‘जय फिलिस्तीन’ का नारा..जा सकती है ओवैसी की सांसदी, राष्ट्रपति तक पहुंची बात?

Asaduddin Owaisi: संसद सत्र के दूसरे दिन भी कई नवनिर्वाचित सांसदों ने लोकसभा सदस्य पद की शपथ ली। इस दौरान सबसे ज्यादा चर्चा में रहे AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी। हर मसले पर बेबाकी से अपनी राय रखने वाले एआईएमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी फिर विवादों में आ गए हैं। बीजेपी उन पर हमलावर हो गई है। मंगलवार को ओवैसी ने संसद में शपथ लेने के दौरान ‘जय फिलिस्तीन’ का नारा लगाया था, जिसके बाद सत्ता पक्ष से जुड़े कई सांसदों ने बुधवार को भी इस पर आपत्ति जताई और उनकी जमकर आलोचना की।

गिरिराज सिंह ने मीडिया से बातचीत के दौरान ओवैसी पर जोरदार निशाना साधा। उन्होंने कहा, “ओवैसी ने जिस तरह से संसद में शपथ ली है, उससे पूरे देश का अपमान हुआ है। फिलिस्तीन जिंदाबाद कहना गलत है, इससे पूरे देश की बदनामी हुई है। उन्हें संसद से बाहर निकालना चाहिए। ओवैसी देश को सीरिया बनाना चाहते हैं। वो देश में गजवा ए हिंद की अवधारणा को स्थापित करना चाहते हैं। इसलिए मैं बार-बार यही कहूंगा कि ओवैसी पर कार्रवाई होनी चाहिए।“

बता दें कि ओवैसी को संसद से निष्कासित करने के संबंध में राष्ट्रपति को पत्र भी लिखा गया है, जिस पर गिरिराज ने कहा, “हां बिल्कुल, लिखना ही चाहिए। मैं तो कहूंगा कि इनकी सदस्यता रद्द होनी चाहिए। ओवैसी ने इस तरह की नारेबाजी कर संसद की गरिमा पर कुठाराघात किया है।“

अधिवक्ता विनीत जिंदल ने दर्ज की शिकायत
अधिवक्ता विनीत जिंदल ने भारत के राष्ट्रपति के समक्ष भारत के संविधान के अनुच्छेद 103 के तहत एक शिकायत दर्ज की है। इसमें एक विदेशी राज्य “फिलिस्तीन” के प्रति अपनी निष्ठा या प्रतिबद्धता दिखाने के लिए अनुच्छेद 102 (4) के तहत सांसद असदुद्दीन ओवैसी को अयोग्य घोषित करने की मांग की गई है। विनीत जिंदल ने अपने एक्स हैंडल से लिखा कि जो भारत माता की जय बोलने से मना करता है वो देश की संसद में देश के संविधान व देश की अखंडता को बनाए रखने की शपथ लेते हुए ‘जय फिलिस्तीन’ बोलता है। इससे पता चलता है कि ये ओवैसी भारत नहीं दूसरे देश के लिए निष्ठा रखता है। इसकी लोक सभा सदस्यता निरस्त होनी चाहिए

ओवैसी का बयान सदन से डिलीट
एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने जय भीम बोला, इसके बाद जय मीम, जय तेलंगाना और जय फिलस्तीन का नारा लगाया था। विवाद बढ़ता देख उन्होंने कहा कि मैं भारत के हाशिए पर पड़े लोगों के मुद्दों को ईमानदारी से उठाता रहूंगा। इसके बाद सभापति ने इसे रिकॉर्ड से हटा दिया।

चली जाएगी ओवैसी की सदस्यता? आर्टिकल 102 (D) को जानिए
ओवैसी का सदन के अंदर जय फिलिस्तीन का नारा लगाना उन्हें अब महंगा पड़ सकता है। इस पूरे मामले में बार-बार अनुच्छेद 102 का जिक्र आ रहा है. विपक्षी दल इसके हवाले से कह रहे हैं कि लोकसभा सदस्यता लेते के समय किसी अन्य देश की हिमायत करना गलत है, और इस आधार पर मेंबरशिप रद्द तक हो सकती है. क्या है इस धारा में

लोकसभा सदस्य की सदस्यता जा सकती है अगर-
(क) अगर वह भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन कोई लाभ का पद धारण करता है, सिवाय इसके कि संसद द्वारा कानून द्वारा घोषित पद को उसके धारक को अयोग्य घोषित नहीं किया जाता है।
(ख) अगर वह अस्वस्थ दिमाग का है और एक सक्षम अदालत द्वारा ऐसा घोषित किया गया है।
(ग) अगर वह दिवालिया है और उसकी संपत्ति का निपटारा नहीं हुआ है।
(घ) अगर वह भारत का नागरिक नहीं है, या उसने स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता प्राप्त कर ली है, या किसी विदेशी राज्य के प्रति निष्ठा या आस्था की किसी स्वीकृति के अधीन है।
(ङ) अगर वह संसद द्वारा बनाए गए किसी कानून के द्वारा या उसके अधीन ऐसा अयोग्य घोषित किया गया है।

इस रूल के तहत गई थी महुआ की मेंबरशिप
संसद के दोनों ही सदनों में एथिक्स कमेटी है. ये नेताओं के नैतिक आचरण पर नजर रखती हैं. कमेटी अगर सिफारिश करे कि कोई खास सदस्य सदन की गरिमा तोड़ रहा है, या सार्वजनिक जीवन में मर्यादा भंग कर रहा है तो एक्सट्रीम मामलों में सदस्यता जा भी सकती है. महुआ मोइत्रा की सदस्यता भी इसी एथिक्स कमेटी की सिफारिश पर रद्द की गई थी.

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