
‘आतंकवादी नहीं मेरा बेटा…’, यश के स्टारडम और ‘Toxic’ के खिलाफ साजिश पर भड़कीं मां
Yash Toxic Movie: कन्नड़ सिनेमा के पॅन-इंडिया सुपरस्टार यश (Yash) की हालिया रिलीज एक्शन-थ्रिलर फिल्म ‘टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स’ (Toxic) को मिल रहे मिक्स्ड रिव्यू और जारी सोशल मीडिया ट्रोलिंग के बीच एक्टर की मां पुष्पा अरुण कुमार अपने बेटे के बचाव में खुलकर सामने आई हैं।
मीडिया से बातचीत के दौरान यश की मां ने तेलुगु के दिग्गज प्रोड्यूसर अल्लु अरविंद (अल्लू अर्जुन के पिता) के उस पुराने बयान पर कड़ा ऐतराज जताया और करारा जवाब दिया, जिसमें उन्होंने सवाल उठाया था कि ‘केजीएफ (KGF) से पहले यश कौन थे?’
‘KGF से पहले भी दी फिल्में’
पुष्पा अरुण कुमार ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि कुछ लोग जानबूझकर उनके बेटे का करियर बर्बाद करने और ‘टॉक्सिक’ के खिलाफ झूठा और नकारात्मक प्रचार (Propaganda) फैलाने में लगे हुए हैं।
अल्लु अरविंद के बयान पर इनडायरेक्टली पलटवार करते हुए उन्होंने कहा, “मेरा बेटा कोई आतंकवादी नहीं है। लोग बार-बार यह सवाल क्यों पूछते हैं कि केजीएफ से पहले यश कौन था? केजीएफ आने से पहले ही उसने कन्नड़ सिनेमा में लगातार 5 ब्लॉकबस्टर फिल्में (‘गुगली’, ‘ड्रामा’, ‘मिस्टर एंड मिसेज रामाचारी’ आदि) दी थीं और वह पहले से ही कर्नाटक का बड़ा स्टार था। अगर वह वाकई कोई ‘मामूली इंसान’ है, तो लोग उससे इतना डर क्यों रहे हैं?”
‘मेहनत से यहां तक पहुंचा’
नेपोटिज्म (भाई-भतीजावाद) और बड़े फिल्मी बैकग्राउंड से आने वाले कलाकारों पर तंज कसते हुए यश की मां ने कहा कि उनके बेटे को किसी से विरासत में पहचान नहीं मिली है।
उन्होंने कहा, “यश किसी अमीर घराने या फिल्मी परिवार में पैदा नहीं हुआ था। वह एक साधारण केएसआरटीसी (KSRTC) बस ड्राइवर का बेटा है, जिसने बिना किसी गॉडफादर, पैसे या सपोर्ट के अपनी कड़ी मेहनत के दम पर शून्य से शुरुआत करके यह मुकाम हासिल किया है। एक मां होने के नाते मुझे उसकी इस उपलब्धि पर गर्व है।”
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क्या था ऑलू अरविंद का बयान?
यह पूरा विवाद तेलुगु फिल्म निर्माता ऑलू अरविंद के एक बयान से शुरू हुआ था, जिसमें उन्होंने कहा था कि ‘केजीएफ’ की सफलता का श्रेय यश के स्टारडम को नहीं, बल्कि फिल्म के भव्य स्केल, मेकिंग और प्रोडक्शन वैल्यू को जाता है।
उन्होंने कहा था, “केजीएफ से पहले यश कौन थे?” हालांकि, खुद यश ने भी एक इंटरव्यू में बेहद शालीनता से जवाब देते हुए कहा था कि सिनेमा किसी एक व्यक्ति का नहीं बल्कि पूरी टीम का सामूहिक प्रयास होता है।
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