
जेवर एयरपोर्ट अब ‘नरेंद्र मोदी जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ के नाम से जाना जाएगा
Yogi Cabinet ने 39 प्रस्तावों पर लगाई मुहर
Jewar Narendra Modi International Airport: उत्तर प्रदेश सरकार ने घोषणा की है की Jewar Airport अब Narendra Modi International Airport Noida-Jewar के नाम से जाना जाएगा। सीएम योगी ने कहा, जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के बनने से राज्य एयर कनेक्टिविटी के मामले में नई ऊंचाइयां छू रहा है। दादरी में ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर को जोड़ने वाला एक बड़ा जंक्शन बनाया गया है, और इस कॉरिडोर का 1,050 किलोमीटर से ज़्यादा हिस्सा राज्य से होकर गुजरता है। वाराणसी में नेशनल वॉटरवे-1 पर भारत का पहला मल्टी-मॉडल इनलैंड पोर्ट टर्मिनल और 100 एकड़ में फैला देश का पहला फ्रेट विलेज बनाया गया है।
मोदी के जनसेवा के 25 वर्ष पूरे होने पर कैबिनेट में अभिनंदन प्रस्ताव पारित
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में एयरपोर्ट का नाम ‘नरेंद्र मोदी जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। बैठक के बाद सीएम योगी ने इसकी जानकारी देते हुए प्रधानमंत्री के 25 वर्ष के जनसेवा कालखंड को देश और प्रदेश के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया। कैबिनेट ने इस दौरान कुल 39 प्रस्तावों पर मुहर लगाई। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जनसेवा के 25 वर्ष पूरे होने पर प्रदेश कैबिनेट ने उनके योगदान का अभिनंदन करते हुए यह प्रस्ताव पारित किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का उत्तर प्रदेश से आत्मीय संबंध है और उनके नेतृत्व में प्रदेश विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है। मुख्यमंत्री के साथ उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक सहित सहयोगी दलों के नेता भी मौजूद रहे।
सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने सेवा, समर्पण और राष्ट्र निर्माण को अपना ध्येय बनाया है। उनके नेतृत्व में भारत की वैश्विक पहचान मजबूत हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को 500 वर्षों के इंतजार की समाप्ति से जोड़ते हुए कहा कि काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का निर्माण और विदेश से मां अन्नपूर्णा की प्रतिमा वापस लाकर स्थापित कराना भी प्रधानमंत्री के प्रयासों के महत्वपूर्ण उदाहरण हैं।
वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में बुनियादी सुविधाओं का अभाव था, लेकिन अब एक्सप्रेसवे, हाईवे, मेट्रो और क्षेत्रीय रैपिड ट्रांजिट सिस्टम जैसी परियोजनाओं से कनेक्टिविटी बेहतर हुई है। जेवर एयरपोर्ट के विकास से उत्तर प्रदेश की हवाई संपर्क व्यवस्था और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 मार्च 2026 को एयरपोर्ट के पहले चरण का उद्घाटन किया था। परियोजना के पहले चरण में करीब 11 हजार करोड़ रुपये की लागत से 3,300 एकड़ क्षेत्र में टर्मिनल और रनवे विकसित किए गए हैं। इसकी शुरुआती यात्री क्षमता सालाना लगभग 1.2 करोड़ बताई गई है। सभी चार चरण पूरे होने पर इसे एशिया के सबसे बड़े हवाई अड्डों में शामिल करने की योजना है।
राशन कार्डधारकों को मुफ्त खाद्यान्न दिया जा रहा
मुख्यमंत्री ने प्रदेश में औद्योगिक विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि लखनऊ में ब्रह्मोस मिसाइल निर्माण इकाई और पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क जैसी परियोजनाएं निवेश तथा रोजगार के नए अवसर पैदा कर सकती हैं। बेहतर सड़क और हवाई संपर्क से उत्तर प्रदेश लॉजिस्टिक हब के रूप में भी अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। इस बीच, ऊर्जा एवं नगर विकास मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने बताया कि नगरीय परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए 18 नगर निगम क्षेत्रों में 1,725 नई इलेक्ट्रिक बसें चलाई जाएंगी। बस खरीद के लिए निर्धारित नीति के तहत टेंडर में सबसे कम दर देने वाली कंपनी से 50 प्रतिशत बसें खरीदी जाएंगी, जबकि बाकी बसें उत्तर प्रदेश में बसों का निर्माण करने वाली कंपनियों से ली जाएंगी।
