‘यशोभूमि’ के संपादक श्रीनारायण तिवारी को मिला ‘आज का कर्मवीर अवार्ड 2026

राष्ट्रीय हिंदी दैनिक समाचार पत्र ‘यशोभूमि’ के संपादक श्रीनारायण तिवारी को पत्रकारिता जगत में उनके उत्कृष्ट योगदान और बेबाक खोजी पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित ‘आज का कर्मवीर अवार्ड 2026’ से नवाजा गया है। मुंबई के गोरेगांव पूर्व स्थित द वेस्टिन होटल में आयोजित एक भव्य और गरिमामय समारोह में उन्हें यह सम्मान मीडिया (प्रिंट) श्रेणी के तहत प्रदान किया गया।

इस विशेष पुरस्कार समारोह में देश के उद्योग और राजनीति क्षेत्र की कई प्रतिष्ठित हस्तियों ने शिरकत की, जिनमें महाराष्ट्र सरकार के कैबिनेट मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा भी प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

चार दशकों से अधिक का रहा पत्रकारिता का सफर

श्रीनारायण तिवारी पिछले 41 वर्षों से भारतीय पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने अपनी पत्रकारिता यात्रा की शुरुआत वर्ष 1984 में उत्तर प्रदेश के जौनपुर स्थित शाहगंज से प्रकाशित होने वाले साप्ताहिक समाचार पत्र ‘वादरायण’ से की थी।

इसके बाद वर्ष 1988 में वह मुंबई आकर राष्ट्रीय हिंदी दैनिक ‘जनसत्ता’ में स्टाफ रिपोर्टर के रूप में शामिल हुए। वर्ष 2003 में उन्होंने ‘लोकमत समाचार’ में मुंबई ब्यूरो प्रमुख के रूप में जिम्मेदारी संभाली और बाद में पूरे लोकमत मीडिया समूह के विशेष संवाददाता के रूप में अपनी सेवाएं दीं।

इसके पश्चात उन्होंने ‘दबंग दुनिया’, ‘एब्सल्यूट इंडिया’, ‘पूर्ण विराम’ और ‘जागरूक टाइम्स’ जैसे प्रतिष्ठित हिंदी समाचार पत्रों में स्थानीय संपादक, संपादक और कार्यकारी संपादक जैसी वरिष्ठ भूमिकाओं में कार्य करते हुए अपनी एक अलग पहचान बनाई। वर्तमान में वह राष्ट्रीय हिंदी दैनिक ‘यशोभूमि’ के संपादक के रूप में कार्यरत हैं और उनके नेतृत्व में समाचार पत्र ने अपने ‘नया तेवर, नया कलेवर’ अभियान के साथ पाठकों के बीच अपनी साख को और मजबूत किया है।

खोजी पत्रकारिता से नहीं हटे पीछे

श्रीनारायण तिवारी को निष्पक्ष, साहसिक और तथ्यपरक खोजी पत्रकारिता के लिए मीडिया जगत में विशेष रूप से जाना जाता है। रेलवे में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ उन्होंने लगातार 15 दिनों तक प्रमुखता से खोजी रिपोर्ट प्रकाशित की थीं, जिसके लिए उन्हें ‘गजानन आर्य साहसिक व खोजी पत्रकारिता पुरस्कार’ से सम्मानित किया जा चुका है।

इसके अलावा महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (MPSC) में भ्रष्टाचार से जुड़े गंभीर मामले को भी उन्होंने हिंदी, मराठी और अंग्रेजी-तीनों भाषाओं के ‘लोकमत’ समाचार पत्रों में प्रमुखता से उठाया था।

इस खोजी अभियान के दौरान उन्हें प्रलोभन देने की कोशिशें की गईं और जान से मारने की धमकियां भी मिलीं, लेकिन उन्होंने बिना किसी दबाव में आए अपनी पत्रकारिता जारी रखी। उनकी इसी धारदार संपादकीय शैली और जनहितैषी रुख के कारण आज उन्हें देश के चुने हुए अनुभवी संपादकों में गिना जाता है।

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