
भारत में Obesity अलार्म! मोटापा अब सिर्फ बीमारी नहीं, अर्थव्यवस्था पर बोझ
Lifestyle: भारत में तेजी से बढ़ता मोटापा अब केवल स्वास्थ्य से जुड़ा मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था और उत्पादकता के लिए भी गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। इकोनॉमिक सर्वे 2026 ने इसे एक “साइलेंट हेल्थ इमरजेंसी” करार देते हुए चेतावनी दी है कि अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो इसके दूरगामी आर्थिक और सामाजिक परिणाम सामने आ सकते हैं।
2000 से 2025 तक तेजी से बढ़ा मोटापा
इकोनॉमिक सर्वे के अनुसार, वर्ष 2000 से 2025 के बीच भारत में मोटापे का ग्राफ तेजी से ऊपर गया है। खासकर
- शहरी वयस्कों,
- किशोरों,
- और स्कूल जाने वाले बच्चों
में मोटापे के मामले चिंताजनक स्तर तक पहुंच गए हैं।
सर्वे में बताया गया है कि आधुनिक जीवनशैली, लंबे समय तक बैठकर काम करना और असंतुलित खानपान इसके प्रमुख कारण हैं।

अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड बना सबसे बड़ा खतरा
रिपोर्ट में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड को मोटापे की सबसे बड़ी वजह बताया गया है। जंक फूड, मीठे पेय, पैकेज्ड स्नैक्स और फास्ट फूड का बढ़ता सेवन बच्चों और युवाओं की सेहत पर गहरा असर डाल रहा है।
इसके साथ ही शारीरिक गतिविधि की कमी—जैसे खेलकूद से दूरी और स्क्रीन टाइम में बढ़ोतरी—स्थिति को और गंभीर बना रही है।

‘डबल बर्डन’ की मार: कुपोषण और मोटापा साथ-साथ
इकोनॉमिक सर्वे ने भारत की एक बड़ी विडंबना की ओर भी इशारा किया है। देश एक ओर जहां कुपोषण से जूझ रहा है, वहीं दूसरी ओर मोटापा तेजी से बढ़ रहा है। इसे विशेषज्ञों ने ‘डबल बर्डन ऑफ मालन्यूट्रिशन’ कहा है।
ग्रामीण और गरीब वर्ग में कुपोषण, जबकि शहरी और मध्यम वर्ग में मोटापा—यह असमानता नीति निर्माताओं के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।

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अर्थव्यवस्था पर क्या पड़ेगा असर?
इकोनॉमिक सर्वे के मुताबिक, मोटापे से जुड़ी बीमारियां जैसे
- डायबिटीज,
- हृदय रोग,
- हाई ब्लड प्रेशर
देश की वर्कफोर्स की उत्पादकता को प्रभावित कर रही हैं।
बीमारियों के कारण
- काम के घंटे घटते हैं,
- हेल्थकेयर खर्च बढ़ता है,
- और लंबे समय में GDP ग्रोथ पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है।

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नीतिगत हस्तक्षेप की जरूरत
सर्वे में सरकार को सलाह दी गई है कि मोटापे से निपटने के लिए बहुस्तरीय रणनीति अपनाई जाए। इसमें शामिल हैं—
- हेल्दी फूड को बढ़ावा देना
- स्कूलों में पोषण शिक्षा
- अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड पर सख्त लेबलिंग
शारीरिक गतिविधि और खेलों को प्रोत्साहन
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अभी ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में मोटापा भारत के लिए स्वास्थ्य ही नहीं, आर्थिक संकट भी बन सकता है।
चेतावनी के साथ अवसर भी
इकोनॉमिक सर्वे यह भी संकेत देता है कि सही नीतियों और जन-जागरूकता से इस चुनौती को अवसर में बदला जा सकता है। एक स्वस्थ भारत ही लंबे समय में मजबूत अर्थव्यवस्था की नींव रख सकता है।
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