UP SIR: फॉर्म-7 विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, चुनाव आयोग को जांच कर रिपोर्ट देने का निर्देश

UP Voter List: उत्तर प्रदेश में SIR के दौरान एक समुदाय को निशाना बनाकर फॉर्म-7 जमा करने का आरोप, CJI सूर्यकांत की बेंच ने चुनाव आयोग से मांगी जांच रिपोर्ट

New Delhi: उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर फॉर्म-7 के कथित दुरुपयोग का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि यूपी में बड़ी संख्या में फॉर्म-7 जमा किए गए, जिनका उद्देश्य मतदाता सूची से लोगों के नाम कटवाना था। मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को इन शिकायतों की जांच करने और जरूरी सुधारात्मक कदम उठाने का निर्देश दिया है।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने चुनाव आयोग से कहा कि उत्तर प्रदेश में सामने आई कथित गड़बड़ियों की जांच की जाए। जिन शिकायतों का अब तक समाधान नहीं हुआ है, उनकी पड़ताल कर आवश्यक कार्रवाई की जाए और इसकी रिपोर्ट अदालत में दाखिल की जाए।

यूपी में एक समुदाय को निशाना बनाने का आरोप
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश के एक विधानसभा क्षेत्र में एक खास समुदाय के लोगों को निशाना बनाकर 32 फॉर्म-7 जमा किए गए थे। इनमें से दो फॉर्म पर बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के हस्ताक्षर होने का भी दावा किया गया।

याचिकाकर्ता ने कहा कि तेलंगाना और कर्नाटक में इसी तरह की शिकायतों के बाद एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए, लेकिन उत्तर प्रदेश में ऐसी कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

केरल और छत्तीसगढ़ में गलत पाए गए थे आवेदन
याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि 5 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और केरल में बड़ी संख्या में फॉर्म-7 जमा होने से जुड़ी शिकायतों पर जवाब मांगा था। उनके मुताबिक, छत्तीसगढ़ और केरल के मामलों का समाधान हो चुका है, लेकिन उत्तर प्रदेश में समस्या बनी हुई है।

वहीं, चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डीएस नायडू ने बताया कि केरल और छत्तीसगढ़ में बड़ी संख्या में फॉर्म-7 जमा किए गए थे। आयोग के अधिकारियों ने इन आवेदनों की जांच की और उन्हें गलत पाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन आवेदनों के आधार पर किसी भी मतदाता का नाम वोटर लिस्ट से नहीं हटाया गया।

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चुनाव आयोग को शिकायत देने की सलाह
चुनाव आयोग की ओर से कहा गया कि उत्तर प्रदेश से जुड़ी शिकायतें औपचारिक रूप से आयोग के सामने रखी जानी चाहिए। शिकायत मिलने पर उनकी जांच की जाएगी।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से यूपी में कथित गड़बड़ियों से संबंधित पूरी जानकारी चुनाव आयोग को उपलब्ध कराने को कहा। अदालत ने आयोग को निर्देश दिया कि शिकायतों की जांच कर आवश्यक सुधार किए जाएं और इस संबंध में रिपोर्ट दाखिल की जाए।

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क्या है फॉर्म-7?
चुनाव आयोग की मतदाता सूची प्रक्रिया में फॉर्म-7 का इस्तेमाल किसी मतदाता के नाम को सूची से हटाने या नाम शामिल किए जाने पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए किया जाता है। इसके तहत प्राप्त आवेदन की जांच और निर्धारित प्रक्रिया का पालन जरूरी होता है।

उत्तर प्रदेश में SIR के दौरान फॉर्म-7 के कथित दुरुपयोग का यह मामला मतदाता सूची की शुद्धता और पुनरीक्षण प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर महत्वपूर्ण है। अब इस मामले में चुनाव आयोग की जांच और सुप्रीम कोर्ट में दाखिल होने वाली रिपोर्ट पर नजर रहेगी।

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