
रूस इलेक्शन: पुतिन की पार्टी जीत की ओर, विरोधियों ने लगाए धांधली के आरोप
Russia Election 2026: रूस में तीन दिनों तक चले संसदीय चुनावों (State Duma Elections) के नतीजे और शुरुआती रुझान सामने आने लगे हैं। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सत्तारूढ़ पार्टी ‘यूनाइटेड रशिया‘ (United Russia) एक बार फिर संसद में अपना दबदबा कायम रखने में पूरी तरह सफल नजर आ रही है।
केंद्रीय चुनाव आयोग और एग्जिट पोल के आंकड़ों के अनुसार, यूनाइटेड रशिया भारी मत प्रतिशत के साथ जीत की ओर बढ़ रही है, जिससे संसद के निचले सदन में पुतिन का पूर्ण नियंत्रण बरकरार रहेगा।
शुरुआती रुझानों में पुतिन की पार्टी आगे
तीन दिनों तक चले मतदान प्रक्रिया के समापन के बाद आए शुरुआती रुझानों में ‘यूनाइटेड रशिया’ को करीब 49.4 प्रतिशत से अधिक वोट मिलने का अनुमान जताया गया है। वहीं, कम्युनिस्ट पार्टी दूसरे स्थान पर है जिसे लगभग 14.2 प्रतिशत वोट मिलने की संभावना है। इसके अतिरिक्त, लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ रूस (LDPR) को करीब 10.7 प्रतिशत वोट मिलते दिखाई दे रहे हैं। चुनाव आयोग के अनुसार, इस बार देश भर में लगभग 56.66 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया है।
450 सीटों के लिए हुआ मतदान
रूस के 450 सदस्यों वाले निचले सदन ‘स्टेट ड्यूमा’ के लिए मतदान तीन दिनों शुक्रवार से रविवार तक आयोजित किया गया था। इस बार 11.1 करोड़ से अधिक मतदाताओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए ऑनलाइन यानी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग को भी बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया गया। मतदाताओं ने दो अलग-अलग बैलेट पर अपने मताधिकार का प्रयोग किया, जिसमें आधी सीटों का फैसला पार्टी लिस्ट सिस्टम से और बाकी आधी सीटों का चयन सिंगल-सीट निर्वाचन क्षेत्रों के व्यक्तिगत उम्मीदवारों के माध्यम से हुआ।
ये भी पढ़े- Yemen जंग का नया मोड़! सऊदी अरब में ‘दुश्मन हवाई खतरे’ का अलर्ट, हूती हमलों पर UNSC सख्त
विपक्षी दलों ने लगाए धांधली के आरोप
चुनाव प्रक्रिया संपन्न होने के साथ ही विपक्षी दलों ने कई गंभीर सवाल उठाए हैं। ‘याब्लोको’ और कम्युनिस्ट पार्टी ने आरोप लगाया कि उनके कई पोलिंग एजेंटों व पर्यवेक्षकों को मतदान केंद्रों के अंदर जाने से रोका गया। इसके अलावा, सीलबंद बैलेट बॉक्स को समय से पहले खोलने और रात में पोलिंग बूथों को सुरक्षित न रखने की शिकायतें दर्ज की गई हैं।
कई इलाकों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए गए, हालांकि चुनाव अधिकारियों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए मॉस्को की ऑनलाइन वोटिंग सिस्टम पर साइबर हमलों की बात स्वीकार की है।
ये भी पढ़े- H-1B visa पर ट्रंप ने डॉलर शुल्क बढ़ाया, जांच भी सख्त
पुतिन के मजबूत विधायी नियंत्रण पर मुहर
संसदीय चुनाव के इन नतीजों से साफ है कि व्लादिमीर पुतिन का देश के राजनीतिक और विधायी ढांचे पर नियंत्रण और मजबूत हुआ है। संसद में ‘यूनाइटेड रशिया’ की मजबूत बहुमत से सरकार को अपनी नीतियों और प्रस्तावों को बिना किसी बड़े विरोध के पास कराने में सहूलियत मिलेगी। ‘सिस्टमेटिक विपक्ष’ के रूप में संसद में पहुंचने वाली अन्य छोटी पार्टियां भी अधिकांश प्रमुख राष्ट्रीय मुद्दों पर पुतिन की नीतियों का समर्थन करती रही हैं।
ये भी पढ़े- भारतीयों को AI से लाभान्वित करना अतिआवश्यक:Microsoft CEO





