यौन उत्पीड़न के आरोपों में घिरे प्रोफेसर पर गिरी गाज, यूनिवर्सिटी ने लिया बड़ा फैसला…

JNU Sexual Harassment Case: 11 छात्राओं की शिकायतों की आंतरिक समिति ने जांच की थी। रिपोर्ट और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर JNU प्रशासन ने प्रोफेसर की सेवा समाप्त की।

Delhi: जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़े मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। 11 छात्राओं द्वारा यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए जाने के बाद संबंधित प्रोफेसर को तत्काल प्रभाव से विश्वविद्यालय की सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। यह कार्रवाई आंतरिक समिति की जांच रिपोर्ट और उपलब्ध तथ्यों पर विचार करने के बाद की गई है।

11 छात्राओं ने लगाए थे यौन उत्पीड़न के आरोप
JNU के संबंधित प्रोफेसर के खिलाफ 11 छात्राओं ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय की आंतरिक समिति ने आरोपों की जांच की। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और रिपोर्ट के आधार पर प्रोफेसर के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की गई।

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इंटरनल कमिटी की रिपोर्ट के बाद हुई कार्रवाई
विश्वविद्यालय प्रशासन के मुताबिक, आंतरिक समिति ने अपनी जांच के निष्कर्षों के आधार पर संबंधित प्रोफेसर को कड़ी सजा देने की सिफारिश की थी। यह सिफारिश सेवा नियमों और केंद्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमों के नियम 11(ix) के तहत की गई।

इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने उपलब्ध तथ्यों और समिति की रिपोर्ट पर विचार किया। इसके आधार पर प्रोफेसर को तत्काल प्रभाव से विश्वविद्यालय की सेवा से बर्खास्त करने का फैसला लिया गया।

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तत्काल प्रभाव से सेवा समाप्त
JNU प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद संबंधित प्रोफेसर अब विश्वविद्यालय की सेवा में नहीं रहेंगे। मामले में कार्रवाई का आधार आंतरिक समिति की जांच रिपोर्ट और प्रशासन द्वारा उपलब्ध तथ्यों पर किया गया विचार बताया गया है।

इस घटनाक्रम ने विश्वविद्यालय परिसरों में छात्राओं की सुरक्षा, यौन उत्पीड़न की शिकायतों की जांच और संस्थानों की जवाबदेही जैसे मुद्दों को फिर चर्चा में ला दिया है।

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