
Rheumatoid Arthritis में योग का कमाल, शारीरिक ही नहीं मानसिक स्वास्थ्य भी होता है बेहतर…
International yoga day 2026: पूरी दुनिया आज 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 मना रही है। इस अवसर पर योग के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य लाभों को लेकर व्यापक जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि योग केवल फिटनेस का माध्यम नहीं है, बल्कि कई गंभीर और दीर्घकालिक बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए भी बेहद लाभकारी साबित हो सकता है। विशेष रूप से रूमेटॉइड आर्थराइटिस (Rheumatoid Arthritis) और फाइब्रोमायल्जिया जैसी बीमारियों में योग के सकारात्मक प्रभाव वैज्ञानिक अध्ययनों में सामने आए हैं।
योग की बढ़ती लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण यह है कि यह शरीर, मन और भावनाओं के बीच संतुलन स्थापित करने में मदद करता है। यही वजह है कि भारत ही नहीं, दुनिया के कई देशों में लाखों लोग अपनी दैनिक दिनचर्या में योग को शामिल कर रहे हैं।
क्या है रूमेटॉइड आर्थराइटिस?
रूमेटॉइड आर्थराइटिस एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से जोड़ों पर हमला करने लगती है। इससे जोड़ों में दर्द, सूजन, अकड़न और चलने-फिरने में परेशानी जैसी समस्याएं पैदा होती हैं। समय रहते उपचार न मिलने पर यह बीमारी व्यक्ति की दैनिक गतिविधियों को भी प्रभावित कर सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि दवाओं के साथ-साथ जीवनशैली में सुधार और नियमित योगाभ्यास इस बीमारी के प्रभाव को कम करने में सहायक हो सकता है।
योग पर क्या कहती है रिसर्च?
दिल्ली के All India Institute of Medical Sciences (एम्स) के रूमेटोलॉजी विभाग की प्रमुख Uma Kumar के अनुसार, विभिन्न शोधों में पाया गया है कि योग का असर रूमेटॉइड आर्थराइटिस और फाइब्रोमायल्जिया से पीड़ित मरीजों पर सकारात्मक रूप से देखा गया है।
अध्ययनों से संकेत मिले हैं कि नियमित योगाभ्यास से दर्द की तीव्रता कम हो सकती है, जोड़ों की कार्यक्षमता में सुधार हो सकता है और मरीजों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी अच्छा प्रभाव पड़ता है। योग तनाव और चिंता को कम करने में मदद करता है, जिससे बीमारी से जूझ रहे लोगों की जीवन गुणवत्ता बेहतर होती है।
मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद
विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक दर्द और बीमारी से जूझने वाले मरीजों में तनाव, अवसाद और चिंता जैसी समस्याएं आम होती हैं। योग में शामिल प्राणायाम, ध्यान और श्वास तकनीकें मानसिक शांति प्रदान करती हैं और तनाव हार्मोन को नियंत्रित करने में मदद करती हैं।
नियमित योगाभ्यास से नींद की गुणवत्ता में सुधार, आत्मविश्वास में वृद्धि और भावनात्मक संतुलन बनाए रखने में भी सहायता मिलती है।
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किन योग अभ्यासों से मिल सकता है लाभ?
विशेषज्ञों के अनुसार, रूमेटॉइड आर्थराइटिस के मरीजों को किसी प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ की देखरेख में हल्के और सुरक्षित योगासन करने चाहिए। इनमें शामिल हैं:
- ताड़ासन
- वृक्षासन
- भुजंगासन
- मार्जरी-व्याघ्रासन
- शवासन
- अनुलोम-विलोम प्राणायाम
- गहरी श्वास संबंधी अभ्यास
हालांकि किसी भी नए योग कार्यक्रम को शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना आवश्यक है।
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योग दिवस का संदेश: स्वस्थ शरीर, शांत मन
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का उद्देश्य लोगों को योग के प्रति जागरूक करना और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि योग को नियमित दिनचर्या का हिस्सा बनाया जाए तो यह न केवल शारीरिक फिटनेस बढ़ाता है, बल्कि मानसिक संतुलन, आत्मनियंत्रण और समग्र स्वास्थ्य को भी मजबूत बनाता है।
रूमेटॉइड आर्थराइटिस जैसे रोगों से जूझ रहे लोगों के लिए योग एक सहायक चिकित्सा पद्धति के रूप में उभर रहा है, जो दवाओं के साथ मिलकर बेहतर जीवन जीने में मदद कर सकता है।
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