
अब सैनिक नहीं, रोबोट लड़ेंगे जंग! यूक्रेन के युद्धक्षेत्र से बदली तस्वीर, भारत के लिए क्या सबक?
Russia-Ukraine Conflict: यूक्रेन में UGV और ड्रोन का बढ़ता इस्तेमाल बदल रहा युद्ध का तरीका, इंसान-मशीन के नए तालमेल से भारत के सामने भी रणनीति पर विचार का सवाल
Ukrain: रूस-यूक्रेन युद्ध ने आधुनिक युद्ध की रणनीति को तेजी से बदल दिया है। ड्रोन के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल के बाद अब मानवरहित ग्राउंड व्हीकल्स (UGVs), रोबोटिक सिस्टम और ऑटोमेशन युद्ध के मैदान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। यूक्रेन ने इन तकनीकों को फ्रंटलाइन लॉजिस्टिक्स, घायल सैनिकों को निकालने, माइन क्लियरेंस और कुछ लड़ाकू अभियानों में इस्तेमाल करना तेज कर दिया है।
यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, 2026 की शुरुआत से मार्च तक UGVs ने करीब 24,500 मिशन पूरे किए। अकेले मार्च में 9,000 से ज्यादा लड़ाकू और लॉजिस्टिक मिशन किए गए। जुलाई में यूक्रेनी रक्षा खरीद एजेंसी ने बताया कि 2026 के लिए 22,000 से अधिक UGVs के कॉन्ट्रैक्ट किए जा चुके हैं। इनमें बड़ी संख्या लॉजिस्टिक्स और इंजीनियरिंग कार्यों के लिए है, जबकि कुछ सिस्टम लड़ाकू और टोही भूमिकाओं के लिए भी हैं।
साइंस फिक्शन से वास्तविक युद्ध तक
रोबोट के जरिए इंसानों की जगह युद्ध लड़ने का विचार नया नहीं है। लेखक फिलिप के. डिक की 1953 की साइंस फिक्शन कहानी ‘Second Variety’ में ऐसी मशीनों की कल्पना की गई थी, जो युद्ध के मैदान में इंसानों का रूप लेकर दुश्मन को निशाना बनाती हैं।
बाद में इसी कहानी पर 1995 में फिल्म ‘Screamers’ बनी। उस समय इंसानों जैसी मशीनों का युद्ध में इस्तेमाल कल्पना का हिस्सा था। लेकिन आज यूक्रेन का युद्ध यह दिखा रहा है कि युद्ध में मशीनों की भूमिका केवल कल्पना तक सीमित नहीं रह गई है।
हालांकि मौजूदा यूक्रेनी रोबोटिक सिस्टम फिलहाल पूरी तरह स्वतंत्र होकर इंसानों की तरह निर्णय लेने वाली मशीनें नहीं हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे रिमोट-कंट्रोल्ड या मानव-निर्देशित सिस्टम की है, जो सैनिकों को जोखिम वाले इलाकों में भेजने की जरूरत कम करते हैं।
यूक्रेन में कैसे इस्तेमाल हो रहे हैं रोबोट?
यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, UGVs का इस्तेमाल गोला-बारूद और सामान पहुंचाने, घायल सैनिकों को निकालने, टोही, इंजीनियरिंग कार्य और लड़ाकू अभियानों में किया जा रहा है। फरवरी 2026 में मंत्रालय ने बताया था कि जनवरी में ग्राउंड रोबोट्स ने 7,000 से ज्यादा फ्रंटलाइन मिशन पूरे किए थे।
मार्च में यह संख्या बढ़कर 9,000 से ज्यादा मासिक मिशन हो गई। यूक्रेनी सेना के मुताबिक, इसका एक प्रमुख उद्देश्य ऐसी लॉजिस्टिक गतिविधियों को मशीनों के हवाले करना है, जिनमें सैनिकों को दुश्मन की फायरिंग के बीच जाना पड़ता है।
यूक्रेन ने अलग-अलग भूमिकाओं के लिए कई प्रकार के सिस्टम को मंजूरी दी है। उदाहरण के लिए, Bizon-L जैसे UGV को आधुनिक युद्धक्षेत्र में इस्तेमाल के लिए अधिकृत किया गया है, जबकि Zmiy Droid 12.7 जैसे सिस्टम टोही और हथियार ले जाने वाली भूमिका के लिए विकसित किए गए हैं।
‘आर्मी ऑफ रोबोट्स’ की दिशा में यूक्रेन
यूक्रेन में रोबोटिक युद्ध को लेकर संस्थागत स्तर पर भी पहल तेज हुई है। देश के पूर्व रक्षा मंत्री मायखाइलो फेदोरोव ने सितंबर 2026 में ‘Army of Robots’ नाम की पहल शुरू की, जिसका उद्देश्य युद्धक्षेत्र के लिए रोबोटिक तकनीक विकसित करने वाली कंपनियों, शोध और सैन्य परीक्षणों को एक इकोसिस्टम के रूप में आगे बढ़ाना है।
यूक्रेन पहले से ही अलग Unmanned Systems Forces संचालित करता है, जिसमें हवाई ड्रोन के साथ ग्राउंड रोबोट और समुद्री मानवरहित प्रणालियां शामिल हैं।
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युद्ध में इंसान की भूमिका कितनी बदलेगी?
रूस-यूक्रेन युद्ध से यह संकेत मिल रहा है कि भविष्य के युद्ध में सैनिकों की भूमिका खत्म होने के बजाय बदल सकती है। मशीनें खतरनाक इलाकों में सामान पहुंचाने, माइन बिछाने या हटाने और घायल सैनिकों को निकालने जैसे काम कर सकती हैं, जबकि मानव सैनिक कम जोखिम वाले स्थानों से इनका संचालन और निगरानी कर सकते हैं।
हाल ही में यूक्रेनी अभियानों में ग्राउंड रोबोट्स के जरिए माइनफील्ड से जुड़े कार्यों और रात में ऑपरेशन करने के इस्तेमाल की रिपोर्ट भी सामने आई है। इससे युद्ध में मानव-मशीन सहयोग, तेज डेटा फीडबैक और ऑटोमेशन का महत्व बढ़ता दिखाई दे रहा है।
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भारत के लिए क्या संकेत?
रूस-यूक्रेन युद्ध का अनुभव भारत समेत दुनिया की सेनाओं के लिए आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति को समझने का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। खास तौर पर ड्रोन, एंटी-ड्रोन सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर, UGVs, निगरानी और कमांड-एंड-कंट्रोल तकनीकों का एक साथ इस्तेमाल भविष्य की सैन्य योजना में महत्वपूर्ण विषय बनता जा रहा है।
हालांकि किसी दूसरे देश के युद्धक्षेत्र के अनुभव को सीधे भारत की सैन्य रणनीति पर लागू नहीं किया जा सकता। भारत की भौगोलिक परिस्थितियां, सीमाएं, सैन्य संरचना और संभावित युद्ध परिदृश्य अलग हैं। लेकिन यूक्रेन में तेजी से बढ़ता मानव-मशीन युद्ध यह जरूर दिखाता है कि तकनीकी बदलाव युद्ध की गति और सैनिकों की भूमिका दोनों को प्रभावित कर रहा है।
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