
I LOVE MUHAMMAD’ विवाद से गरमाई यूपी की सियासत, योगी आक्रामक तो बैकफुट पर सपा
I LOVE MUHAMMAD: उत्तर प्रदेश के कई जिलों में फैल चुके ‘I LOVE MUHAMMAD’ अभियान ने अप्रत्याशित रूप से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक मजबूत राजनीतिक हथियार थमा दिया है। वहीं समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव इस मुद्दे पर बैकफुट पर नजर आ रहे हैं। सपा के कुछ मुस्लिम नेताओं और प्रवक्ताओं ने इसे खुलकर उठाया है, लेकिन पार्टी का शीर्ष नेतृत्व अभी तक सतर्क चुप्पी साधे हुए है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कानपुर से शुरू हुआ यह विवाद अब एक वैचारिक बहस में बदल चुका है। मुख्यमंत्री योगी ने नवरात्रि के दौरान इसे हिंदुत्व के मंच पर प्रभावी तरीके से पेश किया, जिससे सपा को मुश्किल स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।
कानपुर से शुरू होकर राज्यव्यापी विवाद बना मुद्दा
4 सितंबर को कानपुर में बारावफात के जुलूस के दौरान ‘I LOVE MUHAMMAD’ लिखा बैनर लगाने पर स्थानीय हिंदू संगठनों ने आपत्ति जताई। पुलिस ने नई परंपरा शुरू करने पर केस दर्ज किया और यहीं से विवाद शुरू हुआ। धीरे-धीरे यह मुद्दा कानपुर से निकलकर उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, महाराष्ट्र और तेलंगाना तक फैल गया।
बरेली और नागपुर में इसके खिलाफ प्रदर्शन और झड़पें भी हुईं। देखते-ही-देखते यह मामला एक स्थानीय मुद्दे से निकलकर पूरे प्रदेश का राजनीतिक विमर्श बन गया।
सपा के सामने दोहरी चुनौती
सपा के लिए यह विवाद दोहरी चुनौती लेकर आया है। एक ओर पार्टी अपने अल्पसंख्यक वोट बैंक को नाराज़ नहीं कर सकती, दूसरी ओर हिंदू त्योहारों के दौरान हिंदू विरोधी छवि भी नहीं लेना चाहती। नवरात्रि के बीच उठे इस विवाद ने इसे सीधे हिंदू बनाम मुस्लिम बहस का रूप दे दिया है।
इसी क्रम में सपा प्रवक्ता और दिवंगत शायर मुनव्वर राना की बेटी सुमैया राना के बयान ने विवाद को और हवा दी, जिसमें उन्होंने बड़े स्तर पर लामबंदी की चेतावनी दी थी। सपा को तुरंत स्पष्टीकरण मांगना पड़ा। वहीं, कानपुर हिंसा के आरोपी और हाल ही में सपा में शामिल हुए पूर्व पुलिसकर्मी जुबैर अहमद खान की गिरफ्तारी ने पार्टी की मुश्किलें और बढ़ा दीं।
योगी सरकार का कड़ा रुख
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस विवाद को हिंदुत्व बनाम धार्मिक अतिवाद की बहस में तब्दील कर दिया है। उन्होंने साफ संदेश दिया है कि हिंदू त्योहारों के दौरान सार्वजनिक व्यवस्था भंग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
बरेली उपद्रव में शामिल मौलाना तौकीर रजा के खिलाफ भी सख्त कानूनी कदम उठाए गए हैं। सीएम योगी ने सार्वजनिक मंच से कहा कि “ऐसे लोगों को सबक सिखाना जरूरी है।”
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सपा के लिए रणनीतिक दुविधा
विश्लेषकों का कहना है कि अखिलेश यादव की पीडीए (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) राजनीति पर यह विवाद बड़ा झटका है।
अगर सपा इस विवाद में अल्पसंख्यक समुदाय का खुलकर समर्थन करती है, तो बहुसंख्यक हिंदू मतदाता उससे दूर हो सकते हैं। वहीं, चुप्पी साधने पर अल्पसंख्यक वोट बैंक खिसकने का खतरा है।
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राजनीति और गहरी होने के आसार
चुनावी दृष्टि से यह विवाद भाजपा के लिए अवसर और सपा के लिए संकट बनता दिख रहा है। नवरात्रि के दौरान उठे इस मुद्दे ने धार्मिक आधार पर ध्रुवीकरण की जमीन तैयार कर दी है। अब प्रदेश की राजनीति और गहराने के आसार हैं, जबकि सपा केवल विवाद के शांत होने की उम्मीद ही कर सकती है।
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