तृणमूल संकट से INDIA गठबंधन पर खतरा, बीजेपी को दिख रहा बड़ा मौका…

INDIA Alliance: पश्चिम बंगाल में चुनावी झटके के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बगावत की खबरों ने सियासी हलचल तेज कर दी है। पहले विधायक दल में टूट की चर्चाएं हुईं और अब पार्टी के सांसदों में भी असंतोष खुलकर सामने आने की बातें कही जा रही हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि तृणमूल कांग्रेस के 28 में से करीब 20 सांसद अलग गुट बनाकर लोकसभा में अलग बैठने की मांग कर सकते हैं। इतना ही नहीं, यह गुट खुद को “असली तृणमूल कांग्रेस” घोषित करने की तैयारी में भी बताया जा रहा है।

अगर ऐसा होता है तो इसका सीधा असर सिर्फ बंगाल की राजनीति पर ही नहीं, बल्कि केंद्र की राजनीति और संसद के समीकरणों पर भी पड़ सकता है। खासतौर पर बीजेपी और एनडीए के लिए यह घटनाक्रम बेहद अहम माना जा रहा है।

INDIA गठबंधन के लिए बढ़ी मुश्किलें
तृणमूल कांग्रेस INDIA गठबंधन की प्रमुख सहयोगी पार्टियों में रही है। लेकिन बंगाल चुनाव के बाद पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष ने विपक्षी गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर टीएमसी में बड़ी टूट होती है तो इसका असर विपक्षी राजनीति पर व्यापक रूप से देखने को मिल सकता है। पहले ही डीएमके के INDIA गठबंधन से दूरी बनाने की चर्चाओं ने विपक्ष को कमजोर किया है, ऐसे में टीएमसी में संभावित बगावत विपक्ष के लिए बड़ा झटका साबित हो सकती है।

बीजेपी को कैसे हो सकता है फायदा?
दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि संसद के आगामी मानसून सत्र में केंद्र सरकार कई बड़े और संवेदनशील विधेयक ला सकती है। इनमें महिला आरक्षण, परिसीमन (Delimitation) और “एक देश-एक चुनाव” जैसे संविधान संशोधन बिल शामिल बताए जा रहे हैं।

संविधान संशोधन बिलों को पारित कराने के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। पिछली बार जब महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा हुई थी, तब सरकार आवश्यक संख्या जुटाने में मुश्किल में दिखी थी और बिल पर्याप्त समर्थन नहीं जुटा पाया था।

लेकिन अब राजनीतिक परिस्थितियां बदल चुकी हैं। अगर टीएमसी के सांसदों में टूट होती है या कुछ सांसद सरकार के पक्ष में आते हैं, तो एनडीए को संसद में अपनी ताकत बढ़ाने का मौका मिल सकता है।

क्या मानसून सत्र में बड़ा दांव खेलेगी सरकार?
सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार मानसून सत्र को लेकर रणनीतिक तैयारी कर रही है। बीजेपी चाहती है कि लंबे समय से लंबित बड़े राजनीतिक और संवैधानिक मुद्दों पर अब निर्णायक कदम उठाया जाए।

महिला आरक्षण बिल को लेकर सरकार पहले ही अपनी प्रतिबद्धता जाहिर कर चुकी है। वहीं परिसीमन और “वन नेशन वन इलेक्शन” जैसे मुद्दे बीजेपी के बड़े राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा माने जाते हैं।

ऐसे में अगर विपक्ष कमजोर होता है और कुछ दलों या सांसदों का समर्थन सरकार को मिलता है, तो बीजेपी इन बिलों को आगे बढ़ाने की कोशिश कर सकती है।

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क्या है TMC में असंतोष की वजह ?
राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि बंगाल चुनाव में खराब प्रदर्शन के बाद टीएमसी के भीतर नेतृत्व और संगठन को लेकर असंतोष बढ़ा है। कुछ नेताओं का मानना है कि पार्टी में फैसले सीमित लोगों तक केंद्रित हो गए हैं, जिससे कई सांसद और विधायक खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।

हालांकि तृणमूल कांग्रेस की ओर से अभी तक किसी बड़े विभाजन की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। पार्टी नेतृत्व लगातार स्थिति को संभालने की कोशिश में जुटा हुआ है।

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आने वाले दिनों में और बढ़ सकती है सियासी हलचल
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले कुछ सप्ताह देश की राजनीति के लिए बेहद अहम हो सकते हैं। अगर टीएमसी में टूट होती है और विपक्षी दलों के बीच दूरी बढ़ती है, तो संसद में सत्ता पक्ष की स्थिति और मजबूत हो सकती है।

वहीं विपक्ष के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी एकजुटता बनाए रखने की होगी। मानसून सत्र से पहले बदलते राजनीतिक समीकरण अब राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।

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