
Nepal में तबाही के बाद नई आफत, भूस्खलन से बनी 2 झीलों से बढ़ा बाढ़ का खतरा
Nepal Landslide: दो नई झीलों से फिर बाढ़ का खतरा, 2,482 लोग लापता; 320 भारतीय शामिल
नेपाल में भूस्खलन और भीषण बाढ़ के बाद हालात अभी सामान्य नहीं हुए हैं। नेपाल-चीन सीमा के पास भूस्खलन से बनी दो नई झीलें प्रशासन के लिए नई चिंता बन गई हैं। एक झील से लगातार पानी रिस रहा है, जबकि दूसरी में पानी बढ़ने की आशंका बनी हुई है। ऐसे में अचानक दूसरी बाढ़ या बड़े भूस्खलन का खतरा अभी टला नहीं है।
दो झीलों ने बढ़ाई चिंता
26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में ग्लेशियर के ढहने के बाद भारी मात्रा में बर्फ, चट्टान, मिट्टी और पानी नीचे की ओर आया। इससे नदियों का बहाव प्रभावित हुआ और कई जगह मलबे के पीछे पानी जमा होकर अस्थायी झीलें बन गईं।
अधिकारियों की चिंता इसलिए बढ़ी हुई है क्योंकि इन प्राकृतिक जलाशयों में जमा पानी अगर अचानक बाहर निकलता है तो निचले इलाकों में दोबारा तेज बाढ़ आ सकती है। रिपोर्टों के अनुसार, चीन की ओर बने जलाशय में भी बड़ी मात्रा में पानी पहुंचने की आशंका जताई गई थी।
2,482 लोग अब भी लापता
नेपाल और तिब्बत में आई इस आपदा के बाद लापता लोगों की संख्या 2,482 तक पहुंच गई है। इनमें 320 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। नेपाल में 1,924 और तिब्बत में 558 लोगों के लापता होने की रिपोर्ट है। आंकड़े लगातार बदल रहे हैं क्योंकि कई इलाकों में संचार व्यवस्था और सड़क संपर्क बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
भारत ने नेपाल में फंसे अपने नागरिकों को निकालने के लिए अभियान चलाया है। शनिवार को उपलब्ध अपडेट के मुताबिक 84 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा चुका था, जबकि करीब 320 भारतीय अभी लापता या संपर्क से बाहर बताए गए।
मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा
आपदा में नेपाल और तिब्बत में सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है। शनिवार की एक रिपोर्ट में कुल 584 मौतों की पुष्टि की गई थी, जबकि अन्य रिपोर्टों में इससे अधिक आंकड़े भी सामने आए हैं। राहत और बचाव अभियान जारी रहने के कारण मृतकों और लापता लोगों की संख्या में लगातार बदलाव हो रहा है।
नेपाल में अकेले 579 मौतों की पुष्टि की गई थी। इसके अलावा सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं। कई स्थानों पर मलबे में दबे लोगों को निकालने के लिए सुरंगों और क्षतिग्रस्त इलाकों में अभियान चलाया जा रहा है।
हजारों लोगों को सुरक्षित निकाला गया
भारी तबाही के बावजूद नेपाल में हजारों लोगों को बचाया गया है। राहत और बचाव दल कठिन पहाड़ी इलाकों में हेलिकॉप्टर और अन्य माध्यमों से लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि खराब मौसम, मलबे और क्षतिग्रस्त सड़कों के कारण अभियान में लगातार मुश्किलें आ रही हैं।
नेपाल में अभी भी मंडरा रहा दूसरी बाढ़ का खतरा
विशेषज्ञों और राहत एजेंसियों के मुताबिक आपदा का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। भूस्खलन से बने अस्थायी बांध या झील टूटने की स्थिति में अचानक बड़ी मात्रा में पानी नीचे की ओर आ सकता है। इससे पहले से प्रभावित इलाकों में दूसरी फ्लैश फ्लड और भूस्खलन का खतरा बढ़ सकता है।
नेपाल-चीन सीमा पर हुई इस त्रासदी ने हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर, भूस्खलन और अचानक आने वाली बाढ़ के बढ़ते खतरे को एक बार फिर सामने ला दिया है।





