शनि की साढ़ेसाती का दूसरा चरण, जानें किन राशियों पर पड़ रहा प्रभाव

Shani Sadesati: हिन्दू धर्म के अनुसार शनि का प्रभाव व्यक्ति के कर्मों पर निर्भर करता है। शनि की साढ़ेसाती का दूसरा चरण चल रहा है। जानें साढ़ेसाती के दूसरे चरण का प्रभाव, कब मिलेगी मुक्ति और क्या करे उपाय-

हिन्दू धर्म में शनि को कर्म फल दाता माना जाता है। कहा जाता है कि शनि भगवान व्यक्ति को उनके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते है। इसी प्रकार ज्योतिष शास्त्र में शनि की साढ़ेसाती का असर अच्छा व बुरा दोनों ही माना गया है। ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि जो व्यक्ति साढ़ेसाती की चपेट में आता है उसका जीवन पूरी तरह से बदल जाता है। इसका सबसे ज्यादा प्रभाव व्यक्ति को शारीरिक रूप से झेलना पड़ता है। दूसरे चरण में साढ़ेसाती का प्रभाव जातकों के कार्यक्षेत्र और परिवार पर भी पड़ता है। वर्तमान में शनि की स्वराशि कुंभ पर साढ़ेसाती का दूसरा चरण चल रहा है।

कुंभ राशि पर साढ़ेसाती का प्रभाव– वर्तमान में शनि कुंभ (Kumbh Rashi) राशि में मौजूद है। जिसके कारण मकर, कुंभ व मीन राशि पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है। कुंभ राशि वालों पर 24 जनवरी 2020 से साढ़ेसाती शुरू हुई थी और 3 जून 2027 को मुक्ति मिलेगी। लेकिन शनि की महादशा से पूरी तरह से कुंभ राशि वालों को मुक्ति 23 फरवरी 2028 को शनि के मार्गी होने पर ही मिलेगी।

शनि की साढ़ेसाती के दूसरे चरण का प्रभाव- यह सबसे मुश्किल समय होता है। शनि व्यक्ति को कर्म के अनुसार फल प्रदान करते हैं। ऐसे में अच्छे कर्म वालों को शुभ व बुरे कर्म वालों को अशुभ फलों की प्राप्ति होती है। इस चरण में आपको मानसिक, शारीरिक व आर्थिक कष्टों का सामना करना पड़ता है। इसके साथ ही इस अवधि में धोखा मिलने की संभावना रहती है।

इन राशियों पर ढैय्या का असर- शनि की ढैय्या ढाई साल की होती है। वर्तमान में कर्क व वृश्चिक राशि वालों पर शनि ढैय्या का प्रभाव है।

साढ़ेसाती के अशुभ प्रभावों से बचाव के उपाय-

1. शनि मंदिर में छाया दान करना चाहिए।

2. शनिवार के दिन व्रत करना चाहिए। काली उड़द की दाल का दान करना चाहिए।

3. काले वस्त्र का दान लाभकारी माना गया है।

4. शनिवार के दिन सुंदरकांड व बजरंगबाण का पाठ करना लाभकारी माना गया है।

5. गाय, कुत्ते व कौवे को रोटी खिलाते रहें।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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