
SC का ‘सुप्रीम’ फैसला और 14% टूट गया शेयर, Yes Bank के इन निवेशकों की मौज!
Yes Bank: सुप्रीम कोर्ट ने यस बैंक के ₹8,415 करोड़ के AT-1 बॉन्ड को रद्द करने के फैसले को पलट दिया है, जिससे निवेशकों को उनका पैसा वापस मिलेगा। इस खबर के बाद यस बैंक के शेयर 14% से अधिक गिर गए, लेकिन बॉन्डधारकों के लिए यह राहत की खबर है।
यस बैंक पर बड़ी खबर है। इस खबर से यस बैंक के शेयरों में बड़ी गिरावट देखी गई। इसके शेयर 14% तक टूट गए, लेकिन इस फैसले ने कुछ निवेशकों की मौज करा दी। दरअसल, यह फैसला 8,415 करोड़ रुपये मूल्य के ‘एडिशनल टियर-1’ (AT-1) बॉन्ड को लेकर है। इस बॉन्ड में रिटेल और इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स ने पैसे लगाए थे। और बाद में जब यस बैंक की वित्तीय हालत खराब हुई तो आरबीआई द्वारा यस बैंक पर मोराटोरियम लगाने के बाद नियुक्त किए गए प्रशासक ने 14 मार्च 2020 को ₹8,415 करोड़ के इन AT-1 बॉन्ड्स को शून्य घोषित कर दिया था।
AT1 बॉन्ड उच्च जोखिम वाले इंस्ट्रूमेंट होते हैं, जिन्हें इस तरह से डिजाइन किया गया है कि जब बैंक की पूंजी एक निश्चित सीमा से नीचे चली जाए, तो ये नुकसान को सोख सकें।
केंद्र ने तर्क दिया था कि AT1 बॉन्ड RBI के नियमों और बॉन्ड अनुबंधों से नियंत्रित होते हैं, न कि पुनर्गठन योजना से। साथ ही, RBI का मास्टर सर्कुलर ‘राइट-डाउन’ (मूल्य में कटौती) की प्रक्रिया शुरू होने, उस पर की जाने वाली कार्रवाई और उसके परिणामों के लिए एक पूरा ढांचा प्रदान करता है। सॉलिसिटर जनरल ने यह भी दलील दी थी कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के नेतृत्व में पूंजी डाले जाने से पहले बॉन्ड के मूल्य में कटौती करने से, बचाव की पूरी कवायद खतरे में पड़ सकती थी।
नियुक्त किए गए प्रशासक (Administrator) ने 14 मार्च 2020 को ₹8,415 करोड़ के इन AT-1 बॉन्ड्स को शून्य (Write-down) घोषित कर दिया था। इस फैसले को एक्सिस ट्रस्टी सर्विसेज लिमिटेड ने चुनौती दी, जो डिबेंचर धारकों की ओर से काम कर रही थी। इसके साथ ही कुछ व्यक्तिगत बॉन्ड धारकों और अन्य निवेशकों ने भी इसे चुनौती दी। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि पुनर्निर्माण योजना लागू होने के बाद, प्रशासक के पास उनके निवेश को खत्म करने का कोई अधिकार नहीं था।जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने बॉम्बे हाई कोर्ट के जनवरी 2023 के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें बॉन्ड को राइट-डाउन करने के कदम को रद्द कर दिया गया था। साथ ही, कोर्ट ने यस बैंक, RBI और केंद्र सरकार की ओर से दायर की गई अपीलों को खारिज कर दिया।
बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले सुप्रीम कोर्ट ने ठहराया उचित
बॉम्बे हाई कोर्ट और अब सुप्रीम कोर्ट दोनों ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि बैंक के प्रशासक को अंतिम रीकंस्ट्रक्शन स्कीम (Final Reconstruction Scheme) लागू होने से पहले या बिना उचित अधिकार के बॉन्ड्स को पूरी तरह रद करने की कानूनी शक्ति/अधिकार नहीं था।बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराते हुए बॉन्ड्स को पूरी तरह रद करने के फैसले को रद कर दिया।





