Trump के लिए बड़ी राहत? G7 ने 10 करोड़ बैरल तेल-डीजल जारी करने पर जताई सहमति

US: दुनिया में बढ़ती ईंधन कीमतों और डीजल की आपूर्ति पर दबाव के बीच G7 देशों ने बड़ा फैसला लिया है। G7 देशों ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के माध्यम से अपने रणनीतिक भंडार से करीब 10 करोड़ बैरल तेल और ईंधन उत्पाद जारी करने पर सहमति जताई है। यह प्रक्रिया तत्काल शुरू होगी और करीब चार महीने तक चलेगी। योजना के तहत पहले 20 दिनों में बड़ी मात्रा में डीजल बाजार में उतारा जाएगा।

ईंधन की कीमतों पर काबू पाने की कोशिश
G7 का यह फैसला ऐसे समय आया है जब वैश्विक ऊर्जा बाजार में आपूर्ति को लेकर दबाव बढ़ा हुआ है। खासतौर पर डीजल बाजार में सप्लाई की स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। IEA के कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल ने G7 नेताओं की बैठक में बताया कि होर्मुज संकट के असर और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की सीमित आपूर्ति के कारण डीजल बाजार पर दबाव बना हुआ है।

G7 के बयान के मुताबिक रणनीतिक भंडार से जारी होने वाले 10 करोड़ बैरल को चार महीनों में बाजार तक पहुंचाया जाएगा। इसमें शुरुआती 20 दिनों में डीजल की बड़ी मात्रा जारी करने को प्राथमिकता दी जाएगी।

ट्रंप ने फैसले का किया स्वागत
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने G7 के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि यूरोप अपने बड़े डीजल भंडार का एक बड़ा हिस्सा जारी करने पर सहमत हुआ है और इसकी प्रक्रिया तत्काल शुरू होगी। यह फैसला अमेरिका में ईंधन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के बीच आया है।

अमेरिका में डीजल की औसत कीमत 22 सितंबर को रिकॉर्ड 6.52 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई थी। शुक्रवार को यह औसत कीमत 6.37 डॉलर प्रति गैलन रही।

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मैक्रों ने की G7 बैठक की अध्यक्षता
G7 की वीडियो कॉन्फ्रेंस बैठक की अध्यक्षता फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने की। फ्रांस के पास इस वर्ष G7 की अध्यक्षता है। बैठक में ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक ईंधन बाजार में स्थिरता पर चर्चा हुई।

G7 देशों ने ऊर्जा और ऊर्जा उत्पादों पर आपसी निर्यात प्रतिबंध नहीं लगाने की प्रतिबद्धता भी दोहराई है। IEA को इस योजना के असर की निगरानी करने और आगे की जरूरतों को लेकर रिपोर्ट देने की जिम्मेदारी दी गई है।

तेल बाजार पर दिखा असर
G7 के ऐलान के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। रिपोर्टों के अनुसार ब्रेंट क्रूड और अमेरिकी WTI दोनों में गिरावट आई। बाजार में यह उम्मीद बनी कि रणनीतिक भंडार से अतिरिक्त आपूर्ति आने से निकट अवधि में ईंधन की उपलब्धता पर दबाव कुछ कम हो सकता है।

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ईरान और रूस-यूक्रेन युद्ध का भी असर
IEA के मुताबिक ऊर्जा बाजार पर मध्य-पूर्व में होर्मुज संकट का असर अभी भी बना हुआ है। वहीं रिफाइंड उत्पादों की आपूर्ति पर रूस की रिफाइनरियों पर हुए हमलों का भी प्रभाव पड़ा है। इन घटनाक्रमों ने डीजल की वैश्विक आपूर्ति को प्रभावित किया है।

G7 का कहना है कि वह ऊर्जा बाजार की स्थिति पर नजर रखेगा और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त डीजल जारी करने के विकल्प पर भी चर्चा करेगा।

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