UGC नियमों पर स्टे के बाद छात्रों का दावा… ‘कैंपस में आज भी जाति पूछकर दिए जाते हैं रूम’

UGC Stay: यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) के नए समानता (Equity) नियमों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई अस्थायी रोक के बाद देशभर में बहस तेज हो गई है। जहां कुछ लोग इसे संतुलित और जरूरी कदम बता रहे हैं, वहीं कई छात्र संगठनों और सामाजिक समूहों ने इसे सामाजिक न्याय के खिलाफ बताया है। इस पूरे विवाद ने कैंपस से लेकर सोशल मीडिया तक माहौल गर्म कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्यों लगाई रोक
सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए एंटी-डिस्क्रिमिनेशन/इक्विटी नियमों पर रोक लगाते हुए कहा कि इन नियमों की भाषा और दायरा स्पष्ट नहीं है और इनका गलत इस्तेमाल भी हो सकता है। कोर्ट ने केंद्र सरकार और यूजीसी से जवाब मांगा है और साफ किया कि फिलहाल ये नियम लागू नहीं होंगे। अदालत ने संकेत दिया कि बिना गहराई से जांच के इन्हें लागू करना सामाजिक तनाव पैदा कर सकता है।

क्या थे यूजीसी के नए नियम
इन नियमों का उद्देश्य कॉलेज और यूनिवर्सिटी में जाति, धर्म, लिंग और सामाजिक पहचान के आधार पर भेदभाव खत्म करना बताया गया था। इसके तहत संस्थानों में इक्विटी कमेटियां और शिकायत निवारण तंत्र बनाने का प्रस्ताव था, ताकि भेदभाव के मामलों को जल्दी सुलझाया जा सके।

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देशभर में विरोध और समर्थन

  • कुछ छात्र संगठनों और सामाजिक न्याय समूहों का कहना है कि सरकार ने कोर्ट में नियमों का मजबूती से बचाव नहीं किया।
  • वहीं कई लोगों का मानना है कि नियमों की भाषा अस्पष्ट थी और इससे गलत शिकायतों का खतरा था।
  • सोशल मीडिया पर इस मुद्दे पर तीखी बहस देखने को मिली।

‘जाति पूछकर रूम देते हैं’ — छात्रों की ग्राउंड रियलिटी
कोर्ट के फैसले के बाद कई छात्रों ने कैंपस के अनुभव साझा किए। कुछ छात्रों का दावा है कि हॉस्टल या किराये के कमरों में अब भी जाति पूछकर कमरा देने या मना करने जैसी घटनाएं होती हैं। उनका कहना है कि भेदभाव खत्म करने के लिए नियम जरूरी हैं, लेकिन नीति बनाते समय सभी वर्गों की चिंता को शामिल करना चाहिए।

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पब्लिक फिगर्स की प्रतिक्रिया
कुछ सार्वजनिक हस्तियों और बुद्धिजीवियों ने कोर्ट के फैसले का स्वागत किया और कहा कि समाज में नई खाई बनने से बचाने के लिए संतुलन जरूरी है।

वहीं कुछ सामाजिक संगठनों का कहना है कि यह फैसला सामाजिक न्याय की प्रक्रिया को धीमा कर सकता है।

आगे क्या होगा
यह मामला अभी अंतिम फैसला नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ अस्थायी रोक लगाई है। आने वाले महीनों में सरकार, यूजीसी और कोर्ट के बीच कानूनी प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा कि ये नियम लागू होंगे या उनमें बदलाव किया जाएगा।

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