
गो संरक्षण पर बड़ा अभियान… 12 मार्च को राजधानी में संतों का शक्ति प्रदर्शन
Swami Avimukteshwaranand: जगद्गुरु शंकराचार्य परंपरा से जुड़े संत स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने देशभर में गो संरक्षण को लेकर बड़ा अभियान शुरू करने की घोषणा की है। उन्होंने कहा है कि 7 मार्च से यात्रा प्रारंभ होगी और 12 मार्च को लखनऊ में ‘गो प्रतिष्ठा धर्म युद्ध’ का शंखनाद किया जाएगा। इस कार्यक्रम का उद्देश्य गो माता को राज्य माता घोषित करने और बीफ निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग को राष्ट्रीय स्तर पर उठाना है।
7 मार्च से शुरू होगी यात्रा
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने बताया कि यह यात्रा धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक जागरूकता का अभियान होगी। 7 मार्च से शुरू होकर विभिन्न जिलों और शहरों से गुजरते हुए यह यात्रा 12 मार्च को लखनऊ पहुंचेगी। यात्रा के दौरान संत, गौ-सेवक और बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन में सभी सनातन धर्मावलंबियों को जोड़ा जाएगा।
12 मार्च को लखनऊ में बड़ा आयोजन
12 मार्च को राजधानी लखनऊ में विशाल धर्मसभा आयोजित की जाएगी। इसमें देशभर से संत-महात्मा, धार्मिक संगठन और गौ-रक्षा से जुड़े कार्यकर्ता शामिल होंगे। इसी मंच से ‘गो प्रतिष्ठा धर्म युद्ध’ का औपचारिक ऐलान किया जाएगा। आयोजकों का दावा है कि यह कार्यक्रम देशव्यापी आंदोलन का रूप ले सकता है।
प्रमुख मांगें क्या हैं
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इस अभियान के तहत कई मांगें रखी हैं—
- गो माता को राज्य माता का दर्जा दिया जाए।
- बीफ निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।
- गोवंश संरक्षण के लिए सख्त कानून बनाए जाएं।
- गौशालाओं को सरकारी सहायता और संरक्षण दिया जाए।
उन्होंने कहा कि गाय भारतीय संस्कृति और आस्था का केंद्र है, इसलिए उसके संरक्षण के लिए सरकार और समाज दोनों को आगे आना होगा।
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सरकार और समाज से अपील
स्वामी ने केंद्र और राज्य सरकारों से इस विषय पर ठोस कदम उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह केवल धार्मिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक और आर्थिक मुद्दा भी है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में गाय की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, इसलिए इसके संरक्षण से किसानों और पशुपालकों को भी लाभ मिलेगा।
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देशव्यापी आंदोलन की तैयारी
संतों ने संकेत दिए हैं कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। कई राज्यों में धरना, प्रदर्शन और जनजागरण कार्यक्रम चलाए जाएंगे।
इस घोषणा के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि आगामी दिनों में यह मुद्दा राष्ट्रीय बहस का विषय बन सकता है।
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