मुख्यमंत्री ने गरीबों, किसानों, महिलाओं और वंचित वर्गों के लिए संचालित योजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 65 लाख से अधिक प्रधानमंत्री आवास उपलब्ध कराए गए हैं और 3.67 करोड़ राशन कार्डधारकों को मुफ्त खाद्यान्न दिया जा रहा है।
UP में वर्ल्ड-क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर व कनेक्टिविटी का नया मॉडल
उत्तर प्रदेश वर्ल्ड-क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी के एक नए मॉडल के तौर पर उभरा है। राज्य में 42 नेशनल हाईवे बनाए गए हैं, जिनकी कुल लंबाई 1,483 किलोमीटर है और जिन पर लगभग 60,000 करोड़ का खर्च आया है। रेल, मेट्रो और रीजनल रैपिड ट्रांजिट सेक्टर में देश की पहली हाई-स्पीड आरआरटीएस दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ ‘नमो भारत’ ट्रेन ने सफलतापूर्वक काम करना शुरू कर दिया है। इसे ₹30,000 करोड़ से ज्यादा की लागत से बनाया गया है। साथ ही, लखनऊ, कानपुर, आगरा, मेरठ, गाजियाबाद और नोएडा-ग्रेटर नोएडा इलाके में मेट्रो रेल नेटवर्क का भी काफी विस्तार किया गया है। इसके अलावा, राज्य ‘उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर’ (जिसमें लखनऊ में ब्रह्मोस मिसाइल असेंबली यूनिट शामिल है) और 1,000 एकड़ में बन रहे ‘पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क’ के ज़रिए एक इंडस्ट्रियल क्रांति की अगुवाई कर रहा है।
उत्तर प्रदेश के 18 शहरों में सार्वजनिक परिवहन की सुविधा बढ़ाने के लिए योगी सरकार 1725 वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसों का संचालन कराएगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में इसके प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज, अयोध्या, गोरखपुर और आगरा समेत 18 शहरों में इन बसों का संचालन होगा। नोएडा के साथ जेवर को भी योजना में शामिल किया गया है। सरकार ने बसों के संचालन के लिए ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट (जीसीसी) मॉडल अपनाने का निर्णय लिया है। इसके तहत बसों की खरीद निजी ऑपरेटर करेंगे, जबकि यात्रियों का किराया राज्य सरकार तय करेगी।
कैबिनेट के निर्णय के अनुसार, कुल 1725 वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसों का संचालन निजी ऑपरेटरों के माध्यम से कराया जाएगा। इसके लिए वाणिज्यिक संचालन शुरू होने की तिथि से 12 वर्ष का अनुबंध होगा। निजी सेवा प्रदाताओं को प्रोत्साहित करने के लिए बसों की खरीद पर सरकारी अनुदान भी दिया जाएगा।
प्रत्येक बस पर 35 से 40 लाख रुपये का अनुदान
योजना के तहत 12 मीटर लंबी प्रत्येक इलेक्ट्रिक बस पर 40 लाख रुपये और नौ मीटर लंबी बस पर 35 लाख रुपये का अनुदान दिया जाएगा। निजी ऑपरेटरों को पूर्व निर्धारित प्रदर्शन मानकों के आधार पर संचालन एवं रखरखाव शुल्क का भुगतान किया जाएगा। सरकार ने बसों के संचालन के साथ वित्तीय व्यवस्था भी तय कर दी है।
बसों की खरीद से रखरखाव तक ऑपरेटर की जिम्मेदारी
ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट मॉडल के तहत बसों की खरीद, चार्जिंग के लिए आवश्यक उपकरणों की व्यवस्था, चालकों और तकनीकी कर्मचारियों की तैनाती निजी ऑपरेटर करेंगे। बसों का नियमित संचालन और रखरखाव भी उन्हीं के जिम्मे होगा। यात्रियों से लिया जाने वाला किराया राज्य सरकार निर्धारित करेगी।
डिपो निर्माण के लिए निशुल्क मिलेगी भूमि
इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के लिए डिपो निर्माण हेतु आवश्यकतानुसार संबंधित नगर निगम और नोएडा प्राधिकरण निशुल्क भूमि उपलब्ध कराएंगे। नगरीय परिवहन निदेशालय सिटी बस सेवाओं से संबंधित योजनाओं के क्रियान्वयन और निगरानी का कार्य करता है।
अभी 15 नगर निगमों में चल रही हैं 743 इलेक्ट्रिक बसें
प्रदेश में वर्तमान में 15 नगर निगमों में 743 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जा रहा है। इनमें 700 बसें ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट मॉडल पर चल रही हैं। अब सरकार ने नगरीय परिवहन सेवाओं का विस्तार करते हुए 18 शहरों में 1725 वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसों के संचालन का निर्णय लिया है।
इन 18 शहरों में चलेंगी इलेक्ट्रिक बसें
आगरा, अलीगढ़, अयोध्या, बरेली, फिरोजाबाद, गाजियाबाद, गोरखपुर, झांसी, कानपुर, लखनऊ, मथुरा-वृंदावन, मेरठ, मुरादाबाद, प्रयागराज, शाहजहांपुर, सहारनपुर, वाराणसी और नोएडा (जेवर सहित) में इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जाएगा।





