
‘शांतिपूर्ण मार्च से क्या परेशानी?’ CJP नेताओं की हिरासत पर सुप्रिया सुले ने घेरा केंद्र
Supriya Sule Statement: CJP नेताओं की हिरासत पर सुप्रिया सुले ने केंद्र सरकार को घेरा, पूछा- शांतिपूर्ण मार्च से सरकार को क्यों दिक्कत?
Delhi: दिल्ली में प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से पहले CJP नेताओं को हिरासत में लिए जाने का मामला राजनीतिक तूल पकड़ता नजर आ रहा है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की नेता सुप्रिया सुले ने इंडिया टुडे कॉन्क्लेव मुंबई में इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने पूछा कि जब आंदोलन शांतिपूर्ण था, तो नेताओं को हिरासत में लेने की जरूरत क्यों पड़ी?
सुप्रिया सुले ने सरकार की कार्रवाई पर उठाए सवाल
इंडिया टुडे कॉन्क्लेव मुंबई में सुप्रिया सुले ने CJP नेताओं और दीपके को हिरासत में लिए जाने की निंदा की। उन्होंने कहा कि ये लोग दिल्ली में शांतिपूर्ण आंदोलन में शामिल होने जा रहे थे। सुले ने सरकार की कार्रवाई को कायरतापूर्ण बताते हुए सवाल किया कि शांतिपूर्ण मार्च से आखिर सरकार को क्या परेशानी थी।
धारा 144 लागू करने के तर्क पर भी सवाल
सुप्रिया सुले के मुताबिक, सरकार की ओर से यह तर्क दिया गया कि दिल्ली में बड़ी संख्या में लोगों के जुटने से कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती थी। इसी आशंका के चलते धारा 144 लागू करने और एहतियातन हिरासत में लेने की बात कही गई।
हालांकि, सुले ने इस दलील पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रशासन को प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने की कोशिश करनी चाहिए थी। उन्होंने पूछा कि आंदोलनकारियों से संवाद करने के बजाय उन्हें हिरासत में लेने का फैसला क्यों किया गया।
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जंतर-मंतर पर पिछले आंदोलन का किया जिक्र
सुप्रिया सुले ने जंतर-मंतर पर हुए पिछले आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां युवा लंबे समय तक मौजूद रहते थे, लेकिन हिंसा या दुर्व्यवहार की घटनाएं नहीं हुईं। उन्होंने दावा किया कि आंदोलन के दौरान महिलाएं और युवा लड़कियां भी सुरक्षित महसूस करती थीं।
उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी का अपने विचारों को लेकर स्पष्ट होना सकारात्मक बात है। उनके अनुसार, आंदोलन किसी एक खास वर्ग तक सीमित नहीं था, बल्कि एक उद्देश्य के साथ लोग इसमें शामिल हुए थे।
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हिरासत के मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज
दिल्ली में प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से पहले CJP नेताओं को हिरासत में लिए जाने के मामले ने राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। सुप्रिया सुले ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार और सरकार के कानून-व्यवस्था संबंधी तर्कों पर चर्चा की जरूरत बताई।
हालांकि, हिरासत की परिस्थितियों, संबंधित आदेशों और प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया के बारे में विस्तृत जानकारी सामने आने पर मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।
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