परमाणु युद्ध की तैयारी? चीन के सीक्रेट अंडरग्राउंड नेटवर्क से बढ़ी टेंशन…

China Secret City: दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और तेजी से उभरती सैन्य शक्ति चीन एक बार फिर अपनी रणनीतिक गतिविधियों को लेकर सुर्खियों में है। हाल ही में सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों और रक्षा विशेषज्ञों की रिपोर्टों ने संकेत दिए हैं कि चीन अपने पश्चिमी क्षेत्र शिनजियांग के रेगिस्तानी इलाकों में एक विशाल भूमिगत सैन्य नेटवर्क विकसित कर रहा है। इस परियोजना को लेकर अमेरिका समेत कई देशों की चिंताएं बढ़ गई हैं, जबकि भारत भी इस घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है।

क्या है चीन का ‘सीक्रेट शहर’?
मीडिया रिपोर्ट्स और सैटेलाइट इमेजरी के विश्लेषण के अनुसार, चीन पूर्वी शिनजियांग के दूरस्थ रेगिस्तानी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य कर रहा है। यहां भूमिगत बंकर, मिसाइल लॉन्च पैड, सुरंगों का जाल, संचार नेटवर्क और सैन्य बुनियादी ढांचे का विस्तार देखा गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कोई साधारण सैन्य अड्डा नहीं, बल्कि एक ऐसा रणनीतिक केंद्र हो सकता है जो परमाणु हमले की स्थिति में भी चीन की सैन्य क्षमता को सुरक्षित रख सके। इसी वजह से इसे “अंडरग्राउंड सिटी” या “सीक्रेट सिटी” कहा जा रहा है।

परमाणु रणनीति से जुड़ा हो सकता है प्रोजेक्ट
रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि चीन अपनी “सेकंड स्ट्राइक कैपेबिलिटी” को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। इसका मतलब यह है कि यदि किसी देश द्वारा चीन पर पहले परमाणु हमला किया जाता है, तब भी वह सुरक्षित बचे हथियारों के जरिए जवाबी हमला कर सके।

भूमिगत सुरंगें और बंकर मिसाइलों को छिपाने और सुरक्षित रखने में मदद करते हैं। इससे दुश्मन के लिए चीन की सैन्य क्षमता को पूरी तरह नष्ट करना बेहद मुश्किल हो जाता है।

अमेरिका क्यों है चिंतित?
अमेरिकी रक्षा विभाग पहले भी कई रिपोर्टों में चीन के बढ़ते परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंता जाहिर कर चुका है। वाशिंगटन का मानना है कि बीजिंग अपने परमाणु हथियारों की संख्या और क्षमता दोनों में तेजी से विस्तार कर रहा है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि चीन इस तरह के भूमिगत नेटवर्क को सफलतापूर्वक विकसित कर लेता है तो एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन बदल सकता है। यही वजह है कि अमेरिका और उसके सहयोगी देश चीन की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहे हैं।

भारत के लिए कितना बड़ा खतरा?
भारत और चीन के बीच पिछले कुछ वर्षों में कई बार सीमा विवाद सामने आ चुके हैं। पूर्वी लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक दोनों देशों के बीच तनाव की घटनाएं होती रही हैं।

हालांकि यह भूमिगत सैन्य परियोजना सीधे तौर पर भारत को लक्ष्य बनाकर तैयार की जा रही है, ऐसा कोई ठोस प्रमाण फिलहाल सामने नहीं आया है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की बढ़ती सैन्य क्षमता का असर पूरे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ेगा।

यदि चीन अपने परमाणु और मिसाइल नेटवर्क को अधिक सुरक्षित और उन्नत बना लेता है, तो दक्षिण एशिया और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। ऐसे में भारत को अपनी रक्षा तैयारियों और निगरानी क्षमताओं को और मजबूत करना पड़ सकता है।

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शिनजियांग ही क्यों चुना?
शिनजियांग का विशाल रेगिस्तानी इलाका चीन के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां आबादी कम है और क्षेत्रफल बहुत बड़ा है, जिससे सैन्य गतिविधियों को गोपनीय रखना आसान हो जाता है।

इसके अलावा यह इलाका चीन के अंदरूनी हिस्से में स्थित है, जिससे किसी संभावित हमले की स्थिति में यहां मौजूद सैन्य ढांचे को अतिरिक्त सुरक्षा मिलती है। विशेषज्ञों के अनुसार यही कारण है कि चीन लंबे समय से इस क्षेत्र का उपयोग मिसाइल परीक्षणों और रक्षा परियोजनाओं के लिए करता रहा है।

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क्या कहता है चीन?
फिलहाल चीन की सरकार या सेना की ओर से इन रिपोर्टों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। बीजिंग अक्सर अपनी सैन्य गतिविधियों को राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला बताते हुए सार्वजनिक जानकारी साझा करने से बचता रहा है।

हालांकि अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले समय में और सैटेलाइट तस्वीरें तथा खुफिया रिपोर्टें इस परियोजना की वास्तविक प्रकृति को स्पष्ट कर सकती हैं।

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