अखिलेश के किले में योगी की सेंध! 115 सीटों पर विकास कार्यों से सियासी तैयारी…

SP-कांग्रेस की मजबूत पकड़ वाले इलाकों में योगी की एंट्री, विकास परियोजनाओं के जरिए 2027 का सियासी समीकरण बदलने की तैयारी।

UP Politics: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सियासी तैयारियां तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लगातार जिलों के दौरों और बड़े विकास प्रोजेक्ट्स के उद्घाटन-शिलान्यास को चुनावी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। खास बात यह है कि सरकार का फोकस उन विधानसभा क्षेत्रों पर भी दिखाई दे रहा है, जहां 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन ने बढ़त बनाई थी।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ महीनों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के 75 में से 44 से ज्यादा जिलों का दौरा किया है। इन दौरों के दौरान करीब 115 विधानसभा क्षेत्रों से जुड़े 38 हजार करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों का उद्घाटन या शिलान्यास किया गया है।

2024 में 115 में से 67 सीटों पर विपक्ष आगे
इन 115 विधानसभा क्षेत्रों का चुनावी आंकड़ा खासा दिलचस्प है। 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी-कांग्रेस गठबंधन ने इनमें से 67 विधानसभा क्षेत्रों में बढ़त हासिल की थी। इनमें समाजवादी पार्टी 54 और कांग्रेस 13 विधानसभा क्षेत्रों में आगे रही थी।

इसके मुकाबले बीजेपी 47 और उसकी सहयोगी राष्ट्रीय लोक दल (RLD) एक विधानसभा क्षेत्र में आगे रही थी। यानी 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान इन इलाकों में विपक्षी गठबंधन का प्रदर्शन बीजेपी और उसके सहयोगियों के मुकाबले बेहतर रहा था।

यही वजह है कि इन क्षेत्रों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लगातार दौरे और विकास परियोजनाओं की घोषणा को 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

2022 में बीजेपी की पकड़ थी मजबूत
हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव के आंकड़े पूरी कहानी नहीं बताते। 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी और उसके सहयोगियों ने इन 115 सीटों में मजबूत प्रदर्शन किया था।

आंकड़ों के मुताबिक, बीजेपी ने इनमें से 71 सीटों पर जीत दर्ज की थी। अपना दल (सोनेलाल) को तीन और निषाद पार्टी को दो सीटें मिली थीं। वहीं समाजवादी पार्टी ने 33 सीटों पर जीत हासिल की थी। RLD और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी को भी सीटें मिली थीं, जबकि कांग्रेस के खाते में सिर्फ एक सीट आई थी।

इससे साफ है कि 2024 में विपक्षी गठबंधन को मिली बढ़त के बावजूद इन इलाकों में बीजेपी की विधानसभा चुनाव वाली जमीनी पकड़ पहले से मजबूत रही है।

रायबरेली में 879 करोड़ के प्रोजेक्ट
योगी सरकार के इस फोकस का एक उदाहरण रायबरेली है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 24 अगस्त को रायबरेली पहुंचे थे। यह लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी का संसदीय क्षेत्र है।

इस दौरान करीब 879 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, रायबरेली जिले के बछरावां, हरचंदपुर और रायबरेली विधानसभा क्षेत्रों में 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस को बढ़त मिली थी।

मैनपुरी और करहल पर भी नजर
इसके बाद मुख्यमंत्री मैनपुरी पहुंचे, जहां करीब 682 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की घोषणा की गई। मैनपुरी और करहल समाजवादी पार्टी के मजबूत इलाकों में गिने जाते हैं।

करहल सीट का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि 2022 के विधानसभा चुनाव में यहां से सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव विधायक चुने गए थे। ऐसे में मैनपुरी और करहल में बड़े विकास कार्यों के जरिए सरकार की सक्रियता को राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है।

अयोध्या में भी विकास परियोजनाओं पर जोर
अयोध्या भी बीजेपी के लिए बेहद महत्वपूर्ण राजनीतिक क्षेत्र है। 2024 के लोकसभा चुनाव में फैजाबाद लोकसभा सीट पर समाजवादी पार्टी की जीत ने बीजेपी को बड़ा झटका दिया था।

इसके बाद अयोध्या क्षेत्र के बीकापुर, रुदौली और दरियाबाद जैसे विधानसभा क्षेत्रों में विकास परियोजनाओं पर जोर दिया गया। बीकापुर और रुदौली से जुड़े क्षेत्रों में करीब 810 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का जिक्र सामने आया है।

इससे संकेत मिलता है कि सरकार उन इलाकों में भी विकास के एजेंडे को आगे बढ़ा रही है, जहां 2024 में बीजेपी को अपेक्षित चुनावी सफलता नहीं मिली थी।

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गोरखपुर में 4,387 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह क्षेत्र गोरखपुर में भी बड़े विकास कार्यों पर जोर दिया गया है। अलग-अलग दौरों को मिलाकर जिले के विधानसभा क्षेत्रों में करीब 4,387 करोड़ रुपये की परियोजनाएं शुरू किए जाने की बात सामने आई है।

गोरखपुर बीजेपी का मजबूत गढ़ रहा है। 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने यहां संबंधित विधानसभा सीटों पर मजबूत प्रदर्शन किया था। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में कुछ क्षेत्रों में विपक्षी दलों ने अपनी स्थिति बेहतर की।

ऐसे में बीजेपी के सामने 2027 में एक तरफ अपने मजबूत क्षेत्रों को बचाए रखने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ उन इलाकों में दोबारा पकड़ मजबूत करने की कोशिश है जहां 2024 में समीकरण बदले थे।

विकास के साथ राजनीतिक संदेश भी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इन दौरों में सिर्फ विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास ही नहीं हो रहा है, बल्कि उनके भाषणों में विपक्षी दलों पर राजनीतिक निशाना भी देखने को मिलता है।

बीजेपी के लिए इन कार्यक्रमों के जरिए सरकार की उपलब्धियों और विकास कार्यों को जनता तक पहुंचाने का मौका मिल रहा है। वहीं विपक्षी दल इन दौरों को आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी के तौर पर देख रहे हैं।

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2027 में क्या बदलेगा यूपी का सियासी गणित?
कुल मिलाकर 115 विधानसभा क्षेत्रों और 38 हजार करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का आंकड़ा यूपी की चुनावी राजनीति में महत्वपूर्ण है। खासकर इसलिए क्योंकि इन 115 सीटों में बड़ी संख्या ऐसी है, जहां 2024 के लोकसभा चुनाव में SP-कांग्रेस गठबंधन ने बढ़त बनाई थी।बीजेपी 2027 से पहले एक तरफ अपने मजबूत क्षेत्रों में विकास परियोजनाओं के जरिए पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष की बढ़त वाले इलाकों में भी अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है।

अब बड़ा सवाल यही है कि क्या विकास परियोजनाओं और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लगातार जमीनी दौरों से 2027 विधानसभा चुनाव में इन 115 सीटों का चुनावी समीकरण बदल पाएगा, या फिर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस 2024 लोकसभा चुनाव जैसी बढ़त को विधानसभा चुनाव में भी बरकरार रखने में सफल होंगी? इसका जवाब 2027 के चुनावी मैदान में ही मिलेगा।

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