
अब और तेज होगी जवाबी कार्रवाई! भारत ने तैनात किए 12 परमाणु वॉरहेड…
SIPRI Reports: भारत ने अपनी परमाणु हथियार नीति में एक बड़ा बदलाव करते हुए पहली बार 12 परमाणु वॉरहेड तैनात किए हैं। यह दावा दुनिया की प्रमुख हथियार निगरानी संस्था Stockholm International Peace Research Institute (SIPRI) की ताजा रिपोर्ट में किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने पहली बार ऐसे परमाणु हथियारों को तैनात किया है, जिन्हें तुरंत ऑपरेशन में इस्तेमाल किया जा सकता है।
SIPRI की इस रिपोर्ट को भारत की रणनीतिक और रक्षा नीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। अब तक भारत की नीति यह रही थी कि परमाणु हथियार और उन्हें लॉन्च करने वाले सिस्टम अलग-अलग स्थानों पर रखे जाते थे, ताकि किसी भी आकस्मिक स्थिति या गलत इस्तेमाल की संभावना को कम किया जा सके। लेकिन अब पहली बार कुछ वॉरहेड्स को तैनात और रेडी-टू-फायर स्थिति में रखा गया है।
क्या कहती है SIPRI की रिपोर्ट?
SIPRI ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा है कि भारत के पास कुल मिलाकर लगभग 180 परमाणु हथियार होने का अनुमान है। इनमें से 12 वॉरहेड्स अब तैनात माने जा रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, यह बदलाव इस बात का संकेत है कि भारत अपनी परमाणु तैयारी और प्रतिक्रिया क्षमता को और मजबूत कर रहा है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत लगातार अपनी मिसाइल और डिलीवरी सिस्टम क्षमता को आधुनिक बना रहा है। इसमें लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों, पनडुब्बी से लॉन्च होने वाली मिसाइलों और मोबाइल लॉन्च प्लेटफॉर्म पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
क्यों अहम माना जा रहा है यह बदलाव?
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का यह कदम बदलते वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा माहौल से जुड़ा हो सकता है। चीन और पाकिस्तान दोनों ही लगातार अपनी सैन्य और परमाणु क्षमताओं को मजबूत कर रहे हैं। ऐसे में भारत भी अपनी प्रतिरोधक क्षमता (Deterrence Capability) को और प्रभावी बनाने की दिशा में काम कर रहा है।
रणनीतिक मामलों के जानकारों के मुताबिक, रेडी-टू-फायर परमाणु हथियार तैनात करने का मतलब है कि किसी भी आपात स्थिति में जवाबी कार्रवाई पहले की तुलना में ज्यादा तेजी से की जा सकेगी। हालांकि भारत की आधिकारिक “No First Use” यानी पहले परमाणु हमला न करने की नीति में फिलहाल किसी बदलाव की घोषणा नहीं की गई है।
भारत की परमाणु नीति क्या कहती है?
भारत ने 1998 के पोखरण परमाणु परीक्षणों के बाद खुद को परमाणु शक्ति संपन्न देश घोषित किया था। इसके बाद भारत ने “विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोध” (Credible Minimum Deterrence) और “No First Use” की नीति अपनाई थी।
इस नीति के तहत भारत ने हमेशा कहा कि वह परमाणु हथियारों का इस्तेमाल पहले नहीं करेगा, लेकिन यदि उस पर परमाणु हमला होता है तो वह “भारी जवाबी कार्रवाई” करेगा। यही वजह रही कि भारत ने वर्षों तक अपने परमाणु हथियारों और लॉन्च सिस्टम को अलग-अलग रखा।
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वैश्विक स्तर पर बढ़ रही परमाणु चिंता
SIPRI की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दुनिया के कई देश अपने परमाणु हथियार भंडार को आधुनिक बना रहे हैं। रूस, अमेरिका, चीन, पाकिस्तान और उत्तर कोरिया जैसे देश लगातार अपनी परमाणु क्षमता बढ़ाने में जुटे हुए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक तनाव और भू-राजनीतिक संघर्षों के बीच परमाणु हथियारों की होड़ एक बार फिर तेज होती दिखाई दे रही है। ऐसे में भारत का यह कदम भी उसी बदलते सुरक्षा वातावरण का हिस्सा माना जा रहा है।
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सरकार की ओर से नहीं आया आधिकारिक बयान
फिलहाल भारत सरकार की ओर से SIPRI रिपोर्ट पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा कारणों से सरकार सार्वजनिक रूप से ऐसे मामलों पर सीमित जानकारी ही साझा करती है।
हालांकि रिपोर्ट सामने आने के बाद रणनीतिक और रक्षा मामलों के विशेषज्ञों के बीच इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है। आने वाले समय में भारत की रक्षा नीति और परमाणु रणनीति को लेकर और भी बहस देखने को मिल सकती है।
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