
राष्ट्रीय पुस्तक मेले में ‘स्पार्क’ की गूंज, अपर्णा यादव ने किया कहानी संग्रह का विमोचन
National Pustak Mela: राष्ट्रीय पुस्तक मेले में ‘स्पार्क’ का विमोचन, अपर्णा यादव बोलीं- जीवन में छोटी-सी चिंगारी भी बड़े बदलाव की वजह बन सकती है
Lucknow: लखनऊ में आयोजित राष्ट्रीय पुस्तक मेले में लेखिका डॉ. शिल्पी बख्शी शुक्ला के कहानी संग्रह ‘स्पार्क’ का विमोचन किया गया। उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने पुस्तक का विमोचन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पद्मश्री डॉ. अनिल रस्तोगी ने की। समारोह में साहित्यकारों, पत्रकारों और पुस्तकप्रेमियों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया।
‘स्पार्क’ की कहानियां जीवन के अलग-अलग रंग दिखाती हैं
पुस्तक के विमोचन के अवसर पर अपर्णा यादव ने कहा कि जिंदगी में उत्साह, संवेदना और सकारात्मक सोच की एक छोटी-सी चिंगारी भी बड़े बदलाव का कारण बन सकती है। उन्होंने कहा कि ‘स्पार्क’ की कहानियां जीवन के विभिन्न रंगों को सामने लाती हैं और पाठकों को सोचने के लिए प्रेरित करती हैं।
अपर्णा यादव ने यह भी कहा कि संग्रह की कुछ कहानियों ने उनके मन को गहराई से प्रभावित किया।
साहित्य समाज को नई दृष्टि देता है
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पद्मश्री डॉ. अनिल रस्तोगी ने कहा कि लेखन साहित्य के अनंत सागर की यात्रा है। रचनाकार अपने अनुभवों और संवेदनाओं को शब्दों के माध्यम से समाज के सामने रखता है और यही साहित्य की सबसे बड़ी ताकत है।
विशिष्ट अतिथि साहित्यकार डॉ. मनीष शुक्ल ने कहा कि लेखक अपनी कलम के माध्यम से समाज में ‘स्पार्क’ पैदा करता है। रचनाएं विचारों को जन्म देती हैं और पाठकों को नई दृष्टि प्रदान करती हैं।
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डिजिटल दौर में भी किताबों का महत्व बरकरार
उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष के मीडिया सलाहकार एवं वरिष्ठ पत्रकार श्रीधर अग्निहोत्री ने कहा कि पुस्तकें सिर्फ ज्ञान हासिल करने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि समाज और जीवन को समझने की खिड़की भी हैं।
उन्होंने नई पीढ़ी से नियमित रूप से किताबें पढ़ने और साहित्य से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यमों का प्रभाव बढ़ने के बावजूद पुस्तकों का महत्व कम नहीं हुआ है। गंभीर और स्थायी ज्ञान के लिए पुस्तकों की भूमिका आज भी महत्वपूर्ण है।
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लेखिका ने किया कहानियों का पाठ
कार्यक्रम के दौरान लेखिका डॉ. शिल्पी बख्शी शुक्ला ने अपने कहानी संग्रह की दो कहानियों का पाठ भी किया। उनकी कहानियों को उपस्थित साहित्यप्रेमियों ने सराहा।
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान की प्रधान संपादक डॉ. अमिता दुबे, उत्तर प्रदेश विधान परिषद के प्रमुख सचिव राजेश सिंह, नीरज श्रीवास्तव और अलका प्रमोद ने भी अपने विचार रखे।
कार्यक्रम का संचालन जरीन अंसारी ने किया। इस मौके पर बड़ी संख्या में साहित्यकार, पत्रकार और पुस्तकप्रेमी मौजूद रहे।
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