
प्रशासनिक चूक से चाईबासा सदर अस्पताल में हुई 5 बच्चों की मौत, कार्रवाई का भरोसा
Chaibasa News: झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के चाईबासा सदर अस्पताल में थैलेसीमिया से पीड़ित पांच बच्चों को एचआईवी(HIV) संक्रमित रक्त चढ़ाए जाने के मामले ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। घटना के बाद न सिर्फ स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है, बल्कि राजनीतिक हलकों में भी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
घटना का खुलासा
27 अक्टूबर को यह मामला तब सामने आया जब चाईबासा सदर अस्पताल में इलाजरत थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों की नियमित जांच के दौरान उनमें एचआईवी संक्रमण के लक्षण पाए गए। जांच में पाया गया कि हाल ही में उन्हें ब्लड ट्रांसफ्यूजन के दौरान संक्रमित रक्त चढ़ाया गया था। इससे अस्पताल के ब्लड बैंक की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
छह सदस्यीय जांच समिति गठित
राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच के लिए छह सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति की अध्यक्ष डॉ. नेहा अरोड़ा (विशेष सचिव, स्वास्थ्य विभाग) को बनाया गया है। समिति अस्पताल के ब्लड बैंक, पीकू वार्ड, लैब और ब्लड स्क्रीनिंग प्रक्रिया की बारीकी से जांच कर रही है।
झारखंड हाईकोर्ट ने लिया स्वत संज्ञान
घटना की गंभीरता को देखते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी है। अदालत ने पूछा है कि अस्पताल में ऐसी चूक कैसे हुई और एचआईवी पॉजिटिव ब्लड मरीजों को क्यों चढ़ाया गया।
प्रारंभिक जांच में सामने आईं खामियां
स्वास्थ्य सेवा निदेशक डॉ. दिनेश कुमार के नेतृत्व में टीम ने चाईबासा अस्पताल का दौरा किया।
टीम ने पाया कि:
- ब्लड सैंपल की स्क्रीनिंग में गंभीर अनियमितता थी।
- ब्लड बैंक में रिकॉर्ड मेंटेनेंस बेहद खराब था।
- ब्लड ट्रांसफ्यूजन से पहले आवश्यक परीक्षण नहीं किए गए।
- अस्पताल की लैब की मशीनें कई दिनों से खराब थीं, लेकिन इसकी सूचना उच्चाधिकारियों को नहीं दी गई।
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विपक्ष का हमला…यह सरकार की विफलता का प्रमाण
विपक्षी दलों ने इस घटना को राज्य सरकार की गंभीर विफलता बताया है। भाजपा प्रवक्ता ने कहा, “यह सिर्फ मशीन की खराबी नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र की नाकामी है। जिन बच्चों को सरकार बचाने में विफल रही, उनके साथ अन्याय हुआ है। मुख्यमंत्री को नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देना चाहिए।”
सरकार की प्रतिक्रिया
स्वास्थ्य मंत्री के निर्देश पर सरकार ने संबंधित अस्पताल अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है और कहा है कि दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। मंत्री ने आश्वासन दिया कि मृत्यु या संक्रमण से जुड़े सभी मामलों को सरकारी खर्च पर इलाज और सहायता दी जाएगी।
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परिवारों का आक्रोश
संक्रमित बच्चों के परिवारों का कहना है कि अस्पताल प्रशासन ने लापरवाही बरती और कई बार ब्लड टेस्टिंग रिपोर्ट की मांग करने पर भी सही जानकारी नहीं दी गई। एक परिजन ने कहा, “हम अपने बच्चों को बचाने अस्पताल आए थे, लेकिन सरकार की गलती से उन्हें जिंदगीभर का दर्द मिल गया।”
अब सबकी निगाहें सरकार द्वारा गठित जांच समिति पर हैं, जो आने वाले दिनों में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी और तय करेगी कि इस ‘एचआईवी ब्लड ट्रांसफ्यूजन कांड’ के असली दोषी कौन हैं।
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