ऐन कार्सन को मिला साहित्य का नोबेल पुरस्कार, पारंपरिक सीमाओं से परे है उनका लेखन

Literature Nobel 2026: वर्ष 2026 का प्रतिष्ठित साहित्य का नोबेल पुरस्कार (Literature Nobel Prize) कनाडाई कवयित्री, प्राचीन यूनानी साहित्य की विद्वान, निबंधकार और अनुवादक ऐन कार्सन (Anne Carson) को प्रदान किया गया है। पिछले चार दशकों से अधिक समय से लेखन में सक्रिय 76 वर्षीय कार्सन ने अपने समय की दुनिया को समझने के लिए हमेशा अतीत और प्राचीन यूनान के साहित्य का सहारा लिया है।

नोबेल समिति ने उनके प्रयोगधर्मी लेखन को मान्यता देते हुए कहा है कि उन्होंने अपनी साहसी रचनाओं के जरिए प्राचीन साहित्यिक परंपरा से रचनात्मक संवाद किया और समकालीन साहित्य के लिए नए रूप गढ़े हैं।

यूनानी भाषा से शुरू हुआ सफर

कनाडा के टोरंटो में जून 1950 में जन्मीं ऐन कार्सन का बचपन कई शहरों में बीता, जिसके कारण उन्हें बार-बार स्कूल बदलने पड़े। हालांकि, पोर्ट होप हाई स्कूल में लैटिन पढ़ाने वाली शिक्षिका एलिस कोवान से मिलने के बाद उनके जीवन की दिशा पूरी तरह बदल गई। युवावस्था में खुद को ऑस्कर वाइल्ड से प्रेरित मानने वाली कार्सन ने सोचा कि यदि वह यूनानी भाषा सीख लें, तो उनके जैसी बन सकती हैं।

यहीं से दोपहर के भोजन के समय यूनानी भाषा सीखने का उनका सिलसिला शुरू हुआ, जिसने उन्हें प्राचीन यूनानी साहित्य की दुनिया में पहुंचा दिया। आगे चलकर उन्होंने टोरंटो विश्वविद्यालय से प्राचीन साहित्य का अध्ययन किया और 1981 में प्राचीन यूनानी कवयित्री ‘सैफो’ पर अपनी डॉक्टरेट की शोध पूरी की।

किताबों ने बदले साहित्य के पारंपरिक नियम

ऐन कार्सन की पहली किताब ‘इरोस द बिटरस्वीट’ 1986 में प्रकाशित हुई, जिसमें प्राचीन साहित्य के नजरिए से प्रेम और मानवीय इच्छाओं को गहराई से समझने की कोशिश की गई थी।

इसके बाद 1998 में प्रकाशित उनके पद्य-उपन्यास ‘ऑटोबायोग्राफी ऑफ रेड’ ने उन्हें एक मौलिक साहित्यिक आवाज के रूप में स्थापित कर दिया।

इस कृति में उन्होंने प्राचीन यूनानी मिथक के राक्षस गेरियोन की कहानी को एक संवेदनशील किशोर के रूप में नए ढंग से ढाला।

इसके अलावा 2001 में आई उनकी किताब ‘द ब्यूटी ऑफ द हसबैंड’ के लिए उन्हें प्रतिष्ठित टी. एस. एलियट पुरस्कार से सम्मानित किया गया और वह यह पुरस्कार जीतने वाली पहली महिला बनीं।

भाई की याद में लिखी अनूठी कृति

ऐन कार्सन की रचनाओं में प्रयोगधर्मिता की पराकाष्ठा उनकी किताब ‘नॉक्स’ (Nox) में दिखाई देती है, जिसे उन्होंने अपने भाई माइकल की मृत्यु के बाद लिखा था। इस किताब का रूप बेहद अनोखा है, जो किसी अकॉर्डियन की तरह खुलती और मुड़ती है। इसमें तस्वीरें, पत्र, अनुवाद, अधूरे अंश और हाथ से सामग्री शामिल है।

यह रचना न केवल किसी अपने को खोने के दुख को बयां करती है, बल्कि इस बात पर भी विचार करती है कि भाषा के सहारे किसी दूसरे व्यक्ति की यादों को किस हद तक सहेजकर रखा जा सकता है।

उनकी हालिया कृति ‘रॉन्ग नॉर्मा’ को भी समीक्षकों ने खूब सराहा है। ऐन कार्सन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वह कविता, कथा, आलोचना और संस्मरण के बीच की पारंपरिक दीवारों को गिराते हुए साहित्य को एक नया और जीवंत आयाम देती हैं।

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