिक्षकों की नौकरी

High Court Decision: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कुशीनगर के शिक्षक की विशेष अपील स्वीकार करते हुए कहा- 31 मार्च 2015 से पहले TET पास करने वाले शिक्षकों की नियुक्ति सुरक्षित, केवल TET के आधार पर सेवा समाप्त नहीं की जा सकती।

Prayagraj: उत्तर प्रदेश के बेसिक और जूनियर हाईस्कूल शिक्षकों के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अहम और राहत भरा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि 31 मार्च 2015 से पहले नियुक्त हुए वे शिक्षक, जिन्होंने इस कटऑफ तारीख से पहले TET पास कर लिया था, उनकी नियुक्ति सुरक्षित रहेगी। ऐसे शिक्षकों की सेवा सिर्फ TET के आधार पर समाप्त नहीं की जा सकती।

यह फैसला प्रदेश में 2015 से पहले नियुक्त हुए उन शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिनकी नियुक्ति के समय TET अनिवार्य योग्यता नहीं थी, लेकिन उन्होंने बाद में निर्धारित समयसीमा के भीतर TET उत्तीर्ण कर लिया था।

कुशीनगर के शिक्षक की याचिका पर आया फैसला

इलाहाबाद हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने कुशीनगर के एक शिक्षक की विशेष अपील स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने संबंधित शिक्षक की नियुक्ति को वैध माना और सेवा समाप्त करने की कार्रवाई को उचित नहीं माना।

अदालत ने कहा कि शिक्षक की नियुक्ति के समय लागू 1978 की नियमावली में TET पास होना अनिवार्य शर्त नहीं थी। बाद में TET को अनिवार्य किए जाने के बावजूद संबंधित शिक्षक ने साल 2014 में ही TET परीक्षा पास कर ली थी।

31 मार्च 2015 की कटऑफ तारीख क्यों महत्वपूर्ण?

इस मामले में 31 मार्च 2015 की तारीख बेहद महत्वपूर्ण है। कोर्ट ने माना कि संबंधित शिक्षक ने इस निर्धारित समयसीमा से पहले ही TET पास कर लिया था। इसलिए उनकी नियुक्ति को बाद में TET की अनिवार्यता के आधार पर रद्द नहीं किया जा सकता।

अदालत के इस फैसले से उन शिक्षकों को राहत मिली है, जिनकी नियुक्ति TET अनिवार्यता लागू होने से पहले हुई थी और जिन्होंने बाद में तय समयसीमा के भीतर पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण कर ली थी।

NCTE के आदेशों का भी हुआ जिक्र

हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (NCTE) के अलग-अलग आदेशों और उत्तर प्रदेश सरकार के शासनादेशों की भी समीक्षा की।

23 अगस्त 2010 को प्राथमिक शिक्षकों के लिए TET को अनिवार्य किए जाने का आदेश जारी किया गया था। इसके बाद 29 जुलाई 2011 को कक्षा 6 से 8 तक यानी जूनियर हाईस्कूल के शिक्षकों के लिए भी TET अनिवार्य कर दी गई।

इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 5 दिसंबर 2012 के शासनादेश के जरिए NCTE की गाइडलाइंस को प्रदेश में लागू किया।

नियुक्ति रद्द नहीं की जा सकती- हाईकोर्ट

कोर्ट ने अपने फैसले में साफ किया कि जब संबंधित शिक्षक की नियुक्ति हुई थी, उस समय लागू नियमों के तहत TET पास करना अनिवार्य नहीं था। साथ ही शिक्षक ने बाद में निर्धारित कटऑफ तारीख से पहले ही TET उत्तीर्ण कर लिया था।

ऐसे में उनकी नियुक्ति को वैध माना जाएगा और प्रशासन केवल TET से जुड़े आधार पर उनकी सेवा समाप्त नहीं कर सकता।

सैकड़ों शिक्षकों को राहत की उम्मीद

इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस फैसले को उत्तर प्रदेश के उन शिक्षकों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जो 31 मार्च 2015 से पहले नियुक्त हुए और निर्धारित अवधि के भीतर TET पास कर चुके हैं। फैसले से ऐसे शिक्षकों की सेवा सुरक्षा को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

हालांकि, किसी अन्य शिक्षक के मामले में राहत स्वतः लागू होगी या नहीं, यह संबंधित मामले के तथ्यों और लागू नियमों पर निर्भर करेगा।

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