
BSP में भतीजों की सियासत खत्म! भतीजी दीपिका आनंद को मिल सकता है मौका
BSP: आकाश आनंद समेत सभी भतीजों को पार्टी की जिम्मेदारी से दूर रखने का फैसला, मायावती ने दीपिका आनंद को लेकर रखा विकल्प खुला।
Lucknow: बहुजन समाज पार्टी (BSP) की प्रमुख और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने अपने परिवार की पार्टी में राजनीतिक भूमिका को लेकर बड़ा फैसला किया है। मायावती ने साफ कर दिया है कि उनके भाई आनंद कुमार के किसी भी बेटे को भविष्य में बसपा में राजनीतिक जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। उनके इस फैसले का सीधा असर उनके भतीजे आकाश आनंद पर पड़ता है, जिन्हें कभी बसपा के भविष्य के प्रमुख चेहरों में शामिल माना जाता था।
मायावती ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि आनंद कुमार के बेटों को बसपा में रहकर राजनीति करने का अवसर नहीं दिया जाएगा। उन्होंने इसे अपना अंतिम फैसला बताते हुए यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में उनके भतीजों के बच्चों को भी पार्टी की जिम्मेदारी नहीं सौंपी जाएगी।
1. वैसे तो बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) द्वारा पूरे देश भर में व ख़ासकर उत्तर प्रदेश में युवाओं को तरजीह देने की नीति के तहत जेन-जी को लगभग पचास प्रतिशत तक पार्टी संगठन में भागीदारी सुनिश्चित करने की प्रक्रिया काफी लम्बे समय से जारी है, किन्तु अब यूपी, उत्तराखण्ड एवं पंजाब…
— Mayawati (@Mayawati) September 12, 2026
भतीजों के लिए BSP के दरवाजे बंद
मायावती के बयान के मुताबिक, उनके भाई आनंद कुमार के किसी भी बेटे को अब बसपा में अहम राजनीतिक पद नहीं मिलेगा। इसका मतलब है कि आकाश आनंद और उनके भाई के लिए पार्टी में भविष्य की राजनीतिक जिम्मेदारियों का रास्ता बंद कर दिया गया है।
मायावती ने यह फैसला पार्टी में परिवारवाद के आरोपों और संगठन के भविष्य को ध्यान में रखते हुए लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि परिवार के किसी सदस्य को सिर्फ रिश्तेदारी के आधार पर पार्टी में राजनीतिक लाभ नहीं मिलना चाहिए।
भतीजी दीपिका आनंद के लिए खुला रास्ता
हालांकि, मायावती ने अपनी भतीजी दीपिका आनंद के लिए पार्टी में आने का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं किया है। दीपिका आनंद, आनंद कुमार की बेटी और आकाश आनंद की बहन हैं।
मायावती ने कहा कि यदि भविष्य में उन्हें अपनी मदद के लिए परिवार के किसी अन्य सदस्य की जरूरत पड़ती है तो आनंद कुमार अपनी इकलौती बेटी दीपिका आनंद को उनके साथ ला सकते हैं। उनकी ईमानदारी, वफादारी और कार्यक्षमता को देखते हुए उन्हें बसपा में अपनी जिम्मेदारी भी सौंपी जा सकती है।
फिलहाल दीपिका आनंद वकालत की पढ़ाई कर रही हैं। मायावती के बयान से संकेत मिलता है कि भविष्य में यदि दीपिका पार्टी की राजनीति में सक्रिय होती हैं और संगठन के लिए उपयुक्त पाई जाती हैं तो उन्हें जिम्मेदारी दी जा सकती है।
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आकाश आनंद को लेकर मायावती का स्पष्ट संदेश
मायावती के इस फैसले में सबसे अहम बात आकाश आनंद को लेकर है। एक समय आकाश आनंद को मायावती के राजनीतिक उत्तराधिकारी के तौर पर देखा गया था। लेकिन अब मायावती ने साफ कर दिया है कि उनके भाई आनंद कुमार के किसी भी बेटे को बसपा में जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी।
इस फैसले के बाद आकाश आनंद की बसपा में भविष्य की भूमिका को लेकर तस्वीर काफी हद तक स्पष्ट हो गई है। मायावती ने सिर्फ वर्तमान पीढ़ी के बेटों को ही नहीं, बल्कि भविष्य में उनके बच्चों को भी पार्टी की जिम्मेदारी देने से इनकार किया है।
आनंद कुमार के परिवार को नहीं मिलेगा राजनीतिक लाभ
मायावती ने कहा कि आनंद कुमार को उनके साथ रखने का उद्देश्य यह नहीं था कि उनके परिवार के दूसरे सदस्य भी इसका राजनीतिक लाभ उठाएं। उनके मुताबिक, अगर आनंद कुमार के परिवार के लोग भी इस व्यवस्था का लाभ उठाने लगते हैं तो यह बसपा और बहुजन आंदोलन के हित में नहीं होगा।
यही वजह है कि मायावती ने भविष्य के लिए परिवार के सदस्यों की राजनीतिक भूमिका को लेकर स्पष्ट सीमा तय करने का संकेत दिया है।
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दीपिका तैयार नहीं हुईं तो मिशनरी कार्यकर्ता को मौका
मायावती ने यह भी कहा कि अगर दीपिका आनंद पार्टी की जिम्मेदारी संभालने के लिए तैयार नहीं होती हैं तो बसपा के दलित वर्ग के किसी अन्य मिशनरी कार्यकर्ता को जिम्मेदारी दी जा सकती है।
इस बयान से यह संकेत मिलता है कि मायावती पार्टी की कमान और संगठनात्मक जिम्मेदारियों को केवल परिवार तक सीमित रखने के पक्ष में नहीं हैं। वह पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं को भी भविष्य में जिम्मेदारी देने का विकल्प खुला रखना चाहती हैं।
BSP के भविष्य की राजनीति के लिए अहम फैसला
मायावती का यह फैसला बसपा की भविष्य की राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खासकर आकाश आनंद और बसपा के रिश्ते तथा पार्टी में परिवार की भूमिका को लेकर अब मायावती ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है।
एक तरफ जहां भतीजों के लिए राजनीतिक जिम्मेदारी के दरवाजे बंद करने की बात कही गई है, वहीं दूसरी तरफ दीपिका आनंद के लिए संभावना खुली रखी गई है। ऐसे में आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि दीपिका आनंद राजनीति में सक्रिय होती हैं या मायावती किसी गैर-पारिवारिक, मिशनरी कार्यकर्ता को संगठन में बड़ी जिम्मेदारी सौंपती हैं।
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