NDA में उपेंद्र कुशवाहा के साथ खेला! बेटे दीपक का निर्विरोध चुनाव अटका…

Bihar MLC Election: उपेंद्र कुशवाहा और NDA के बीच चल रहे राजनीतिक समीकरणों को लेकर बिहार की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, बिहार सरकार में पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश का निर्विरोध विधान परिषद सदस्य (MLC) बनना अब लगभग मुश्किल माना जा रहा है।

बताया जा रहा है कि NDA की जिस सीट से निर्विरोध चुनाव की संभावना थी, वह अब Lok Janshakti Party (Ram Vilas) के खाते में चली गई है। पार्टी प्रमुख Chirag Paswan ने इस सीट पर अपने करीबी नेता अशरफ अंसारी को उम्मीदवार बनाने का फैसला किया है और पार्टी ने इसकी औपचारिक घोषणा भी कर दी है।

‘विलय नहीं करने’ की सियासी कीमत?
NDA सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि भाजपा नेतृत्व उपेंद्र कुशवाहा से नाराज है। चर्चा है कि भाजपा में विलय को लेकर लंबे समय तक चली बातचीत के बावजूद कुशवाहा ने अंतिम समय में दूरी बना ली। इसे गठबंधन के भीतर असहज स्थिति के रूप में देखा गया।

सूत्रों का कहना है कि इसी वजह से दीपक प्रकाश के निर्विरोध MLC बनने का रास्ता बंद कर दिया गया। अब उन्हें 10वीं सीट पर चुनावी मुकाबले में उतरना पड़ सकता है। हालांकि इस पूरे मामले पर भाजपा या उपेंद्र कुशवाहा की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

अब 10वीं सीट पर लड़ना पड़ सकता है चुनाव
सूत्रों के अनुसार, यदि वर्तमान समीकरण कायम रहे तो दीपक प्रकाश को अब 10वीं सीट पर चुनाव लड़ना पड़ सकता है। यानी उनका निर्विरोध विधान परिषद पहुंचना लगभग मुश्किल माना जा रहा है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि ऐसा होता है तो यह केवल एक चुनावी बदलाव नहीं होगा, बल्कि NDA के भीतर शक्ति संतुलन में बदलाव का संकेत भी माना जाएगा।

चिराग पासवान की बढ़ती अहमियत
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा Chirag Paswan की बढ़ती राजनीतिक ताकत को लेकर हो रही है। हाल के समय में NDA के भीतर चिराग पासवान की भूमिका लगातार मजबूत हुई है।

अशरफ अंसारी को सीट दिए जाने को राजनीतिक विशेषज्ञ चिराग के बढ़ते प्रभाव से जोड़कर देख रहे हैं। माना जा रहा है कि भाजपा आगामी चुनावों को देखते हुए लोजपा (रामविलास) को गठबंधन में मजबूत बनाए रखना चाहती है।

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बिहार की राजनीति में बदलते संकेत
विश्लेषकों का कहना है कि विधान परिषद चुनाव भले सीमित दायरे का चुनाव हो, लेकिन इसके जरिए NDA के अंदरूनी समीकरण साफ दिखाई दे रहे हैं। भाजपा जहां सहयोगियों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है, वहीं छोटे दल अपनी राजनीतिक उपयोगिता साबित करने में जुटे हैं।

उपेंद्र कुशवाहा के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि वे लंबे समय से बिहार की राजनीति में OBC नेतृत्व के बड़े चेहरे के रूप में अपनी जगह बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।

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आने वाले चुनावों पर पड़ेगा असर?
राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि यह विवाद केवल MLC चुनाव तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में NDA के भीतर सीट शेयरिंग, नेतृत्व और प्रभाव को लेकर इसी तरह की खींचतान और तेज हो सकती है।

ऐसे में दीपक प्रकाश की उम्मीदवारी को लेकर बना यह सस्पेंस बिहार की राजनीति में आने वाले बड़े बदलावों का संकेत माना जा रहा है।

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